Vehicle Scrapping
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स्क्रैपिंग नीति लागू करने के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
परिवहन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल खटारा गाड़ियों को हटाना नहीं है, बल्कि एक व्यापक बदलाव लाना है:
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सुरक्षित और आधुनिक परिवहन:
इस नीति का मुख्य लक्ष्य राज्य में एक सुरक्षित, साफ और आधुनिक परिवहन सिस्टम तैयार करना है।
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पर्यावरण और सड़क सुरक्षा:
इससे सड़क दुर्घटनाओं, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जबकि वाहनों की ईंधन दक्षता बढ़ेगी।
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औद्योगिक और आर्थिक लाभ:
स्क्रैप धातु और अन्य सामग्रियों का वैज्ञानिक रिसाइकिलिंग संभव होगा, जिससे नया निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
किसी गाड़ी को 'अनफिट' और 'स्क्रैप' करने का तकनीकी पैमाना क्या है?
इस नीति के तहत केवल उन्हीं वाहनों को बाहर किया जा रहा है जो निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते:
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कंप्यूटरीकृत ऑटोमेटेड टेस्ट:
वाहनों का फिटनेस टेस्ट आधुनिक 'ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों' (ATS) में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत मशीनों द्वारा किया जाता है।
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अनफिट और एंड ऑफ लाइफ व्हीकल (ELV) घोषणा:
यदि कोई वाहन मानकों में विफल रहता है, तो उसे पहले 'अनफिट' घोषित किया जाता है। री-टेस्ट (पुनः परीक्षण) में भी फेल होने पर उसे 'एंड ऑफ लाइफ व्हीकल' (ELV) घोषित कर स्क्रैपिंग प्रक्रिया में शामिल कर दिया जाता है।