आज के समय में बाजार में एक ही कार के कई मॉडल मौजूद हैं। कार के कई वैरिएंट की कीमतों में काफी फर्क होता है। ऐसे में कुछ लोगों की पसंद बेस वैरिएंट होते हैं तो कुछ टॉप वैरिएंट खरीदना पसंद करते हैं। आखिर क्यों कंपनियां बेस वैरिएंट बेचती हैं। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं।
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क्या होता है बेस वैरिएंट
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महिंद्रा स्कॉर्पियो एन
- फोटो : सोशल मीडिया
दुनियाभर में सभी कार कंपनियां अपनी कारों के कई मॉडल बाजार में उतारती हैं। इनमें कई वैरिएंट ऑफर किए जाते हैं। इन वैरिएंट्स में कुछ फीचर्स नहीं दिए जाते हैं इसलिए इनकी कीमत बाकी वैरिएंट्स के मुकाबले कम होती है।
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बेस वैरिएंट कंपनियों के लिए फायदे का सौदा
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हुंडई की कारें
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हर कार और एसयूवी के बेस वैरिएंट बाजार में उतारने का बड़ा फायदा कार निर्माताओं को भी होता है। आसानी से कंपनियां उन ग्राहकों को भी टॉर्गेट कर पाती हैं जो उस कार की कीमत ज्यादा होने के कारण नहीं खरीद पाते और दूसरी कंपनी की कार पर शिफ्ट हो जाते हैं।
दाम में कितना है फर्क
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मारुति ब्रेजा
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आमतौर पर किसी भी कार के बेस वैरिएंट और टॉप वैरिएंट के दाम में काफी फर्क होता है। उदाहरण के तौर पर हम मारुति की ब्रेजा और हुंडई की वेन्यू को लेते हैं। ब्रेजा में कुल चार वैरिएंट आते हैं जिनमें से बेस वैरिएंट एलएक्सआई है जिसकी एक्स शोरूम कीमत 7.99 लाख रुपये है जबकि इसका टॉप वैरिएंट जेडएक्सआई प्लस है जिसकी एक्स शोरूम कीमत 12.30 लाख रुपये है। वहीं हुंडई की वेन्यू में भी बेस वैरिएंट ई आता है जिसकी एक्स शोरूम कीमत 7.53 लाख रुपये है जबकि इसके टॉप वैरिएंट की एक्स शोरूम कीमत 12.52 लाख रुपये है। इस तरह से एक ही कार के बेस और टॉप वैरिएंट की कीमत में चार से पांच लाख रुपये या उससे ज्यादा का भी फर्क देखने को मिलता है।
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फीचर्स में अंतर
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हुंडई वेन्यू
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जब कोई भी कार निर्माता अपनी कार का बेस वैरिएंट बाजार में उतारती है तो उसमें कई फीचर हटा दिए जाते हैं जिनसे कंपनी को कार की कीमत कम रखने में मदद मिलती है। ऐसी कारों में एलईडी लाइट की जगह परंपरागत हैलोजन लाइट दी जाती हैं। इलेक्ट्रिक एडजेस्टेबल ओआरवीएम की जगह मैनुअल ऑप्शन दिया जाता है। अलॉय व्हील की जगह स्टील रिम दिए जाते हैं। पुश स्टार्ट बटन की जगह कार स्टार्ट करने के लिए चाबी होती है। इनके अलावा म्यूजिक सिस्टम, फ्रंट बंपर ग्रिल की फिनिशिंग, फॉग लैप्स, रियर पार्किंग कैमरा, हाइट एडजेस्टेबल ड्राइवर सीट जैसे फीचर्स में भी समझौता किया जाता है।
बेस वैरिएंट वाली कारों में सेफ्टी फीचर में भी फर्क होता है। जहां टॉप और मिड वैरिएंट में कंपनियां चार, छह एयरबैग देती हैं वहीं बेस वैरिएंट में सिर्फ दो एयरबैग ही दिए जाते हैं। इसके अलावा टायर प्रैशर मॉनिटरिंग सिस्टम, की लैस एंट्री, रियर वाइपर, डिफॉगर, डीआरएल जैसे फीचर्स भी ऑफर नहीं किए जाते।