आज जिसे हम इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की सबसे अहम तकनीक मानते हैं, वह रिजेनेरेटिव ब्रेकिंग दरअसल कोई नई खोज नहीं है। इसकी मूल अवधारणा सौ साल से भी ज्यादा पुरानी है, जब इलेक्ट्रिक मोटरों पर शुरुआती प्रयोग किए जा रहे थे। उस दौर के इंजीनियरों ने पाया कि इलेक्ट्रिक मोटर सिर्फ वाहन को चलाती ही नहीं, बल्कि कुछ हालात में बिजली भी पैदा कर सकती है।
शुरुआती इंजीनियरों ने क्या खास बात देखी थी?
19वीं सदी के अंत में, जब इलेक्ट्रिक मोटरों का इस्तेमाल शुरू हुआ, तब एक दिलचस्प व्यवहार सामने आया।
- जब मोटर को बिजली दी जाती है, तो वह पहियों को घुमाकर वाहन चलाती है
- लेकिन जब पहिए खुद मोटर को घुमाते हैं, तो वही मोटर जनरेटर की तरह काम करने लगती है
- इस प्रक्रिया में मोटर वाहन की गति को धीमा भी करती है
हालांकि उस समय इस्तेमाल होने वाली लेड-एसिड बैटरियां भारी थीं, जल्दी चार्ज नहीं होती थीं और उनकी क्षमता बेहद सीमित थी। इस वजह से पैदा हुई बिजली को उपयोगी रूप में सहेजना संभव नहीं था।
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