फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

FASTag Scam Alert 2026: फास्टैग यूजर नकली वेबसाइट और फर्जी QR कोड से कैसे बचें, NHAI ने जारी की चेतावनी

Sat, 14 Feb 2026 02:27 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूरे भारत में FASTag यूजर्स को नकली वेबसाइट और फ्रॉड QR कोड से जुड़े साइबर फ्रॉड की एक नई लहर का सामना करना पड़ रहा है। आप भी न हो जाएं किसी धोखाधड़ी का शिकार इसलिए इन जरूरी टिप्स को अपनाएं।
विज्ञापन
1 of 7
Fastag Annual Pass - फोटो : X

देशभर में FASTag (फास्टैग) इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों को इन दिनों फर्जी वेबसाइटों और नकली QR (क्यूआर) कोड के जरिये साइबर ठगी का सामना करना पड़ रहा है। डिजिटल टोल भुगतान के बढ़ते चलन का फायदा उठाकर ठग फास्टैग यूजर्स से बैंक और पर्सनल डिटेल्स चुरा रहे हैं। इसे देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने वाहन चालकों को सतर्क रहने और केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। 

विज्ञापन

2 of 7
Toll Plaza - फोटो : PTI

असली घटना ने खतरे की गंभीरता कैसे दिखाई?
कल्पना कीजिए, आप हाईवे पर ड्राइव कर रहे हैं और अचानक आपके मोबाइल पर एक मैसेज आता है कि आपका फास्टैग बैलेंस कम है या जल्द ब्लॉक होने वाला है। मैसेज में तुरंत रिचार्ज करने के लिए QR कोड स्कैन करने या लिंक खोलने को कहा जाता है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में दिल्ली के एक सेल्स प्रोफेशनल के साथ ऐसा ही हुआ। टोल प्लाजा के पास लगे QR कोड को उन्होंने आधिकारिक समझकर स्कैन किया। कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते से 5,000 रुपये निकल गए। ऐसे मामले अब देश के कई हिस्सों से सामने आ रहे हैं। 

विज्ञापन

3 of 7
Fastag - फोटो : Adobe Stock

FASTag स्कैम काम कैसे करता है?
साइबर अपराधी कई तरीकों से लोगों को फंसाते हैं। वे फर्जी एसएमएस या व्हाट्सएप मैसेज भेजते हैं, जो फास्टैग नोटिफिकेशन जैसे दिखते हैं। इनमें कम बैलेंस, KYC (केवाईसी) अपडेट या सस्ते वार्षिक फास्टैग पास जैसे लालच दिए जाते हैं। 

लिंक पर क्लिक करने या QR कोड स्कैन करने पर यूज़र को नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जो दिखने में बिल्कुल असली पोर्टल जैसी होती है। वहां FASTag ID, वाहन नंबर, मोबाइल नंबर और OTP जैसी जानकारियां मांगी जाती हैं। जैसे ही यूज़र ये डिटेल्स डालता है, ठग उसके खाते से पैसे निकाल लेते हैं। 

4 of 7
fastag toll pass - फोटो : Adobe Stock

टोल प्लाजा पर भी कैसे हो रही है ठगी?
कुछ मामलों में अपराधी टोल प्लाजा के साइनबोर्ड पर फर्जी QR कोड के स्टिकर चिपका देते हैं। ड्राइवर इन्हें असली समझकर स्कैन कर लेते हैं और अनजाने में अपनी निजी और वित्तीय जानकारी खतरे में डाल देते हैं।

FASTag फ्रॉड के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
2025 के आखिर से फास्टैग से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में तेजी देखी गई है। डिजिटल टोल सिस्टम ने जहां सुविधा बढ़ाई है, वहीं ठगों के लिए नए मौके भी पैदा किए हैं। ऐसे मामलों में न सिर्फ पैसे का नुकसान होता है, बल्कि पहचान की चोरी और फास्टैग अकाउंट के दुरुपयोग का खतरा भी रहता है। 

विज्ञापन

5 of 7
fastag toll pass - फोटो : Adobe Stock

फर्जी FASTag वेबसाइट की पहचान कैसे करें? 
धोखाधड़ी से बचने का सबसे आसान तरीका है वेबसाइट का पता (URL) ध्यान से जांचना। फास्टैग से जुड़ी सेवाएं सिर्फ अधिकृत सरकारी पोर्टल या रजिस्टर्ड बैंक ऐप्स पर ही उपलब्ध होती हैं।
नकली वेबसाइट अक्सर नाम में थोड़ा बदलाव, अजीब डोमेन या अतिरिक्त शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। याद रखें, कोई भी आधिकारिक एजेंसी ओटीपी, पिन या पासवर्ड कभी मैसेज या कॉल पर नहीं मांगती। 
FASTag फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी सावधानियां क्या हैं?

  • फास्टैग रिचार्ज हमेशा आधिकारिक बैंक ऐप, सरकारी पोर्टल या भरोसेमंद ऐप से ही करें।

  • OTP, PIN या बैंक डिटेल्स किसी से साझा न करें।

  • सार्वजनिक जगहों या अनजान मैसेज से मिले QR कोड स्कैन करने से बचें।

  • किसी भी मैसेज या लिंक पर कार्रवाई से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें।

  • बैंक और फास्टैग ट्रांजैक्शन के लिए SMS/ईमेल अलर्ट चालू रखें।

 

विज्ञापन

6 of 7
टोल प्लाजा - फोटो : संवाद

ठगी का शक हो तो तुरंत क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आप ठगी का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क कर फास्टैग वॉलेट या अकाउंट ब्लॉक करवाएं। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और स्थानीय पुलिस को सूचना दें। 

मदद के लिए फास्टैग हेल्पलाइन नंबर 1033 पर भी संपर्क किया जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
fastag toll pass - फोटो : Adobe Stock
डिजिटल दौर में सतर्क रहना क्यों जरूरी है?
फास्टैग स्कैम यह याद दिलाता है कि डिजिटल भुगतान जितने सुविधाजनक हैं, उतने ही जोखिम भी रखते हैं। किसी भी QR कोड को स्कैन करने या रिचार्ज लिंक पर क्लिक करने से पहले एक पल रुककर जांच करना आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकता है।

थोड़ी-सी सतर्कता आपके पैसे और आपकी पहचान, दोनों को सुरक्षित रख सकती है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें