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Electric Vehicles: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की सफलता के लिए चीन जैसा ईकोसिस्टम जरूरी, नोमुरा की रिपोर्ट

Fri, 01 May 2026 08:30 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नोमुरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर बदलाव इस बात पर बहुत ज्यादा निर्भर करेगा कि वह कितनी तेजी से एक मजबूत चार्जिंग इकोसिस्टम तैयार कर पाता है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी ही बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने का मुख्य कारण बनकर उभरेगी।
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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Adobe Stock

नोमुरा (Nomura) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का भविष्य पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि देश कितनी जल्दी एक मजबूत चार्जिंग ईकोसिस्टम तैयार करता है। रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि बुनियादी ढांचे की तैयारी बड़े पैमाने पर ईवी अपनाए जाने के लिए एक प्रमुख कारक होगी।

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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Adobe Stock

EV अपनाने में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की क्या भूमिका है?

नोमुरा के अनुसार, ग्राहकों को इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) वाहनों से दूर ले जाने के लिए चार्जिंग की उपलब्धता सबसे बड़ा कारक है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी ही 'मास अडॉप्शन' (बड़े पैमाने पर अपनाना) का रास्ता खोल सकती है।

चीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने 2025 तक लगभग 2 करोड़ (20 मिलियन) सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट स्थापित कर लिए हैं।

चीन ने टियर 1, टियर 2 शहरों और हाईवे पर मजबूत कवरेज दी है, हालांकि निचले टियर वाले क्षेत्रों में अभी भी कुछ अंतराल हैं।

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Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock

चीन की सफलता से भारत क्या सीख सकता है?

चीन में ईवी की पैठ 2020 में 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 53.3 प्रतिशत हो गई है।

नोमुरा के अनुसार, यह सफलता निरंतर नीतिगत समर्थन, तकनीकी प्रगति और सरकारी व निजी कंपनियों के समन्वित निवेश का नतीजा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब ICE वाहन संरचनात्मक गिरावट की ओर हैं। क्योंकि ईवी ने अब लागत समानता, तकनीकी श्रेष्ठता और मुख्यधारा की उपभोक्ता स्वीकृति हासिल कर ली है।

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Electric Vehicles - फोटो : AI

पॉलिसी और सब्सिडी के मोर्चे पर क्या बदलाव जरूरी हैं?

चीन ने 2022 में सीधी सब्सिडी खत्म कर दी थी। लेकिन टैक्स छूट और स्क्रैपेज/ट्रेड-इन इंसेंटिव जैसे अप्रत्यक्ष उपायों के जरिए समर्थन जारी रखा।

  • रेगुलेटरी टूल्स: 'न्यू एनर्जी व्हीकल (NEV) क्रेडिट सिस्टम' जैसे उपकरणों ने पारंपरिक कार निर्माताओं को इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ने के लिए मजबूर किया।

  • भारत के लिए सुझाव: भारत को भी FAME (फेम) और PM E-Drive (पीएम ई-ड्राइव) जैसी शुरुआती सब्सिडी से आगे बढ़कर टैक्स लाभ, स्क्रैपेज पॉलिसी और क्रेडिट सिस्टम जैसे व्यापक दृष्टिकोण की ओर बढ़ना चाहिए।

  • स्पष्ट प्राथमिकता: चीन में हाइब्रिड के बजाय बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEV) को स्पष्ट प्राथमिकता देने से निर्माताओं को एक दिशा मिली और विकास की गति तेज हुई।

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Electric Vehicles - फोटो : AI

भारतीय निर्माताओं के लिए सफलता के सूत्र क्या होंगे?

नोमुरा ने चीन के निर्माताओं (OEM) की सफलता के तीन मुख्य कारक बताए हैं, जिन्हें भारतीय कंपनियों को अपनाना चाहिए:

  1. अनुसंधान और विकास (R&D): R&D में महत्वपूर्ण और निरंतर निवेश करना।

  2. वैल्यू चेन पर नियंत्रण: पूरी वैल्यू चेन को विकसित और नियंत्रित करना।

  3. स्केल (Scale): लागत कम करने के लिए तेजी से उत्पादन का पैमाना बढ़ाना।

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Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock
बड़े पैमाने पर उत्पादन, सफलता का मंत्र
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारतीय निर्माताओं को बैटरी तकनीक, सॉफ्टवेयर और सप्लाई चेन के स्थानीयकरण (लोकलाइजेशन) में मुख्य दक्षता हासिल करनी होगी।

जो कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादन करके लागत का लाभ उठाएंगी, वे बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी।

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