भारत को देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के बुनियादी ढांचे के मामले में अन्य देशों के साथ आगे बढ़ने के लिए रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है, खासकर जब ईवी चार्जिंग सुविधाओं की बात आती है। भले ही सरकारी और निजी दोनों पहलों के जरिए हजारों ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए जाने की कोशिशें जारी हैं, शुक्रवार को जारी एक श्वेत पत्र से पता चलता है कि अन्य देशों के साथ बराबरी पर आने से पहले भारत को अभी भी एक लंबा सफर तय करना बाकी है।
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EV Charging Stations
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Alvarez and Marsal (अल्वारेज और मार्सल) नाम के एक वैश्विक पेशेवर सर्विस फर्म द्वारा जारी श्वेत पत्र के मुताबिक, भारत को चीन या संयुक्त राज्य जैसे देशों के नजदीक पहुंचने के लिए अगले आठ वर्षों में कम से कम 46,000 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन लगाने की जरूरत है। इस समय, सड़क पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या के साथ भारत का ईवी चार्जिंग स्टेशन अनुपात इन देशों की तुलना में बहुत कम है।
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किस देश में कितने ईवी चार्जिंग स्टेशन
इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयोजित एक कार्यक्रम में इस श्वेत पत्र को जारी किया गया था। जब ईवी बुनियादी ढांचे की बात आती है तो इससे वैश्विक औसत की तस्वीर के बारे में पता चला। दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन बाजार चीन में हर 6 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन है। हालांकि जनसंख्या और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में छोटा, नीदरलैंड में भी यही अनुपात है। एकमात्र अन्य देश जिसकी जनसंख्या के मामले में भारत के तुलना की जा सकती है वह है संयुक्त राज्य अमेरिका। अमेरिका में हर 19 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक ईवी चार्जिंग स्टेशन है। भारत के मामले में, हर 135 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक ईवी चार्जिंग स्टेशन के साथ अनुपात में बड़ा फासला है।
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ईवी चार्जिंग स्टेशनों की कमी के अलावा, श्वेत पत्र में अन्य चुनौतियों जैसे उच्च कीमतों, ड्राइविंग रेंज की चिंता, सुरक्षा के कारणों पर भी रोशनी डाली गई है, जिसके कारण भारत में ईवी को अपनाना धीमा है। अल्वारेज एंड मार्सल इंडिया के प्रबंध निदेशक मनीष सहगल ने कहा, "हम मानते हैं कि अगर इन मुद्दों को सरकार के समर्थन के साथ उद्योग द्वारा एक ठोस प्रयास से संबोधित किया जा सकता है, तो भारत संभावित रूप से ईवी सेगमेंट के लिए विश्व स्तर पर लीडिंग मार्केट और मैन्युफेक्चरिंग सेंटर में से एक बन सकता है।"
नीति आयोग में इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के सलाहकार सुधेंदु जे सिन्हा ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि गुणवत्ता मानक शीर्ष पर हों, व्यवसायों का सप्लाई चेन पर बेहतर नियंत्रण होना चाहिए, और नैतिकता इंडस्ट्री की अडिग रीढ़ होनी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया में शीर्ष ईवी मैन्युफेक्चरिंग केंद्र बनना चाहता है और ईवी बैटरी और अन्य कंपोनेंट्स के लिए निर्यात क्षेत्र का नेतृत्व करना चाहता है।