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Petrol Pump: भारत का पेट्रोल पंप नेटवर्क एक लाख के पार, दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा, जानें कौन हैं टॉप दो देश

Thu, 25 Dec 2025 07:08 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत का पेट्रोल पंप नेटवर्क 1,00,000 के आंकड़े को पार कर गया है, जो 2015 से दोगुना हो गया है। बना दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा। जानें कौन हैं दुनिया के टॉप दो देश?
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पेट्रोल पंप - फोटो : AI
भारत का पेट्रोल पंप नेटवर्क एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। देश में पेट्रोल पंपों की कुल संख्या अब 1 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो बीते एक दशक में लगभग दोगुनी हो गई है। यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब वाहन स्वामित्व में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। और सरकारी तेल कंपनियां अपने बाजार हिस्से को बनाए रखने के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों और राष्ट्रीय राजमार्गों तक ईंधन की पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।

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इंडियन ऑयल - फोटो : एएनआई (फाइल)
सरकारी कंपनियों का दबदबा बरकरार
तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर के आखिर तक देश में कुल 1,00,266 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे थे। भौगोलिक क्षेत्रफल के लिहाज से अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पेट्रोल पंप नेटवर्क वाला देश बन गया है। इन पंपों में से 90 प्रतिशत से अधिक सरकारी कंपनियों के स्वामित्व में हैं। जिनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) प्रमुख हैं।

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Bharat Petroleum - फोटो : PTI
निजी क्षेत्र की मौजूदगी धीरे-धीरे बढ़ी
निजी क्षेत्र में रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी सबसे बड़ी खिलाड़ी है, जिसके देशभर में 6,921 पेट्रोल पंप हैं। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी की जॉइंट वेंचर कंपनी के 2,114 आउटलेट हैं, जबकि शेल के 346 पंप संचालित हो रहे हैं। साल 2015 में देश में कुल 50,451 पेट्रोल पंप थे, जिनमें निजी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 5.9 प्रतिशत थी। अब यह बढ़कर 9.3 प्रतिशत हो गई है, हालांकि अभी भी बाजार पर सरकारी कंपनियों का वर्चस्व बना हुआ है।

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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति
दुनिया में सबसे ज्यादा पेट्रोल पंप अमेरिका में हैं। एक 2024 की रिपोर्ट के अनुसार वहां करीब 1,96,643 रिटेल गैस स्टेशन थे, हालांकि उसके बाद कुछ आउटलेट बंद भी हुए हो सकते हैं। चीन में पिछले साल की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 1,15,228 पेट्रोल पंप थे। चीन की सबसे बड़ी ईंधन रिटेलर साइनोपेक के पास ही 30,000 से अधिक स्टेशन हैं। इसके बावजूद, भारतीय बाजार में IOC के 41,664 आउटलेट चीन की किसी भी एकल कंपनी से कहीं ज्यादा हैं। BPCL और HPCL भी क्रमशः 24,605 और 24,418 पंपों के साथ मजबूत स्थिति में हैं।

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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
गांवों और वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ता फोकस
पेट्रोल पंप नेटवर्क का विस्तार केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पंपों की हिस्सेदारी अब बढ़कर लगभग 29 प्रतिशत हो गई है, जो एक दशक पहले करीब 22 प्रतिशत थी। इसके साथ-साथ पेट्रोल पंपों की भूमिका भी बदली है। अब कई आउटलेट्स पर पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और अन्य वैकल्पिक ईंधन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
निजी निवेश के सामने चुनौतियां
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ईंधन खुदरा क्षेत्र में निजी कंपनियों की सीमित भागीदारी का बड़ा कारण कीमतों पर सरकारी नियंत्रण है। भले ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों को औपचारिक रूप से मुक्त कर दिया गया हो। लेकिन सरकारी कंपनियों में बहुमत हिस्सेदारी के चलते सरकार का अप्रत्यक्ष नियंत्रण बना रहता है। नवंबर 2021 से सरकारी तेल कंपनियों ने दैनिक मूल्य संशोधन भी रोक दिया है। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ जब ईंधन कीमतें लागत से कम रखी गईं, जिससे निजी कंपनियों के लिए कारोबार घाटे का सौदा बन गया।

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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
बढ़ती भीड़, घटता मुनाफा
पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ने से प्रति पंप बिक्री भी प्रभावित हुई है। कम यातायात वाले मार्गों पर स्थित कई आउटलेट्स की बिक्री घट गई है, जिससे उनके लिए मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल पंपों का यह तेजी से बढ़ता नेटवर्क देश की बढ़ती परिवहन जरूरतों और बदलते ईंधन परिदृश्य की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। 



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