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वो देश, जहां हाथों से नहीं छुरे से होता है मसाज, 2000 साल पुराना है इतिहास

Mon, 22 Jun 2020 10:58 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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छुरे से मसाज - फोटो : Social media
छुरे का इस्तेमाल मांस, फल, सब्जी वगैरह काटने में होता है, लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि छुरे से मसाज भी किया जा सकता है? सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगता है, लेकिन है ये बिल्कुल सच। पूर्वी एशियाई देश ताइवान के मसाज पार्लरों में छुरे से बड़े पैमाने पर लोगों का मसाज किया जाता है। इसे 'डाउलियाओ' कहते हैं, जिसका चीनी जबान में मतलब होता है, 'छुरे से मसाज' या 'नाइफ थेरेपी'। चीनी औषधि विज्ञान में इसका काफी चलन है। वहां छुरे से मसाज का ये सिलसिला करीब 2000 साल पुराना है। इसकी शुरुआत बौद्ध भिक्षुओं ने की थी। 
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छुरे से मसाज - फोटो : Social media
करीब एक हजार साल पहले तांग वंश के जमाने में ये थेरेपी जापान में भी खूब फली फूली। 1940 के दशक में चीन के गृह युद्ध के दौरान छुरे से मसाज की ये परंपरा ताइवान जा पहुंची। हालांकि आज चीन और जापान में इस थेरेपी का चलन लगभग खत्म हो गया है, लेकिन ताइवान में ये अभी भी खूब लोकप्रिय है। ताइवान की राजधानी ताइपेई में इस थेरेपी को सिखाने के लिए एक एजुकेशन सेंटर भी खोला गया है। 

इसका नाम है, द एनशिएंट आर्टऑफ नाइफ मसाज डाओलियाओ आई-जिंग एजुकेशनल सेंटर। पूरे ताइवान में इस एजुकेशन सेंटर की करीब 36 शाखाएं हैं। इनमें से 15 तो पिछले पांच वर्षों में ही खोली गई हैं। यहां सारी दुनिया के लोगों को छुरे से मसाज की कला सिखाई जाती है। फ्रांस, कनाडा, हांगकांग और जापान से लोग इस थेरेपी को सीखने ताइवान आते हैं। 
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छुरे से मसाज - फोटो : Social media
छुरे से मसाज के फायदे

आज लोग इन मसाज नाइफ का इस्तेमाल जख्म ठीक करने, नींद बेहतर करने और शरीर के पुराने दर्द ठीक करने में भी कर रहे हैं। चीनी औषधि विज्ञान में जिस तरह एक्यूप्रेशर थेरेपी की जाती है, ठीक उसी तरह नाइफ थेरेपी में प्रेशर प्वाइंट को टारगेट किया जाता है। इन्हें क्यूआई-डोर्स कहते हैं। 

ताइवान के एक ऐसे ही मसाज सेंटर की डायरेक्टर हसिआओ मेई-फैंग कहते हैं कि 15 साल पहले ही उन्होंने नाइफ मासज की दुनिया में कदम रखा है। इससे पहले वो ब्यूटी ट्रीटमेंट और मेरेडियन मसाज करती थीं। मेरेडियन मसाज भी एक पारंपरिक चीनी औषधि विज्ञान में की जाने वाली मालिश है। मेई-फैंग कहती हैं कि सारा दिन लोगों को मेरेडियन मसाज करने के बाद वो बहुत थक जाती थीं। मसाज के दौरान निकलने वाली नेगेटिव एनर्जी उन पर बुरा प्रभाव डालती थी, लेकिन जब से उन्होंने नाइफ थेरेपी शुरू की है, तब से बहुत सुकून है। 

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छुरे से मसाज - फोटो : Social media
नाइफ थेरेपी में कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। मिसाल के लिए अगर मसाज करने वाला अच्छे मूड में नहीं है, तो उसे नाइफ नहीं दी जानी चाहिए। माना जाता है कि इस तरह मसाज करने वाले की बुरी ऊर्जा मसाज लेने वाले पर बुरा प्रभाव डालेगी। 

छुरे से मसाज करने वालों को हमेशा पॉजिटिव एनर्जी के साथ काम करना चाहिए। इसके लिए उन सभी को शुद्ध शाकाहारी भोजन का सेवन करना पड़ता है। मेई-फैंग कहती हैं वो अपनी टीम के साथ हर रोज सुबह पांच बजे या उससे भी पहले उठती हैं। फिर थोड़ी वर्जिश करती हैं और अपने क्यूआई को पाने के लिए किसी तकिए पर 30 मिनट तक चाकू से वार करती हैं। 
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छुरे से मसाज - फोटो : Social media
मेई फैंग कहती हैं कि उनके ग्राहक अपने साथ बच्चों को भी लाते हैं। ये बच्चे पार्लर में लकड़ी की डंडियों से खेलते हैं और स्कूल का तनाव दूर करते हैं। साथ ही वो ये भी कहती हैं कि क्यूआई हमारी संस्कृति में सब कुछ है। अगर आपकी ऊर्जा में संतुलन है, तो फिर आप अपना काम सही-सही करते हैं। मेई फैंग के पास बहुत से लोग अपने जीवन की दिशा या मकसद खोजने के लिए भी आते हैं। ये काम वो एक कम्पास के साथ एक छोटे से बोर्ड की मदद से करती हैं। ये एक तरह का अटकल बोर्ड है जो एक प्राचीन चीनी पाठ पर आधारित है। इसे आई-चिंग या बुक ऑफ चेंज कहा जाता है। 
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छुरे से मसाज - फोटो : Social media
मेई फैंग कहती हैं, 'ये बोर्ड मेरे लिए गूगल का काम करता है। मैं अपने क्लाइंट की सभी जानकारियां इस बोर्ड पर रखती हूं और मुझे उसका अतीत, वर्तमान और भविष्य सब पता चल जाता है, जिनकी मदद से मैं अपने ग्राहकों को बेहतर राय दे पाती हूं।' मेई फैंग के मुताबिक नाइफ थेरेपी के जादुई असर के बारे में उन्हें किसी को समझाने की जरूरत नहीं है। कोई भी इंसान जब एक बार छुरे से मसाज करा लेता है, तो खुद ही इसका कायल हो जाता है। 
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