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सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों के लिए सविता जला रहीं ज्ञान का दीपक

Tue, 15 Mar 2016 10:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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सविता दत्त - फोटो : अमर उजाला
माना कि अंधेरा घना है, लेकिन दिया जलाना कहां मना है। डॉ. सविता दत्त इसी भावना को पिछले 13 साल से सच करने में जुटी है। इन्ही सालों में उन्होनें शिक्षा का दिया जला कर कई हजार बच्चों के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से उज्जवल किया है। सही मायने में इन लाइनों को सच कर सुकून से जी रही है 72 वर्षीय डॉ. सविता दत्त।
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गरीब बच्चों के ‌के बारे में सोचना शुरू किया

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सविता दत्त - फोटो : अमर उजाला
शादी के बाद जहां महिलाएं अपने परिवार और कॅरियर के बारे में सोचती है। वहीं इन सब बातों को छोड़ डॉ. सविता दत्त ने ऐसे गरीब बच्चों के बारे में सोचना शुरू किया। जिनके माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ानें में असमर्थ थे। जो अपने बच्चों को कम उम्र में भीख मंगवाते थे या फिर काम करवाते थे। ऐसे बच्चों के लिए वह हमेशा चितिंत रहती थी, तब डॉ. सविता ने सात बच्चों को जमा कर सेक्टर-21 के पार्क में स्कूल की शुरूआत की।
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आज स्कूल में 524 बच्चे हैं

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सविता दत्त - फोटो : अमर उजाला
धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया और साल दर साल स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ती गई। आज स्कूल में 524 बच्चे हैं। वहीं स्कूल के पहली से पांचवी तक के बच्चे पार्क में पढ़ते है। छठी से बाहरवीं कक्षा तक के छात्र पार्क के साथ बनी इमारत में पढ़ते है। स्कूल में पढने वाले बच्चे स्लम और घरों में काम करने वाली नौकरानियों के है। प्रकाशद्वीप स्कूल में पहली से बाहरवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है।

दसवीं और बाहरवीं छात्रों को ओपन बोर्ड से करवाई जाती है

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सविता दत्त - फोटो : अमर उजाला
दसवीं और बाहरवीं छात्रों को ओपन बोर्ड से करवाई जाती है। स्कूल में 21 टीचर है और 15 वॉलंटियर हैं। जो बच्चों को अंग्रेजी, विज्ञान, कंप्यूटर और गणित की शिक्षा मुफ्त देते है। डॉ. दत्त स्कूल में पढने वाले सभी बच्चों को किताबें, ड्रेस, बैग और खाना मुफ्त उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही स्कूल में स्मार्ट क्लास, कंटिग एंड ट्रैलरिंग और सौर ऊर्जा के बारे में बच्चों से मॉडल बनवाए गए हैं। जिससे की आने वाले समय में बच्चों को बिना साधनों के कैसे रह सकते है। इसके बारे में पूरी जानकारी बच्चों को है।
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स्कूल के बच्चों ने सौर ऊर्जा मोबाइल बस का मॉडल बनाया

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सविता दत्त - फोटो : अमर उजाला
वहीं पांचवी क्लास में पढने वाले बच्चों ने मॉडल तैयार कर रखा है। जिससे बच्चे साइकिल चलाएंगे तो उससे लाइन बनेगी। वहीं स्कूल के बच्चों ने सौर ऊर्जा मोबाइल बस का मॉडल बना कर तैयार किया है। स्कूल के पास फंड हुआ तो वह उसे बनाएंगे। स्कूल में स्मार्ट क्लास, कंटिग एंड टेलरिंग कप्यूटर लैब में बच्चों को जानकारी दी जाती है। बच्चों के लिए जल्द ही वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएगे। जिनमें बच्चों को मोबाइल रिपेयरिंग ऑटों मोबाइल,इलेक्ट्रीशियन जैसे कोर्स बच्चों को सिखाए जाएंगे।
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स्कूल चलाने को अपने पति ,बच्चों और दोस्तों की मदद लेती है

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सविता दत्त - फोटो : अमर उजाला
स्कूल को चलाने के लिए  डॉ. दत्त अपने पति ,बच्चों और दोस्तों की मदद लेती है। उनके बेटे समीर दत्त प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। वह भी अपनी सैलरी  से कुछ धन स्कूल चलाने के लिए देते हैं और कंपनी में ही बच्चों की प्लेसमेंट भी करवाते है। उनकी बेटी जो विदेश में रहती है। वह वहां पर कंपनियों का प्रोजेक्ट बनाती है। उससे जो आमदनी होती है उसकी कमाई अपनी मां को भेजती है। पति रिटायर्ड मेजर जनरल सुधीर कुमार दत्त पहले अपनी तनख्वाह और अब पेंशन को स्कूल चलाने में लगाते है। 
नाम-डॉ. सविता दत्त, पिता-लक्ष्मण देव, माता-प्रकाश, पति-मेजर जनरल सुधीर कुमार दत्त(रिटायर्ड), जन्म-2 अप्रैल 1943, पढ़ाई-पीएचडी-राजनीति शास्त्र चड़ीगढ़। पिछले 13 साल से स्कूल चला रही है। उसके लिए 1999 में छोड़ दी थी सरकारी नौकरी।
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