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Nitin Gadkari: नितिन गडकरी ने कहा- भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया की नंबर-1 बनाने का लक्ष्य

Thu, 31 Jul 2025 12:42 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार का मिशन है कि भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (वाहन उद्योग) को दुनिया की नंबर एक इंडस्ट्री बनाया जाए।
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Nitin Gadkari - फोटो : PTI/Amar Ujala
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार का मिशन है कि भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (वाहन उद्योग) को दुनिया की नंबर एक इंडस्ट्री बनाया जाए। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र ने अब तक देश में करीब 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है, जो किसी भी अन्य सेक्टर से सबसे ज्यादा है। गडकरी का कहना है कि ऑटो इंडस्ट्री का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।

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Automobile Industry - फोटो : PTI
₹22 लाख करोड़ की हो चुकी है इंडस्ट्री, पहले थी ₹7.5 लाख करोड़
गडकरी ने जानकारी दी कि इस समय भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का आकार 22 लाख करोड़ रुपये है। 2014 में जब उन्होंने मंत्रालय संभाला था, तब यह इंडस्ट्री केवल 7.5 लाख करोड़ रुपये की थी। सरकार का उद्देश्य इसे और तेजी से बढ़ाकर दुनिया में नंबर वन बनाना है। फिलहाल अमेरिका की ऑटो इंडस्ट्री 78 लाख करोड़ रुपये और चीन की 47 लाख करोड़ रुपये की है।

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Car Plant - फोटो : Freepik
GST में सबसे बड़ा योगदान और रोजगार का बड़ा जरिया
गडकरी ने यह भी बताया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर सरकार को जीएसटी के रूप में सबसे ज्यादा राजस्व देता है। यह इंडस्ट्री न केवल मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से शीर्ष पर है, बल्कि सरकार के लिए आमदनी का एक मजबूत जरिया और रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र भी है।

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Car Plant - फोटो : Volkswagen
प्रदूषण की चुनौती और ग्रीन फ्यूल की अपील
हालांकि, गडकरी ने यह भी चेताया कि भारत में कुल प्रदूषण का 40 प्रतिशत हिस्सा ट्रांसपोर्ट सेक्टर से आता है, जो आर्थिक रूप से भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने ऑटो इंडस्ट्री से आग्रह किया कि वे हरित और वैकल्पिक ईंधन विकसित करें जिससे प्रदूषण को कम किया जा सके। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। और इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। 

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Honda CB1000 Hornet SP - फोटो : HMSI

टू-व्हीलर्स में ABS अब जरूरी
गडकरी ने कहा कि अब दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) को अनिवार्य किया गया है। सड़क हादसों में दोपहिया वाहनों से जुड़ी मौतों का आंकड़ा करीब 45 प्रतिशत है। यानी जितने भी हादसे होते हैं, उनमें लगभग आधे मामलों में जान गंवाने वाले लोग बाइक या स्कूटर से होते हैं। ऐसे में ABS जैसी टेक्नोलॉजी को जरूरी बनाना एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सड़क सुरक्षा के लिए चार जरूरी पहलू
सरकार का मानना है कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चार चीजें सबसे अहम हैं -

  1. ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, यानी गाड़ियों की तकनीकी सुरक्षा।
  2. रोड इंजीनियरिंग, यानी सड़कें इस तरह बनें कि हादसे कम हों।
  3. कानून का सख्त पालन कराना, यानी ट्रैफिक नियमों की सही तरीके से निगरानी।
  4. लोगों को जागरूक बनाना, ताकि वे नियमों को जानें और उनका पालन करें।


ये चारों पहलू अगर मिलकर काम करें, तो हादसों की संख्या में काफी कमी लाई जा सकती है।

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Highway - फोटो : Adobe Stock
ब्लैक स्पॉट्स पर खर्च हो रहे हैं 40,000 करोड़ रुपये
सरकार ने देशभर में सड़क हादसों के ब्लैक स्पॉट्स (यानि जहां बार-बार हादसे होते हैं) को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। इन खतरनाक जगहों को सुधारने और वहां हादसे रोकने के लिए सरकार 40,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। यह एक बड़ा कदम है ताकि पहले से ही सावधानी बरती जा सके और जानें बचाई जा सकें।

IIT छात्रों को जोड़ा गया सड़क सुरक्षा ऑडिट में
इस मुहिम में तकनीकी सहयोग के लिए IIT जैसे प्रमुख संस्थानों के छात्रों को भी जोड़ा गया है। उनकी मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिन जगहों पर सबसे ज़्यादा जानलेवा हादसे हो रहे हैं, वहां वैज्ञानिक तरीके से ऑडिट हो और सुधार किया जा सके।

15 राज्यों में 77 हाई-फेटालिटी कॉरिडोर चिन्हित
अब तक 15 राज्यों में 77 ऐसे हिस्सों की पहचान की गई है जो नेशनल हाइवे पर हैं और जहां मौतों की संख्या बहुत ज्यादा होती है। इन सड़कों पर अब 'जीरो फेटालिटी कॉरिडोर' योजना के तहत काम किया जा रहा है ताकि इन जगहों पर एक भी मौत न हो। 

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