बिहार के औरंगाबाद में एक महिला ने बीमा कराने के लिए बीमा कंपनी एलआईसी को राशि दी। लेकिन कंपनी ने बीमा नहीं किया। बीमा न होने पर महिला ने कंपनी से राशि वापस मांगी। राशि वापस न होने पर बीमा कंपनी को वकालतन नोटिस दी गई, फिर भी राशि नहीं मिली। थक-हार कर पीड़िता ने उपभोक्ता अदालत की शरण ली। अदालत में 10 साल तक मामला चला। उसके बाद आखिरकार बुधवार को पीड़ित महिला को बीमा कंपनी से सूद सहित अपनी रकम मिली।
यह है मामला
दरअसल, पटना शहर की निवासी निर्मला देवी ने बीमा पॉलिसी लेने के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम की औरंगाबाद शाखा को 35 हजार की राशि जमा की थी। बीमा कंपनी ने महिला को राशि जमा की रसीद भी दी, जिसका बीओसी नंबर-49537 है। राशि जमा करने के बाद भी बीमा कंपनी ने महिला का बीमा नहीं किया और न ही पॉलिसी सर्टिफिकेट दिया। इसके बाद से पीड़िता द्वारा बीमा कंपनी से लगातार राशि वापसी की मांग की जाती रही, लेकिन राशि की भी वापसी नहीं हुई। कई साल बीत गए, फिर भी राशि वापस नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित महिला ने अपने अधिवक्ता के जरिए बीमा कंपनी को वकालतन नोटिस भी भेजा। लेकिन बीमा कंपनी ने वकालतन नोटिस का भी जवाब नहीं दिया।