फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

E20 Petrol: GEMA अध्यक्ष ने कहा- भारत का ई20 मिशन ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर केंद्रित, युद्ध नहीं वजह

Sat, 04 Apr 2026 11:03 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत का पेट्रोल (E20) में 20% इथेनॉल मिलाने का कदम, मिडिल ईस्ट में चल रहे विवाद जैसी जियोपॉलिटिकल दिक्कतों के बजाय, लंबे समय के एनर्जी आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों से प्रेरित है।
विज्ञापन
1 of 6
E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

भारत में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू करने का फैसला किसी युद्ध या वैश्विक संकट की वजह से नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लंबे लक्ष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है। यह बात अनाज इथेनॉल निर्माता संघ (GEMA) के अध्यक्ष सीके जैन ने कही।

क्या E20 नीति का संबंध युद्ध से है?
GEMA के अनुसार, E20 नीति का उद्देश्य स्पष्ट रूप से देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।

यह कदम मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में चल रहे संघर्ष से प्रेरित नहीं है, बल्कि इस विचार पर आधारित है कि भारत को अपने संसाधनों का अधिक उपयोग करना चाहिए।

विज्ञापन

2 of 6
E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ी पर हो रहा असर - फोटो : AI

क्या E20 अंतिम लक्ष्य है?
विशेषज्ञों का मानना है कि E20 कोई अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक “चेकपॉइंट” है।

इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि देश में एथेनॉल उत्पादन के लिए पर्याप्त कच्चा माल और निवेश दोनों उपलब्ध हैं।

आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रण को 25-27 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।

क्या भारत के पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता है?
भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है और आगे इसमें 10 प्रतिशत तक और वृद्धि होने की उम्मीद है।

वर्तमान में 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग के लिए लगभग 1,300-1,400 करोड़ लीटर की जरूरत होती है। जिससे स्पष्ट है कि देश के पास अतिरिक्त क्षमता मौजूद है।

विज्ञापन

3 of 6
E20 - फोटो : Amar Ujala

क्या उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग हो रहा है?
हालांकि क्षमता पर्याप्त है, लेकिन एथेनॉल प्लांट्स अभी केवल 40-50 प्रतिशत क्षमता पर ही चल रहे हैं।

इससे उद्योग में वित्तीय दबाव बढ़ रहा है और करीब 50,000 करोड़ रुपये तक के NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) का जोखिम भी बताया गया है।

क्या इससे अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है?
एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है।

2024-25 में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर करीब 40,000 करोड़ रुपये की बचत की।

इसका बड़ा हिस्सा किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंचा है, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिली है।

4 of 6
E20 - फोटो : Amar Ujala

क्या कच्चे माल की कमी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल की कोई कमी नहीं है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास 200 लाख टन से अधिक चावल का अतिरिक्त भंडार है। जिससे बड़ी मात्रा में एथेनॉल बनाया जा सकता है।

इसके अलावा मक्का और अन्य अनाज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

क्या एथेनॉल का वाहनों पर असर पड़ता है?
E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत सीमित है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वाहनों के प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं देखा गया है।

विज्ञापन

5 of 6
पेट्रोल पंप (सांकेतिक सस्वीर) - फोटो : AI

क्या भविष्य में एथेनॉल का उपयोग और बढ़ेगा?
एथेनॉल का उपयोग केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि इसे कुकिंग फ्यूल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर LPG के विकल्प के रूप में।

जैसे-जैसे एथेनॉल सस्ता होगा और LPG महंगा, यह विकल्प और व्यवहारिक हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद

क्या वैश्विक सप्लाई जोखिम चिंता का कारण हैं?
वैश्विक स्तर पर LNG की सप्लाई में 10-15 प्रतिशत तक की कमी की आशंका जताई गई है। जिससे उर्वरक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश के किसान इस स्थिति से निपटने में सक्षम हैं।

क्या यह भारत के ऊर्जा भविष्य की दिशा तय करता है?
E20 नीति भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

यह न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें