दुनिया 9 सितंबर को विश्व ईवी दिवस मना रही है। विभिन्न श्रेणियों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने में भारत ने भी महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। हालांकि अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है।
भारत सरकार का वाहन डैशबोर्ड डेटा ग्रीन मोबिलिटी सॉल्यूशंस (हरित गतिशीलता समाधानों) की ओर बढ़ने की बढ़ती ट्रेंड को दर्शाता है।
विज्ञापन
2 of 8
Sridhar Vembu Electric Three-Wheeler
- फोटो : X/@svembu
ईवी को अपनाने में सबसे अहम ट्रेंड तीन-पहिया श्रेणी में देखी गई है, जहां ईवी ने समग्र बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी की है। डेटा के अनुसार, इस वर्ष (2024) खरीदे गए सभी नए तीन-पहिया वाहनों में से 53.61 प्रतिशत इलेक्ट्रिक थे, जिससे यह सेगमेंट ईवी अपनाने में अव्वल रहा।
विज्ञापन
3 of 8
Ola Electric Scooter
- फोटो : PTI
ईवी दो-पहिया सेगमेंट
दो-पहिया सेगमेंट ने भी ईवी अपनाने के उत्साहजनक संकेत दिखाए हैं। जिसमें इस वर्ष 2024 में अब तक की सभी दो-पहिया बिक्री में से 4.97 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों का योगदान है।
हालांकि, तीन-पहिया वाहनों की तुलना दोपहिया श्रेणी में बढ़ोतरी का प्रतिशत कम है। लेकिन भारत के समग्र वाहन बिक्री बाजार में इसके दबदबे को देखते हुए, दो-पहिया श्रेणी में बढ़ोतरी की महत्वपूर्ण क्षमता है। ज्यादातर उपभोक्ता लागत-प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की तलाश करते हैं। ऐसे में इस सेगमेंट में ईवी की एंट्री आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है।
4 of 8
Tata Punch EV
- फोटो : Tata Motors
इलेक्ट्रिक चार-पहिया सेगमेंट
हालांकि, चार-पहिया सेगमेंट में, ईवी का अपनाना तुलनात्मक रूप से कम है। जिसमें इस वर्ष कुल कार बिक्री का सिर्फ 2.14 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें हैं। इसके बावजूद, ईवी मॉडल और सरकारी प्रोत्साहनों की बढ़ती उपलब्धता से इस सेगमेंट में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
5 of 8
An electric bus in Karnataka
- फोटो : PTI
इलेक्ट्रिक बस
दिलचस्प बात यह है कि इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने की दर इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में ज्यादा है। जिसमें 2024 में बेची गई सभी नई बसों में से 3.20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक हैं। यह ट्रेंड टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन समाधानों के बढ़ते महत्व को उजागर करती है। क्योंकि शहरों का लक्ष्य उत्सर्जन को कम करना और सार्वजनिक परिवहन में स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देना है।
विज्ञापन
6 of 8
Electric Car
- फोटो : Freepik
आरएमआई के निदेशक समिथा शिलेदार ने एएनआई को बताया, "इलेक्ट्रिक वाहन एक बहुत ही आकर्षक समाधान प्रदान करते हैं। क्योंकि वे कोई भी टेलपाइप उत्सर्जन उत्सर्जित नहीं करते हैं। जिससे उनकी वायु गुणवत्ता में सुधार होता है, जो वायु प्रदूषण को कम करता है। यह कार्बन उत्सर्जन को भी कम करता है। इसलिए यह भारत को अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करता है। और आम तौर पर आईसी इंजन वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की परिचालन लागत कम होती है।"
विज्ञापन
7 of 8
Electric Vehicles Charging Station
- फोटो : Freepik
किस राज्य में सबसे ज्यादा ईवी बिक्री
राज्य-वार स्तर पर, वाहन डैशबोर्ड डेटा ने दिखाया कि गोवा ईवी अपनाने में देश का नेतृत्व कर रहा है। जहां इस वर्ष बेचे गए सभी नए वाहनों में से 14.20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक थे। त्रिपुरा दूसरे स्थान पर है, इसके बाद चंडीगढ़ तीसरे नंबर पर है। दिल्ली भी कुल वाहन बिक्री में ईवी के 10.72 प्रतिशत दर के साथ अहम जगह रखता है, जो राजधानी के टिकाऊ शहरी गतिशीलता की ओर बढ़ने का प्रदर्शन करता है।
दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश में ईवी अपनाने की दर सबसे कम रही है। जहां नए बेचे गए वाहनों में सिर्फ 1.09 प्रतिशत इलेक्ट्रिक थे।
Kinetic Green Electric Three-Wheeler
- फोटो : Amar Ujala/Amar Sharma
भारत में सभी सेगमेंट में कुल ईवी बिक्री के मामले में, तीन-पहिया श्रेणी भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में हावी है। जो इस वर्ष कुल ईवी बिक्री का लगभग 51 प्रतिशत है।
जैसा कि विश्व इलेक्ट्रिक वाहन दिवस स्वच्छ गतिशीलता समाधानों के लिए वैश्विक प्रतिबद्धता को उजागर करता है, भारत के आंकड़ें एक आशाजनक बदलाव को दर्शाते हैं। लेकिन विभिन्न वाहन सेगमेंट में इलेक्ट्रिक अपनाने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करना है।