भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बेहद उम्मीदों भरी, लेकिन साथ ही सचेत करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 'इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस' (IEEFA) और 'JMK रिसर्च एंड एनालिटिक्स' की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि, भारत साल 2030 तक कई हाई-वैल्यू इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) कंपोनेंट श्रेणी में 90 से 100 प्रतिशत तक स्थानीयकरण हासिल कर सकता है। यानी ईवी के ज्यादातर पार्ट्स भारत में ही बनने लगेंगे।
लेकिन, पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की इस रफ्तार के सामने एक बहुत बड़ा रोड़ा अभी भी अटका हुआ है। और वह है आयातित सेमीकंडक्टर (इम्पोर्टेड चिप्स), दुर्लभ पृथ्वी चुंबक (रेयर अर्थ मैग्नेट्स) और एडवांस मटेरियल्स पर भारत की भारी निर्भरता।