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EV: भारत में तेज होगी ईवी की रफ्तार! FY27 तक हर 10 में से एक से ज्यादा वाहन इलेक्ट्रिक हो सकते हैं

Mon, 27 Jul 2026 02:40 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहन अब अपनी पहुंच और विकास के एक बड़े पैमाने वाले चरण में प्रवेश कर रहे हैं। एक ताजा अध्ययन के अनुसार, भारतीय बाजार में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 के 8.5% से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में 10-12% होने की संभावना है।
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EV Market Growth India - फोटो : Amar Ujala

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। रेटिंग एजेंसी इंड-रा (Ind-Ra) के अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 (FY27) तक देश में कुल वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 10-12 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा FY26 में दर्ज 8.5 प्रतिशत के मुकाबले अधिक होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ी भूमिका इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की रहने वाली है। एजेंसी का मानना है कि जिन वाहन श्रेणियों में इलेक्ट्रिक तकनीक आर्थिक रूप से ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है। वहां ईवी अपनाने की रफ्तार सबसे तेज बनी रहेगी। 


कौन-सा EV सेगमेंट सबसे तेज बढ़ेगा?

Ind-Ra के अध्ययन के अनुसार, आने वाले समय में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन भारतीय ईवी बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। कम परिचालन खर्च और बढ़ते विकल्प इस सेगमेंट को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

ईवी दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ेगी:
FY27 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 8-10% तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि FY26 में यह 6.6% थी।

कम रनिंग कॉस्ट का मिलेगा फायदा:
पेट्रोल वाहनों की तुलना में कम परिचालन खर्च ईवी अपनाने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

घर पर चार्जिंग की सुविधा:
आसान होम चार्जिंग विकल्प भी ग्राहकों को इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने के लिए आकर्षित कर रहे हैं।

मॉडलों की संख्या बढ़ रही है:
मौजूदा वाहन निर्माता लगातार नए इलेक्ट्रिक मॉडल पेश कर रहे हैं, जिससे ग्राहकों के पास पहले से ज्यादा विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। 

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Electric Car - फोटो : Freepik

इलेक्ट्रिक कारों की मांग कितनी बढ़ सकती है?

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट भी मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकता है। हालांकि इसकी शुरुआत अभी अपेक्षाकृत छोटे आधार से हो रही है।

हिस्सेदारी 6-8% तक पहुंच सकती है:
FY27 में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 6-8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि FY26 में यह 4.4 प्रतिशत थी।

नए मॉडल बनेंगे ग्रोथ की वजह:
रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में नए इलेक्ट्रिक मॉडलों की लॉन्चिंग इस सेगमेंट की वृद्धि का सबसे बड़ा कारण होगी।


इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन क्यों बने रहेंगे सबसे आगे?

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट पहले से ही भारत का सबसे अधिक विद्युतीकृत (इलेक्ट्रिफाइड) वाहन वर्ग है। और आगे भी इसकी बढ़त जारी रहने की संभावना जताई गई है।

62-65% तक पहुंच सकती है हिस्सेदारी:
FY27 में इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों की हिस्सेदारी 62-65 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि FY26 में यह 59 प्रतिशत थी।

कम परिचालन खर्च का लाभ:
व्यावसायिक उपयोग करने वाले ऑपरेटरों के लिए कम संचालन लागत इस सेगमेंट की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।

सरकारी समर्थन जारी:
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार का लगातार मिल रहा सहयोग भी इस वृद्धि को गति देगा। 

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Electric Bus - फोटो : अमर उजाला

इलेक्ट्रिक बसों को क्या मिलेगा फायदा?

रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

6-8% तक पहुंच सकती है हिस्सेदारी:
FY27 में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 6-8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि FY26 में यह 4.37 प्रतिशत थी।

ऑर्डर बुक और सरकारी खरीद का असर:
मजबूत ऑर्डर बुक और सरकारी खरीद कार्यक्रम इस सेगमेंट की वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी कहती है कि इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती राज्य परिवहन उपक्रमों में चार्जिंग और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।


लंबी दूरी वाले वाहनों में EV की रफ्तार धीमी क्यों रहेगी?

Ind-Ra का मानना है कि लंबी दूरी की यात्रा वाले वाहन सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रह सकती है।

इसके पीछे कुछ प्रमुख वजहें बताई गई हैं-

शुरुआती खरीद लागत अधिक होना:
कई ग्राहक अब भी इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती कीमत को लेकर विचार कर रहे हैं।

चार्जिंग नेटवर्क की उपलब्धता:
लंबी दूरी की यात्रा के दौरान चार्जिंग सुविधाओं तक आसान पहुंच एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।

ड्राइविंग रेंज को लेकर चिंता:
एक बार चार्ज करने पर मिलने वाली दूरी भी ग्राहकों के फैसले को प्रभावित कर रही है।

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Electric Scooter - फोटो : Adobe Stock

किन ग्राहकों से मिलेगी सबसे ज्यादा रफ्तार?

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग मुख्य रूप से महानगरों और अपेक्षाकृत अधिक आय वाले ग्राहकों के बीच केंद्रित रहने की संभावना है।

यानी शहरी क्षेत्रों और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ता ईवी अपनाने की गति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


Ind-Ra ने भारत के EV बाजार को लेकर क्या कहा?

Ind-Ra में कॉरपोरेट्स की डायरेक्टर श्रुति सब्बू के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार लगातार बेहतर वृद्धि की संभावनाएं दिखा रहा है।

उन्होंने कहा कि अब ईवी अपनाने को कम स्वामित्व लागत, बेहतर उपयोगिता, वाहनों की बढ़ती रेंज और ग्राहकों की बढ़ती स्वीकार्यता का समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में ईवी बाजार का अगला चरण मजबूत घरेलू सप्लाई चेन तैयार करने पर निर्भर करेगा।

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Electric Car Charging - फोटो : Adobe Stock

EV बाजार की अगली चुनौती क्या होगी?

रिपोर्ट के अनुसार, भारत को इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में आयात पर निर्भरता कम करनी होगी और देश के भीतर प्रमुख ईवी कंपोनेंट्स के निर्माण को मजबूत करना होगा।

इस दिशा में खास तौर पर इन क्षेत्रों पर ध्यान देना जरूरी होगा-

बैटरी और उससे जुड़ी तकनीक:
घरेलू स्तर पर बैटरी निर्माण और संबंधित तकनीकों को मजबूत करना होगा।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार:
ईवी अपनाने की रफ्तार बनाए रखने के लिए देशभर में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार भी जरूरी होगा।


क्या कहती है पूरी रिपोर्ट?

Ind-Ra की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में दोपहिया, कार, तीनपहिया और बस जैसे विभिन्न सेगमेंट में ईवी की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस वृद्धि की गति अलग-अलग वाहन श्रेणियों में अलग हो सकती है। रिपोर्ट का मानना है कि कम परिचालन खर्च, नए मॉडल, सरकारी सहयोग और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भारत में ईवी अपनाने की रफ्तार तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

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