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समुद्री डाकुओं पर नजर रखेगा ये जीव, मछली चोरी रोकने में प्रशासन को पहुंचाएगा मदद

Tue, 08 Sep 2020 11:45 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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समुद्री पक्षी - फोटो : Pixabay
वो अद्भुत है, अविश्वसनीय है, अकल्पनीय है। वो खुले आसमान में हवा के साथ कदमताल करता है। वो बिना थके, जमीन पर उतरे बिना एक महीने में 10 हजार किलोमीटर तक परवाज कर सकता है। और अपनी पूरी जिंदगी में 85 लाख किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। उसके तीन मीटर लंबे पंख उसे गजब की ताकत देते हैं। वो एक ही उड़ान में समुद्र का चक्कर लगा सकता है। वो है, एल्बाट्रॉस यानी एक विशेष प्रकार का समुद्री पक्षी जिसे बहुत जल्द एक नया काम मिलने वाला है।
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समुद्री पक्षी - फोटो : Pixabay
प्रशासन की मदद
एल्बाट्रॉस अब समुद्र से मछली चुराने वालों और समुद्री डाकुओं की खबर लेगा और उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाने में प्रशासन की मदद करेगा। मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए जाल डालते हैं। लेकिन, बहुत बार उसमें अन्य पक्षी भी फंस जाते हैं। बायकैचिंग की वजह से ही हजारों समुद्री पक्षी हर साल मौत के मुंह में समा जाते हैं। पिछले कई दशकों में बार-बार बायकैचिंग का मुद्दा उठाया गया। खास तौर से एल्बाट्रॉस और समुद्र काक का मुद्दा उठाया गया जो सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
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समुद्री पक्षी - फोटो : Pixabay
समुद्री लुटेरों पर नजर
पर्यवेक्षकों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बायकैचिंग करने वाली नौकाओं पर कड़ी नजर रखी गई। जिसके बाद एलबेट्रोस की बायकैचिंग में जबरदस्त गिरावट आई। इसके अलावा समुद्री लुटेरों पर नजर रखने के लिए दक्षिणी महासागर में सैन्य जहाज भी गश्त करते हैं। पर, सवाल ये है कि समुद्र में अवैध तरीके से मछलियां पकड़ने वाली नौकाओं की निगरानी कैसे की जाए? अब कौन कानून असरदार साबित हो रहा है, और कौन नहीं, इसकी निगरानी का कोई सुनिश्चित तरीका नहीं है।

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समुद्री जीव - फोटो : Pixabay
अंतरराष्ट्रीय समुद्र
इसलिए एल्बाट्रॉस की बायकैचिंग पर नजर रखना मुश्किल है। समुद्र में सभी देशों की अपनी सीमा होती है। उसके आगे समुद्र अंतरराष्ट्रीय है। वहां किसी भी देश के लिए निगरानी करना बहुत मुश्किल है। लेकिन, अब ये काम एल्बाट्रॉस करेंगे, जो 30 दिनों में 10 हजार किलोमीटर फासला तय करेंगे और समुद्री लुटेरों की मुखबिरी करेंगे। मछली पकड़ने की रेखाओं में फंसने की वजह से अक्सर एल्बाट्रॉस मर रहे थे। रिसर्चरों ने एल्बाट्रॉस और मछली पकड़ने की नौकाओं के बीच ओवरलैप का अध्ययन किया।
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समुद्री पक्षी - फोटो : Pixabay
पक्षियों की बायकैचिंग
शोधकर्ताओं ने ये समझने का प्रयास किया कि समुद्री पक्षी मछली के संपर्क में कहां से आते हैं। साथ ही ये भी जाना कि कौन-सा पक्षी किस तरह की नाव सबसे ज्यादा पीछा करता है। इससे ये समझने में मदद मिली कि पक्षियों की बायकैचिंग सबसे ज्यादा कहां पर हो रही है। ऑन बोर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम से लिए गए डेटा की मदद से समुद्र में नौकाओं की मौजूदगी की मैपिंग संभव है। लेकिन ये रिकॉर्ड रियल टाइम नहीं होते। पहले रिसर्चरों को ये अंदाजा नहीं था कि मछली पकड़ने वाली नौकाओं के साथ और खुले में समुद्री पक्षी कितना समय बिताते हैं।
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समुद्री पक्षी - फोटो : Pixabay
मछली पकड़ने की गतिविधियां
जब रिसर्चरों को समय का अंदाजा हो गया। तो, उन्होंने एक ऐसा डेटा लॉगर विकसित किया जो एल्बाट्रॉस से जुड़ा था। ये लॉगर नौकाओं का रडार पता लगाता है। और, अन्य कई प्रकार की जानकारियां जमा करता है। आंकड़ों से पता चलता है कि मछली पकड़ने वाली नौकाओं के संपर्क में आने वाले हर परिंदे के लिंग और उसकी उम्र का भी ताल्लुक होता है। उदाहरण के लिए नर पक्षी, अंटार्कटिका के करीब दक्षिण की ओर बढ़ते हैं। वहां मछली पकड़ने वाली नावें दुर्लभ हैं। जबकि मादाएं उत्तर की ओर चलती हैं, जहां मछली पकड़ने की गतिविधियां ज्यादा होती हैं।
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समुद्री पक्षी - फोटो : Pixabay
वैश्विक मानचित्र
इस फर्क को समझना रिसर्च का पहला उद्देश्य था। लॉगर से जो डेटा मिला वो एक तरह का बोनस साबित हुआ इससे खुले समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियां मैनेज करने में मदद मिली। मूल रूप से ये काम मछली पकड़ने वाली नौकाओं और सामान्य नौकाओं के बीच अंतर पता लगाने के लिए किया गया था। साथ ही ये भी पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या पक्षी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के प्रति आकर्षित होते हैं या नहीं। लेकिन जब लॉगर्स के डेटा को वैश्विक मानचित्र के साथ जोड़ दिया गया।
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समुद्री जीव - फोटो : Pixabay
दक्षिण महासागर
तो, सभी नावों के स्थान को एक सक्रिय स्वचालित पहचान प्रणाली के साथ देखा जा सकता था। इस रडार से नौकाओं के बीच होने वाले टकराव रोकने में मदद मिलती है। एल्बाट्रॉस डेटा ने अनायास ही दक्षिण महासागर में अवैध मछली पकड़ने की संभावित सीमा और पैमाने को उजागर कर दिया था। विशाल समुद्र में मछलियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की चोरी सिर्फ नौकाओं के जरिए रोकना मुश्किल है। लेकिन एल्बाट्रॉस एक बड़े क्षेत्र को अकेले ही कवर कर सकता है।

जब एलबेट्रोस पर लगा डेटा किसी फिशिंग बोट का पता लगाता है तो लॉगर की मदद से आसपास की नौकाओं को इसकी जानकारी मिल जाती है और पूछताछ शुरू हो जाती है। अगर समय रहते बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह कर लिया जाए तो समुद्री लुटेरों पर नजर रखी जा सकती है। साथ ही एल्बाट्रॉस और अन्य समुद्री को बचाने में भी मदद मिलेगी।
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