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World EV Day: भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ईवी बाजारों में क्यों है शुमार, जानें अहम बातें

Sat, 09 Sep 2023 08:24 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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For Reference Only - फोटो : अमर उजाला
भारत के बेंगलुरु शहर में इलेक्ट्रिक डिलीवरी स्कूटर के पीछे रखा किराने का सामान नजर आना एक आम बात हो गई है। हालांकि यह चलन देश के कई बड़े शहरों में बढ़ रहा है। भीड़-भाड़ वाले बाजारों में, यात्रियों को इलेक्ट्रिक रिक्शा में चढ़ते और उतरते देखा जा सकता है। और जैसे-जैसे शहर और देश इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं, इलेक्ट्रिक परिवहन पर ध्यान केंद्रित करने वाले तकनीकी स्टार्टअप की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में से एक है और अब यहां ईवी मालिकों की संख्या लाखों में हैं। आईईए की अप्रेल में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके 2.3 मिलियन (23 लाख) इलेक्ट्रिक वाहनों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा सस्ते और अधिक लोकप्रिय दो या तीन-पहिया वाहन हैं - यानी मोटरबाइक, स्कूटर और रिक्शा - और 2022 में भारत के आधे से ज्यादा तीन-पहिया पंजीकरण इलेक्ट्रिक थे।
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Electric Scooter - फोटो : For Reference Only
विश्लेषकों का कहना है कि ईवी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और ग्राहकों के लिए छूट प्रदान करने के लिए 1.3 अरब डॉलर की संघीय योजना, पिछले दशक की बढ़ती ईंधन लागत और दीर्घकालिक लागत लाभों के बारे में उपभोक्ता जागरूकता बिक्री बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रही है।

इलेक्ट्रिक वाहन प्लेनेट-वार्मिंग एमिशन (पृथ्वी को गर्म कर रहे उत्सर्जन) को कम करने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने का एक समाधान है। क्योंकि सड़क परिवहन वैश्विक उत्सर्जन में बहुत अहम योगदान देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में कार्बन को सफलतापूर्वक कम करने के लिए बिजली उत्पादन को फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) से दूर ले जाना, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं का प्रबंधन करना और देश में विभिन्न सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि में ईवी की बिक्री को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा।
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Electric Rickshaw Delivery - फोटो : For Reference Only
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 25 वर्षीय रिक्शा डिलीवरी ड्राइवर, बालाजी प्रेमकुमार ने इस साल की शुरुआत में ईवी को अपनाया। ज्यादातर ट्रैफिक लाइट में रुकने पर वह गैस से चलने वाले तिपहिया वाहनों से घिरा रहता है, जो गड़गड़ाहट की आवाज पैदा करते हैं, हवा में घना धुआं फैलाते हैं - कुछ ऐसा जो वह भी इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने से पहले किया करता था।

प्रेमकुमार ने कहा कि नया वाहन चलाना आसान और ज्यादा आरामदायक है और वह पहले से ही लागत में अंतर देख पा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर मैं तीन घंटे तक वाहन को चार्ज करने के लिए 60 रुपये (0.72 सेंट) खर्च करता हूं, तो मुझे 80 किलोमीटर (50 मील) मिलता है। डीजल वाहन में इतना ही माइलेज पाने के लिए मुझे कम से कम 300 रुपये ($3.60) खर्च करने पड़ेंगे।"

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Electric Rickshaw - फोटो : For Reference Only
बेंगलुरु स्थित लॉजिस्टिक्स कंपनी सिटी लिंक के लिए रिक्शा डिलीवरी ड्राइवर, 23 वर्षीय संतोष कुमार भी इलेक्ट्रिक को अपनाने के बाद से फायदा महसूस कर रहे हैं।

कुमार ने कहा, "वाहन कभी खराब नहीं होता और चारों ओर बहुत सारे चार्जिंग प्वाइंट हैं इसलिए मेरे वाहन का चार्ज कभी खत्म नहीं होता।" IEA में ऊर्जा प्रौद्योगिकी और परिवहन विश्लेषक एलिजाबेथ कोनोली के अनुसार, भारत में चार्जिंग पॉइंट 10 गुना बढ़ गए हैं।

जबकि कुमार के पास अभी तक अपना खुद का इलेक्ट्रिक वाहन नहीं है - जिसे वह चलाते हैं वह कंपनी का है - वह अपना खुद का या कई ऐसे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का सपना देखते हैं जिन्हें वह किराए पर दे सकें।

उन्होंने कहा, "यह सिर्फ कुछ समय की बात है जब हर कोई इलेक्ट्रिक को अपनाएगा।"
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Electric Scooter - फोटो : Simple Energy
दोपहिया और तिपहिया वाहनों का इस्तेमाल ज्यादातर डिलीवरी करने या सवारी देने के लिए किया जाता है। बेंगलुरु स्थित थिंक टैंक, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी के एन.सी. थिरुमलाई ने कहा, इलेक्ट्रिक वाहन तेजी से मीलों का सफर तय करते हैं, जिससे इलेक्ट्रिक मॉडल गैस के लिए पैसे खर्च करने की तुलना में काफी सस्ता विकल्प बन जाता है।

लेकिन उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दीर्घकालिक व्यवहार्यता बैटरी के साथ-साथ अन्य पार्ट्स के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर निर्भर करती है। वाहनों को चार्ज करने के लिए बिजली का स्रोत भी ग्रीन होना चाहिए, जो फिलहाल नहीं है।
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Thermal Power Plant - फोटो : For Reference Only
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार भारत की तीन चौथाई से ज्यादा बिजली फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) - ज्यादातर कोयले - से पैदा होती है। और भारत सहित खनन कंपनियों की इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए कंपोनेंट्स को बनाने के लिए आवश्यक खनिजों की असुरक्षित खनन प्रथाओं के लिए आलोचना की गई है।

थिरुमलाई ने कहा, "जैसे-जैसे ईवी बढ़ रही है और लिथियम जैसे खनिज देश के भीतर ही मिलने लगे हैं, खनन उद्योग को निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टिकाऊ खनन प्रथाओं को आगे बढ़ाया जाए।"

थिरुमलाई भविष्य में क्लीन बिजली को लेकर आशावादी हैं। "देश में नवीकरणीय ऊर्जा पर भारी जोर" का मतलब है कि समय के साथ इलेक्ट्रिक वाहन उत्सर्जन में कमी आनी चाहिए।

जबकि रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) पर प्रगति मिली-जुली रही है, भारत ने दशक के आखिर तक 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी स्थापित करने की योजना बनाई है - जो 300 मिलियन (30 करोड़) भारतीय घरों को बिजली देने के लिए पर्याप्त है - और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन तक पहुंचने का लक्ष्य है।
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Electric Scooter - फोटो : For Reference Only
नई दिल्ली स्थित स्वच्छ ऊर्जा गैर-लाभकारी आरएमआई इंडिया की अक्षिमा घाटे ने कहा, लेकिन देश को "ईवी के साथ-साथ संबंधित उद्योगों के लिए फाइनेंसिंग की संभावाओं को कैसे तलाशा  जाए" इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है ताकि उन लोगों की संख्या बढ़ सके जो उन्हें खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा, संभावित ग्राहकों के लिए कम ब्याज दर पर लोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए टैक्स में छूट देने से बिक्री बढ़ सकती है, खासकर कम आय वाले खरीदारों के लिए।

फिर भी, घाटे को लगता है कि भारत का छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ना अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं जैसे इंडोनेशिया, फिलीपींस और कुछ अफ्रीकी देशों जैसे दोपहिया और तिपहिया देशों के लिए एक टेम्पलेट के रूप में काम कर सकता है।

उन्होंने कहा, ''जब विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए मानक स्थापित करने की बात आती है, तो भारत अग्रणी भूमिका निभाता है।''
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