Indian Oil Corporation Limited (IOCL), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) चेन्नई ने अगले कुछ वर्षों में तमिलनाडु में विभिन्न परियोजनाओं में 54,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। जिसमें 35,580 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर 9 एमएमटीपीए (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) जमीनी स्तर की रिफाइनरी भी शामिल है। आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक और राज्य प्रमुख (टीएन और पुडुचेरी) वी सी अशोकन ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
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यह नई रिफाइनरी, जो नागापट्टिनम में लगभग 1,300 एकड़ जमीन पर बनेगी, बीएस-VI इंजन वाले वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल और पॉलीप्रोपाइलीन का भी उत्पादन करेगी। उन्होंने कहा 1,398 करोड़ रुपये में अम्मुललाईवॉयल गांव में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड ल्यूब कॉम्प्लेक्स, आईओसीएल ने उत्पाद पाइपलाइन बिछाने (2,600 करोड़ रुपये), एलपीजी सहित गैस पाइपलाइन (2,225 करोड़ रुपये), सीजीडी परियोजनाएं (7,570 करोड़ रुपये) की योजना बनाई है। इसके साथ ही नए रिटेल आउटलेट खोलने और एक आधुनिकीकरण कार्यक्रम लॉन्च करने (2,500 करोड़ रुपये), कामराजार बंदरगाह पर एक कैप्टिव पीओएल/एलपीजी जेट्टी का निर्माण करने (921 करोड़ रुपये), वल्लूर में एक टर्मिनल स्थापित करने (724 करोड़ रुपये में) और आसनूर में एक नया टर्मिनल लगाने (466 करोड़ रुपये) की योजना है।
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अशोकन ने संवाददाताओं से कहा, "इंडियन ऑयल के लिए, तमिलनाडु एक महत्वपूर्ण बाजार है और हम बुनियादी ढांचे और उत्पाद पेशकश के साथ-साथ अपनी सर्विस को बेहतर बनाने के लिए राज्य में लगातार निवेश कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल तमिलनाडु में 6 एलएनजी वितरण स्टेशन लगाएगी। श्रीपेरंबदूर में एक स्टेशन पहले से ही पायलट स्टेज में है, जबकि अन्य स्टेशन पोन्नेरी, ओथकदाई, नमक्कल, कोयंबटूर और कोनेरिपल्ली में बनेंगे।
भारत के सबसे बड़े ईंधन रिफाइनर और रिटेलर ने संकरी टर्मिनल पर डीजल के साथ बायो-डीजल का मिश्रण शुरू कर दिया है और जल्द ही आसनूर से शुरू किया जाएगा, जिसके बाद कोयंबटूर में शुरू होगा। अशोकन ने कहा, "हम अन्य जगहों पर चरणबद्ध तरीके से शुरुआत करेंगे।" एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने के लिए व्यापक शोध किया जा रहा है, क्योंकि यह प्रदूषण मुक्त है। उन्होंने कहा, "लेकिन चुनौती यह है कि वाटर इलेक्ट्रोलिसिस से पैदा हुए ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य होनी चाहिए।"