बनगांव की घुमौर होली
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हिंदू-मुस्लिम एकता का भी संदेश देती है बनगांव की होली
इस उत्सव में न जाति का भेद होता है, न धर्म का बंधन। हिंदू-मुस्लिम सभी एक साथ इस होली में सम्मिलित होते हैं, यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। आईएएस, आईपीएस, सांसद, विधायक, व्यवसायी और प्रवासी ग्रामीण भी इस पर्व में भाग लेते हैं, जिससे यह उत्सव सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भव्य उदाहरण बन जाता है।
बुजुर्गों और युवाओं का साझा उत्सव
यह होली पीढ़ियों का संगम भी है। बुजुर्ग बच्चों को कंधे पर बैठाकर सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाते हैं, तो युवा बुजुर्गों को कंधे पर उठाकर आदर और उत्तरदायित्व का परिचय देते हैं। यह नजारा केवल एक परंपरा नहीं बल्कि जीवन मूल्यों की जीवंत शिक्षा बन जाता है।