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ICRA: वित्त वर्ष 27 में 4-6% बढ़ सकती है पैसेंजर वाहनों की बिक्री, एसयूवी और ईवी की मांग बनेगी बढ़ोतरी का आधार

Fri, 19 Jun 2026 09:42 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में 4-6 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसकी वजह लगातार बनी हुई मांग, जीएसटी दरों में कटौती के बाद गाड़ियों का सस्ता होना और यूटिलिटी गाड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता है।
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Auto Sales - फोटो : Adobe Stock

भारतीय पैसेंजर वाहन उद्योग के लिए चालू वित्त वर्ष सकारात्मक रहने की संभावना जताई गई है। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में पैसेंजर वाहन बिक्री में 4 से 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत मांग, बेहतर वहनीयता और यूटिलिटी वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता इस बढ़ोतरी को रफ्तार दे सकते हैं।

हालांकि, ईंधन और कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी और कमजोर मानसून की आशंकाओं को ऐसे कारक माना गया है, जिन पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

FY26 में पैसेंजर वाहन बाजार का प्रदर्शन कैसा रहा?

ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में पैसेंजर वाहन उद्योग ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया।

प्रमुख आंकड़े:

  • पैसेंजर वाहन थोक बिक्री में 27 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

  • कुल थोक बिक्री बढ़कर 4.4 लाख यूनिट तक पहुंच गई।

  • खुदरा बिक्री में 33 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली।

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Car Sales - फोटो : Freepik

बिक्री में बढ़ोतरी के पीछे कौन-कौन से कारण रहे?

रिपोर्ट के अनुसार, कई सकारात्मक कारकों ने बाजार को मजबूती दी।

मुख्य कारण:

  • उपभोक्ताओं की मजबूत मांग

  • नए मॉडलों की लॉन्चिंग

  • गर्मियों के दौरान विवाह सीजन का लंबा चलना

इन कारणों ने वाहन खरीदारी को बढ़ावा दिया और खुदरा बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

FY27 में ग्रोथ को कौन-से कारक समर्थन देंगे?

ICRA का मानना है कि इस वित्त वर्ष में भी बाजार की मांग बनी रह सकती है।

इस वृद्धि के क्या हैं संभावित कारण:

  • उपभोक्ता मांग का निरंतर बना रहना

  • जीएसटी दरों में कटौती के बाद बेहतर वहनीयता

  • यूटिलिटी वाहनों की मजबूत मांग

इन कारकों से पैसेंजर वाहन उद्योग को आगे भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

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Skoda Kodiaq - फोटो : Skoda

क्या यूटिलिटी वाहनों का दबदबा जारी है?

रिपोर्ट के अनुसार, यूटिलिटी व्हीकल (Utility Vehicle) सेगमेंट ने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है।

FY2026 में:

  • कुल पैसेंजर वाहन बिक्री में यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 68 प्रतिशत रही।

यह दर्शाता है कि ग्राहकों का रुझान इस श्रेणी की ओर लगातार बढ़ रहा है।

क्या छोटी और कॉम्पैक्ट कारों की मांग भी सुधरी है?

हां। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिनी और कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट में भी मांग में सुधार देखने को मिला।

इसके पीछे प्रमुख कारण:

  • पिछले वर्ष सितंबर में जीएसटी दरों में की गई कटौती

  • बेहतर वहनीयता

इन बदलावों ने छोटे और कॉम्पैक्ट वाहन वर्ग में ग्राहकों की रुचि बढ़ाने में मदद की।

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Tata Tiago Facelift - फोटो : Tata Motors

निर्यात बाजार में भारतीय वाहन निर्माताओं का प्रदर्शन कैसा रहा?

भारतीय वाहन निर्माताओं की वैश्विक बाजारों में मौजूदगी भी मजबूत होती दिखाई दी।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • इस वर्ष मई महीने में वाहन निर्यात में 13 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

यह संकेत देता है कि भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।

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EV Charging - फोटो : Adobe Stock

इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी?

रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।

मुख्य बिंदु:

  • पैसेंजर वाहन सेगमेंट में ईवी अपनाने की रफ्तार तेज हुई है।

  • FY27 की शुरुआती अवधि में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 6 प्रतिशत तक पहुंच गई।

यह दर्शाता है कि ग्राहकों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।

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Auto Sales - फोटो : Adobe Stock

किन चुनौतियों पर नजर रखने की जरूरत होगी?

हालांकि बाजार के लिए दृष्टिकोण सकारात्मक बताया गया है, लेकिन कुछ जोखिम भी मौजूद हैं।

रिपोर्ट में जिन प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख किया गया है:

  • ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी

  • कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव

  • कमजोर मानसून की आशंका

ये कारक आने वाले महीनों में वाहन मांग और उपभोक्ता खर्च को प्रभावित कर सकते हैं।

उद्योग के लिए आगे का संकेत क्या है?

ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत मांग, यूटिलिटी वाहनों की लोकप्रियता, मिनी और कॉम्पैक्ट कारों में सुधरती मांग, बढ़ते निर्यात और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी के चलते FY27 में भारतीय पैसेंजर वाहन उद्योग के आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, ईंधन कीमतों और मौसम से जुड़े जोखिमों पर उद्योग की नजर बनी रहेगी।
 

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