Electric Vehicles
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बैटरी की डिमांड में कितना बड़ा उछाल आने वाला है?
जैसे-जैसे सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे उनके दिल यानी 'बैटरी' की मांग भी आसमान छू रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में कुल बैटरी की मांग 19 GWh से बढ़कर 362 GWh होने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ईवी की संख्या तो बढ़ ही रही है, साथ ही गाड़ियों में लगने वाले बैटरी पैक का औसत आकार (कैपेसिटी) भी बड़ा हो रहा है।
अगर हम साल 2025 की बात करें, तो कुल बैटरी मांग 19 GWh तक पहुंच गई, जो 2024 में केवल 13 GWh थी।
बैटरी की इस कुल खपत (2025) को अगर हम वाहनों के हिसाब से समझें, तो इसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
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फोर-व्हीलर्स (40%): यूनिट्स की बिक्री भले ही कम हो, लेकिन बड़ी बैटरी लगने के कारण कुल बैटरी खपत में चार पहिया गाड़ियां सबसे आगे हैं।
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थ्री-व्हीलर्स (27%): यह दूसरे स्थान पर रहे।
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टू-व्हीलर्स (23%): यह तीसरे स्थान पर रहे।
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बसें (7.8%): बसों की बिक्री यूनिट्स में भले ही सिर्फ 0.2% है, लेकिन उनके विशाल बैटरी पैक के कारण कुल बैटरी मांग में उनका हिस्सा बहुत बड़ा (7.8%) है।
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ट्रक (1.9%): हल्के, मध्यम और भारी इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों के धीरे-धीरे बढ़ने से ट्रकों का फुटप्रिंट 1.9 प्रतिशत रहा।
अहम बात: रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2029 के बाद बिजनेस-एज-यूज़ुअल (BAU) और नेशनल ईवी टारगेट (NEV) के बीच का अंतर और बड़ा होगा। यानी भारत में ईवी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारी नीतियां कितनी मजबूत हैं, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कितनी तेजी से बनता है और स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को कितनी रफ्तार मिलती है।