फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Russia Fuel Crisis: रूस में पेट्रोल-डीजल की किल्लत से मचा हाहाकार, चीनी ईवी कारों को खरीदने के लिए उमड़ी भीड़

Fri, 03 Jul 2026 10:53 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रूस में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर चीन की कंपनियों की इलेक्ट्रिक कारों की ओर ग्राहकों का रुझान बढ़ा है। मॉस्को के एक कार डीलरशिप का कहना है कि ईंधन संकट के चलते अब वह बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
विज्ञापन
1 of 5
Electric Vehicles - फोटो : Freepik

रूस इस समय एक अभूतपूर्व ईंधन संकट से जूझ रहा है, जिसके कारण देश के एक बड़े हिस्से में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं और कीमतें आसमान छू रही हैं। इस संकट से बचने के लिए अब रूसी वाहन चालक तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का रुख कर रहे हैं। आलम यह है कि मॉस्को के कार डीलर्स के लिए चीन से आने वाली नई इलेक्ट्रिक गाड़ियों की भारी मांग को पूरा करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
 

रूस में अचानक क्यों पैदा हुआ यह बड़ा ईंधन संकट?

रूस में पेट्रोल और डीजल की इस भारी किल्लत के पीछे एक बड़ी वजह है:

  • ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले: रूसी ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर यूक्रेनी हमलों में तेजी आई है। इन हमलों ने पिछले कुछ हफ्तों में गैसोलीन और डीजल की सप्लाई को पूरी तरह से निचोड़ दिया है। जिसके कारण रूस के अधिकांश क्षेत्रों में ईंधन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की नौबत आ गई है।

  • यूरोप में सबसे महंगा पेट्रोल: मीडिया रिपोर्ट की गणना के अनुसार, कुछ इलाकों में पेट्रोल की खुदरा कीमतें बढ़ते-बढ़ते पूरे यूरोप में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक पर पहुंच गई हैं।

विज्ञापन

2 of 5
Electric Car Charging - फोटो : Adobe Stock

ईवी मार्केट की सुस्त रफ्तार अचानक कैसे बदल गई?

रूस का भूगोल और मौसम हमेशा से इलेक्ट्रिक गाड़ियों के अनुकूल नहीं रहा है, लेकिन मौजूदा संकट ने सब कुछ बदल दिया है:

  • चुनौतियों पर भारी पड़ी किल्लत: रूस की विशाल दूरी, बेहद कड़ा और ठंडा मौसम और चार्जिंग नेटवर्क का सीमित होना। ऐसी वजहें थीं जिन्होंने हमेशा यहां के ईवी बाजार की रफ्तार को रोक कर रखा। लेकिन ईंधन की बढ़ती किल्लत अब ड्राइवरों को मजबूरन ईवी की तरफ मोड़ रही है।

  • महीने भर की बिक्री अब दिनों में: चीनी ब्रांड्स की कारों के विशेषज्ञ और 'EN Cars' के संस्थापक येवगेनी जाबेलिन ने बताया कि कुछ हफ्ते पहले तक वे महीने में केवल दो से तीन ईवी बेच पाते थे। लेकिन अब वे हर दिन दो से तीन इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेच रहे हैं। उनके अनुसार, जब से ईंधन की स्थिति जटिल हुई है, बजट और प्रीमियम दोनों मॉडलों की मांग कई गुना बढ़ गई है।


इस संकट का सबसे बड़ा फायदा किस देश को मिल रहा है?

इस अचानक आई तेजी का सीधा फायदा चीन के ऑटोमोबाइल बाजार को मिल रहा है:

  • तैयार नहीं था रूसी बाजार: एनालिटिकल एजेंसी 'ऑटोस्टैट' (Autostat) के कार्यकारी निदेशक सर्गेई उदालोव के अनुसार, मैन्युफैक्चरर्स और इंपोर्टर्स इस गैसोलीन संकट के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। उनके पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है, जिसके कारण ईवी और प्लग-इन हाइब्रिड की बिक्री बढ़ तो रही है, लेकिन संख्या अभी भी कम है।

  • चीन बनेगा मुख्य लाभार्थी: सर्गेई उदालोव का मानना है कि अगर यह संकट आगे भी जारी रहता है, तो नजदीकी भविष्य में बिक्री में भारी उछाल आएगा और इसका सबसे बड़ा फायदा चीन को ही मिलेगा।

विज्ञापन

3 of 5
Electric Car - फोटो : Freepik

रूस के ऑटो बाजार में चीनी कारों का कैसा है दबदबा?

शोरूमों में खरीदार चीनी वाहन निर्माता कंपनी 'गीली' (Geely) की इलेक्ट्रिक एसयूवी की बारीकी से जांच करते नजर आ रहे हैं। इस साल के आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:

  • कीमतों में भारी उछाल: जनवरी और मई के बीच ईंधन की कीमतें साल-दर-साल 12 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी थीं, जिससे ईवी की मांग पहले से ही बढ़ रही थी।

  • टॉप पर चीनी ब्रांड्स: ऑटोस्टैट के अनुसार, रूस में सबसे ज्यादा बिकने वाले ईवी और हाइब्रिड ब्रांड्स में चीन की कंपनियां गीली (Geely), डोंगफेंग (Dongfeng), जीएसी (GAC) और चेरी (Chery) शामिल हैं। वहीं रूस में बनने वाला टॉप ईवी मॉडल 'इवोल्यूट' (Evolute) है, जिसे डोंगफेंग द्वारा सप्लाई की जाने वाली असेंबली किट से तैयार किया जाता है।

  • बिक्री के आंकड़े: साल के पहले पांच महीनों में लगभग 24,600 नई प्लग-इन हाइब्रिड कारें बिकीं, जो साल-दर-साल 125 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। वहीं पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 19 प्रतिशत बढ़कर 4,460 यूनिट्स तक पहुंच गई।

 

4 of 5
Electric Car - फोटो : Freepik

जून के महीने में कितनी तेज हुई ईवी की रफ्तार?

जून में ईंधन की कमी का असर गहराने के साथ ही गाड़ियों की बिक्री और तेज हो गई:

  • रजिस्ट्रेशन में उछाल: ऑटोस्टैट के प्रमुख सर्गेई त्सिलिकोव के अनुसार, जून के एक हफ्ते में 1,754 नई प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। यह पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग एक-तिहाई अधिक और इस वर्ष की औसत साप्ताहिक गति से लगभग 50 प्रतिशत ज्यादा था।

  • बढ़ रहे हैं चार्जिंग स्टेशंस: डिजिटल मैप सर्विस '2GIS' के अनुसार, जुलाई 2026 तक के एक साल में रूस के भीतर चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Electric Car - फोटो : Freepik

क्या आम जनता के लिए चार्जिंग अभी भी एक बड़ी समस्या है?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शोरूम में मौजूद 'वासिली' नाम के एक ग्राहक ने हंसते हुए बताया कि वह खुश हैं कि उन्होंने पहले ही एक हाइब्रिड और एक ईवी खरीद ली थी। जिससे उन्हें मौजूदा स्थिति में कोई समस्या नहीं हो रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया:

"मैं ग्रामीण इलाके में एक निजी घर में रहता हूं। मैंने अपनी खुद की चार्जिंग स्टेशन लगाई है और घर पर ही चार्ज करता हूं। लेकिन मॉस्को शहर में ठीक से गाड़ी चार्ज करना अभी भी एक असली और बड़ी समस्या है।"

आपको बता दें कि ऑटोस्टैट के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल रूस की कुल कार बिक्री में ईवी और प्लग-इन हाइब्रिड की हिस्सेदारी महज 4.3 प्रतिशत थी।

 

पेट्रोल-डीजल से बचने के लिए रूसी नागरिक और क्या रास्ता अपना रहे हैं?

इलेक्ट्रिक कारों को खरीदने के अलावा रूसी नागरिक एक और अनोखा विकल्प अपना रहे हैं:

  • एलएनजी (LNG) का इस्तेमाल: रूसी लोग गैसोलीन और डीजल से बचने के लिए अपनी कारों में विशेष उपकरण फिट करवा रहे हैं। ताकि वे आसानी से उपलब्ध और सस्ते लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर शिफ्ट हो सकें।

  • 35% का बड़ा उछाल: समाचार पत्र 'इज्वेस्टिया' (Izvestia) ने राष्ट्रीय गैस ईंधन संघ के हवाले से बताया कि पिछले साल मार्च-अप्रैल की तुलना में इस तरह के उपकरणों का उपयोग करने के मामलों में 35 प्रतिशत का भारी उछाल आया है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें