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3-सिलेंडर या 4-सिलेंडर इंजन वाली कार खरीदने से पहले जान लें दोनों में क्या है अंतर

Sun, 01 Mar 2020 03:23 AM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जब आप खरीदने के लिए जाते हैं या किसी कार की स्पेसिफिकेशंस पढ़ते हैं और अक्सर सुनते हैं कि इसमें 3-सिलेंडर या 4-सिलेंडर वाला इंजन लगा है। शोरूम में खड़ा सेल्स पर्सन भी बोलते हैं कि 4-सिलेंडर वाला इंजन 3-सिलेंडर वाले से ज्यादा पावरफुल है। उनका तर्क होता है कि 3-सिलेंडर वाला इंजन ज्यादा आवाज करता है। आइए आज जानते हैं कि 3-सिलंडर और 4-सिलेंडर वाले इंजन में क्या है अंतर, साथ ही क्या हैं फायदे और नुकसान...
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Hyundai Aura BS6 Engine - फोटो : Hyundai

क्या है कार सिलेंडर

 आइए सबसे पहले जानते हैं कार सिलेंडर के बारे में कि यह होता क्या है। दरअसल कार सिलेंडर इंजन की जान होता है। जैसे कार को इंजन चलाता है, वैसे ही इंजन को सिलेंडर्स चलाते हैं। कह सकते हैं कि सिलेंडर्स कार इंजन के पावर हाऊस होते हैं। कार इंजन में सिलेंडर के आकार वाले इन सिलेंडर्स में पिस्टन लगे होते हैं। जब  ईंधन और हवा के मिश्रण को पिस्टन के ऊपर कंबशन चैंबर में प्रज्वलित किया जाता है, तो इसे सिलेंडर और कनेक्टिंग रॉड्स के माध्यम से नीचे उतारा जाता है और यह क्रैंकशॉफ्ट को चलाता है, बिना जली गैसों को पीछे की तरफ धकेलता है।

कार सिलेंडर में ही इंजन के पिस्टन रिंग्स के अंदर क्रैंकशॉफ्ट के जरिए मूवमेंट करते हैं। अगर आपके पास 3-सिलेंडर वाली कार है, तो तीन सिलेंडर इंजन को मूवमेंट देते हैं।
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diesel car engine maintenance - फोटो : Social

3-सिलेंडर और 4-सिलेंडर का कंपेरिजन

सिलेंडर की संख्या से इंजन की क्षमता पर असर पड़ता है। जहां 4-सिलेंडर क्रैंकशॉफ्ट के प्रत्येक 90 डिग्री के रोटेशन पर पावर जेनरेट करता है, तो वहीं 3-सिलेंडर इंजन के क्रैंकशॉफ्ट के प्रत्येक 120 डिग्री घूमने पर पावर जेनरेट करता है। दोनों ही इंजन की पावर जेनरेट करने की क्षमता, टाइमिंग और टेक्निक उसकी परफॉरमेंस और ईंधन क्षमता को निर्धारित करती है।

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Car turbo engine

3-सिलेंडर इंजन के फायदे       

  • 3-सिलेंडर वाला इंजन 4-सिलेंडर के मुकाबले कम ईंधन खर्च करता है, जिससे गाड़ी ज्यादा माइलेज देती है। छोटी कारों में आजकल 3-सिलेंडर का इंजन आ रहा है, जो उसे ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट बनाते हैं।
  • इससे इंजन की लागत भी कम होती है। कम सिलेंडर यानी कम लागत। यही वजह है कि 3-सिलेंडर इंजन कार निर्माताओं की पसंद बन रहे हैं।
  • जब इंजन छोटा होगा तो इंटीरियर में ज्यादा स्पेस मिलेगा। जिससे ज्यादा लेगरूम मिलेगा।
  • कम संख्या में सिलेंडर होने से मेटल से मेटल के बीच कम घर्षण होगा, जिससे ईंधन काम मात्रा में खर्च होगा और जिससे स्मूथ मूवमेंट मिलेगा।
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car engine

3-सिलेंडर इंजन के नुकसान     

  • कम संख्या में सिलेंडर होने से इंजन का रेस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है, हालांकि ये अंतर बेहद मामूली होता है, लेकिन जो लोग 4-सिलेंडर वाले कार चलाते हैं, उन्हें ये महसूस हो सकता है।
  • अभी 3-सिलेंडर वाले इंजन में थोड़ा और काम करने की जरूरत है। 4-सिलेंडर वाले इंजन के मुकाबले 3-सिलंडर इंजन ज्यादा शोरगुल करते हैं।
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Renault Triber Engine - फोटो : carwale

4-सिलेंडर इंजन के फायदे       

  • चार सिलेंडर वाला इंजन ज्यादा पावर देता है और इससे ज्यादा आरपीएम मिलते हैं।
  • 4-सिलेंडर वाला इंजन ज्यादा रेस्पॉन्सिव होता है और ज्यादा चिंगारी पैदा करता है।
  • ज्यादा सिलेंडर होने से इंजन की क्षमता बढ़ती है और इंजन बिना किसी दिक्कत के बेहतर ढंग से काम करता है।
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WagonR Engine

4-सिलेंडर इंजन के नुकसान

  • 3-सिलंडर इंजन के मुकाबले 4-सिलेंडर इंजन ज्यादा महंगे होते हैं, जिससे गाड़ी की लागत बढ़ती है।
  • ज्यादा सिलेंडर होने का नुकसान यह है कि ईंधन का खर्च बढ़ता है, वहीं इंजन भारी होने से कम माइलेज निलता है। वहीं ज्यादा घर्षण जेब पर भी असर डालता है।
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Mahindra Alturas G4 SUV Engine

3-सिलेंडर और 4-सिलेंडर में कौन है बेहतर

अगर दोनों इंजन की तुलना करें, तो दोनों ही इंजन को अलग-अलग ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया है। अगर किसी को पावर के साथ परफॉरमेंस चाहिए, तो वह चार सिलेंडर वाले इंजन को चुन सकता है। वहीं पहली बार अगर कार खरीद रहे हैं, साथ ही माइलेज के साथ कीमत भी मायने रखती है, तो 3-सिलेंडर वाले इंजन को प्रमुखता दे सकते हैं।            
 
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