Car Insurance Terms: कार खरीदना जितना रोमांचक होता है, उसके इंश्योरेंस के तकनीकी दस्तावेजों को समझना उतना ही चुनौतीपूर्ण। अक्सर ग्राहक केवल सबसे सस्ता प्रीमियम देखकर पॉलिसी चुन लेते हैं, लेकिन क्लेम के समय उन्हें अनिवार्य कटौती या कवरेज लिमिट जैसे झटके लगते हैं। ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, बीमा के इन 5 बुनियादी स्तंभों को समझना हर कार मालिक के लिए जरूरी है...
भारत में कार इंश्योरेंस लेना कानूनी मजबूरी ही नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा है। हालांकि, पॉलिसी के कठिन शब्द अक्सर ग्राहकों को भ्रमित करते हैं। प्रीमियम कम करने और सही क्लेम पाने के लिए डिडक्टिबल से लेकर कॉम्प्रिहेंसिव कवरेज जैसे शब्दों की सही जानकारी होना अनिवार्य है।
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1. डिडक्टिबल (Deductible): आपकी जेब से जाने वाला हिस्सा
सरल शब्दों में समझें तो क्लेम के समय रिपेयर बिल का वह हिस्सा जो बीमा कंपनी नहीं, बल्कि आपको खुद देना होता है। भारत में आईआरडीएआई के नियम के अनुसार, 1500 cc तक की कारों पर एक हजार रुपये और उससे ऊपर की कारों पर दो हजार रुपये का अनिवार्य डिडक्टिबल होता है। अगर आप अपनी मर्जी से वॉलंटरी डिडक्टिबल बढ़ाते हैं, तो आपका सालाना प्रीमियम काफी कम हो जाता है।
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2. प्रीमियम (Premium): सुरक्षा की सालाना फीस
यह वह निश्चित राशि है जो आप अपनी पॉलिसी को सक्रिय रखने के लिए भुगतान करते हैं। प्रीमियम की गणना आपकी कार की उम्र, उसके मॉडल, आपके शहर और ड्राइविंग हिस्ट्री (रिस्क प्रोफाइल) के आधार पर की जाती है। इसी वजह से ये दो समान कारों का प्रीमियम अलग-अलग हो सकता है।
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3. लायबिलिटी कवरेज (Liability Coverage): कानूनन जरूरी
भारत में थर्ड-पार्टी लायबिलिटी कवर अनिवार्य है। अगर आपकी कार से किसी तीसरे व्यक्ति को चोट पहुंचती है या उसकी संपत्ति को नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी उसका मुआवजा भरती है। याद रखें, इसमें आपकी अपनी कार के नुकसान की भरपाई नहीं होती। ये बस सामने वाले के लिए है।
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4. कॉम्प्रिहेंसिव कवरेज (Comprehensive Coverage): ऑल-राउंड प्रोटेक्शन
यह वन-स्टॉप सॉल्यूशन है। इसमें थर्ड-पार्टी लायबिलिटी के साथ-साथ आपकी कार को होने वाले नुकसान जैसे चोरी, आग, प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूकंप) और दंगे जैसी चीजें कवर होती हैं। नई या महंगी कारों के लिए ये सबसे सुरक्षित विकल्प है।
5. कॉलिजन कवरेज (Collision Coverage): दुर्घटना में काम आने वाला कवच
ये खासकर दुर्घटना में आपकी कार को हुए नुकसान की मरम्मत का खर्च उठाता है, चाहे गलती किसी की भी हो। भारत में ये आमतौर पर कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के साथ ही मिलता है। महंगी गाड़ियों के मालिकों के लिए ये अनिवार्य माना जाता है क्योंकि इनके स्पेयर पार्ट्स और लेबर कॉस्ट काफी अधिक होते हैं।