भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष 24 में यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों दोनों सेगमेंट में मध्यम बढ़ोतरी दर्ज की है। नए वित्त वर्ष FY25 में एंट्री करते हुए, भारतीय ऑटो उद्योग आशावाद और चुनौतियों के बीच आगे बढ़ने के लिए तैयार है। ऐसा देश में ऑटोमोबाइल खुदरा उद्योग के शीर्ष राष्ट्रीय निकाय, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) को उम्मीद है।
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Automobile Sector Cars
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एक आधिकारिक बयान में, पिछले वित्त वर्ष में प्रत्येक सेगमेंट की खुदरा बिक्री संख्या का खुलासा करते हुए, फाडा ने कहा है कि नए उत्पाद लॉन्च, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के आसपास का उत्साह दीर्घकालिक के लिए एक उम्मीद भरा दृष्टिकोण स्थापित करता है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी (सीएमआईई) के शोध के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, यह कहा गया है कि निर्माता विविध उपभोक्ता मांगों को पूरा करने के लिए बेहतर सप्लाई चेन और नए मॉडलों की एक श्रृंखला के साथ तैयार हैं। इसके अलावा, आर्थिक विकास, अनुकूल सरकारी नीतियों और अनुमानित अच्छे मानसून से उपभोक्ता मांग को खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक रूप से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह क्षेत्र आम तौर पर एसयूवी और दोपहिया वाहनों की बिक्री में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
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Car sales India
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उपभोक्ता भावना के बारे में बोलते हुए, बयान में आगे कहा गया है कि बाजार की धारणा सतर्कतापूर्वक सकारात्मक है। ऑटो उद्योग बिक्री को बढ़ावा देने के लिए बेहतर ग्राहक जुड़ाव और फाइनेंस स्कीम पर बड़ा दांव लगा रहा है। हालांकि, चुनौतियां भी हैं। फाडा ने नोट किया है कि यात्री वाहन सेगमेंट में उच्च आधार और तीव्र प्रतिस्पर्धा जैसे कारक सेगमेंट में बढ़ोतरी के लिए चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। बयान में लिखा है, "इन बाधाओं को इनोवेशन और रणनीतिक बाजार जुड़ाव के साथ पार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। जिसका लक्ष्य सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास है। जैसे-जैसे वित्त वर्ष 25 सामने आ रहा है, भारतीय ऑटो उद्योग विकसित बाजार मांगों और आर्थिक परिस्थितियों के जरिए आगे बढ़ रहा है। जो स्थायी विकास और व्यापक पहुंच के लिए अपनी क्षमताओं का लाभ उठा रहा है।"
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Car sales India
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वाहन खुदरा बिक्री पर असर
सीएमआईई अध्ययन का हवाला देते हुए, फाडा के बयान में कहा गया है कि शहरी भारतीयों के बीच उपभोक्ता भावना में उल्लेखनीय गिरावट के साथ, देश के वाहन क्षेत्र को निकट भविष्य में एक महीन चुनौती का सामना करना पड़ेगा। यह मंदी शहरी उपभोक्ताओं के खर्च में कमी के कारण है। यह माना जाता है कि ऑटो उद्योग के व्यवसाय में जटिलता की एक परत जोड़ता है।
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Car Showroom
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इस स्थिति में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा उधार दरों को 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखने के फैसले से सभी वाहनों, खासकर एंट्री-लेवल वाहनों की खुदरा बिक्री पर लगातार बुरा प्रभाव पड़ेगा। यह देखते हुए कि इस श्रेणी में कीमतों में एक बड़ा इजाफा हुआ है। और इस क्षेत्र के खरीदार अत्यधिक मूल्य संवेदनशील होते हैं। यह यह भी कहा गया है कि वित्त दरों में राहत न मिलने के साथ निरंतर मुद्रास्फीति को देखते हुए, एंट्री-लेवल वाहन सेगमेंट में संभावित खरीदार झिझक सकते हैं। संगठन ने आगे कहा कि आगामी चुनावों के साथ मिलकर ये चुनौतियां उद्योग को प्रभावित करेंगी, जिससे संभावित रूप से सभी क्षेत्रों में वाहन बिक्री कम हो सकती है।
हालांकि, एक सकारात्मक पहलू भी है। फाडा के बयान में दावा किया गया है कि इन चुनौतियों के बावजूद, वापसी और विकास के अवसर बने हुए हैं। जिन्हें त्योहारों और उपभोक्ता रुचि को पुनर्जीवित करने के मकसद से रणनीतिक प्रॉडक्ट अनवील से मजबूत किया गया है।