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खरीदनी है टर्बो इंजन कार या पहले से कर रहे हैं इस्तेमाल, तो ये खबर है आपके लिए

Tue, 22 Sep 2020 11:59 AM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर आपके पास टर्बो इंजन वाली कार है तो यह आदत आपकी जेब में बड़ा छेद कर सकती है। आजकल की कारों में आ रहे टर्बोचार्जर की कीमत 70 हजार से 2.50 लाख रुपये तक हो सकती है...
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Turbo Engine Car Driving Tips - फोटो : AmarUjala (सांकेतिक)
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विस्तार
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आजकल बाजार में आ रही तकरीबन सभी गाड़ियां टर्बो चार्जर इंजन के साथ पेश हो रही हैं। इन दिनों लगभग सभी नई डीजल इंजन गाड़ियां टर्बो चार्जर के साथ आ रही हैं, वहीं मारुति और होंडा को छोड़ दें, तो बाकी सभी कंपनियां पेट्रोल गाड़ियों को नैचुरली एस्पिरेटेड के अलावा टर्बो चार्जर इंजन में भी पेश कर रही हैं। लेकिन सामान्य इंजन के मुकाबले टर्बो चार्ज्ड इंजन वाली कार को ड्राइव करने से पहले कुछ चीजों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है...

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टर्बोचार्जर की कीमत 70 हजार से 2.50 लाख रुपये तक

आमतौर पर ऐसा होता है कि आप कार स्टार्ट करते हैं और तुरंत ड्राइव करना शुरू कर देते हैं। लोग सोचते हैं कि गाड़ी थोड़ी देर के लिए खड़ी रहेगी तो बेवजह ईंधन खर्च होगा। लेकिन कुछ पैसे बचाने के चक्कर में आप लाखों रुपये का नुकसान कर रहे हैं। अगर आपके पास टर्बो इंजन वाली कार है तो यह आदत आपकी जेब में बड़ा छेद कर सकती है। आजकल की कारों में आ रहे टर्बोचार्जर की कीमत 70 हजार से 2.50 लाख रुपये तक हो सकती है।

ऐसे करता है काम

एक टर्बोचार्जर इंजन 1.5 लाख आरपीएम तक घूम सकता है, जबकि एक सामान्य पेट्रोल कार का इंजन 6-7 हजार आरपीएम तक ही घूम सकता है। वहीं ज्यादा आरपीएम का मतलब ज्यादा गर्म भी है, वहीं इसे कूलिंग भी वैसी ही चाहिए, ताकि चार्जर ठंडा भी रहे। कई कारों में इन-फिटेड टर्बो कूलर होता है, जो ऑयल के जरिए गर्म हवा को खत्म करता है। यानी कि ऑयल कूलिंग सिस्टम में कोई भी खऱाबी टर्बोचार्जर की परेशानी बढ़ा सकती है। वहीं अगर आप तेज रफ्तार से अपनी टर्बोचार्जर वाली पेट्रोल या डीजल कार को लेकर आएं और अचानक से इंजन बंद कर दें, तो क्या होगा। ऐसे में आपका टर्बोचार्जर घूमता रहेगा, लेकिन इंजन बंद होने से ऑयल सप्लाई नहीं होगी और टर्बोचार्जर हीट पैदा करता रहेगा।

इस नियम को अपनी आदत में करें शुमार 

ऐसा करने से टर्बोचार्जर की लाइफ कम हो सकती है और उससे निकली गर्मी गाड़ी के बाकी पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा सकती है। कई कार निर्माता कंपनियां अपने ग्राहकों को कहती हैं कि कार को स्टार्ट करने के दो मिनट तक इंजन को इसी स्थिति में रखें। इंजन को स्टार्ट करने के बाद दो मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। अगर आप तेज़ रफ़्तार पर कार चलाकर अपनी कार को अचानक से बंद कर देते हैं तो एग्जॉस्ट गैस चार्जर के अंदर फंसी रह जाती है, और धीरे-धीरे टर्बोचार्जर की लाइफ कम कर देती हैं। इसके लिए गाड़ी को बंद करने से पहले थोड़ी देर इंजन को चालू रखें या फिर अंतिम पड़ाव पर पहुंचने से कुछ किलोमीटर पहले तक गाड़ी का एयरकंडीशनर बंद करके लो आरपीएम पर चला सकते हैं। इसका फायदा यह होता है कि इंजन ऑयल कुछ देर तक आइडियल कंडीशन में ही रहता है।

मिलावटी ईंधन से बचें

मिलावटी ईंधन इस्तेमाल करने से आपका टर्बोचार्ज्ड इंजन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो सकता है। इसकी वजह है कि मिलावटी ईंधन पूरी तरह से जलता नहीं है जिससे टर्बोचार्जर की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। अगर आप एक टर्बोचार्ज्ड इंजन वाली गाड़ी चला रहे हैं, इस बात का हमेशा ख्याल रखें की आप ईंधन किसी अच्छे फ्यूल स्टेशन से भरवाएं।

इंजन ऑयल की मात्रा देखें

वहीं टर्बो इंजन के लिए जरूरी है इंजन ऑयल की सही मात्रा का ध्यान रखना। टर्बोचार्जर एग्जॉस्ट गैस से चलता है। टर्बोचार्जर की घूमने की वजह से गर्म एग्जास्ट गैसें यानी ज्यादा उष्मा निकलती है, जो एक ड्राइव के बाद इंजन को काफी गर्म कर देती हैं। टर्बोचार्जर के तेज़ तापमान से काफी सारा इंजन ऑयल जल जाता है। इसलिए समय-समय पर इंजन ऑयल के लेवल का ध्यान रखें।
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कभी भी अचानक से न बढ़ाएं रफ्तार

आजकल कारों में आ रहा टर्बो सिस्टम छोटे इंजन के साथ आ रहे हैं। इसलिए टर्बो की भी अपनी लिमिट है। अगर आप क्रूजिंग कर रहे हैं, तो अचानक एक्सेलरेटर का इस्तेमाल न करें। इसके लिए टर्बो लैग को समझने की ज़रूरत है। टर्बोचार्ज्ड गाड़ियों का रिस्पांस थोड़ा लेट होता है क्योंकि टर्बो को काम करने में थोडा वक़्त लगता है। अगदर आप अचानक एक्सेलरेट करेंगे तो टर्बो ठीक से काम नहीं करेगा। अगर आपको टर्बो का इस्तेमाल करना है तो पहले गियर बदलें और हाई गियर से लोवर गियर में लेकर आए, उसके बाद धीरे-धीरे एक्सेलरेट करें।
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