भारत से गाड़ियों का एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है। FY2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल वाहन निर्यात में 22% की उछाल दर्ज की गई है। यह उपलब्धि पैसेंजर व्हीकल, टू-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन की बदौलत आई है।
भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर ने एक बार फिर दुनिया में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश का कुल वाहन निर्यात 22% की सालाना वृद्धि के साथ 14,57,461 यूनिट्स तक पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि में 11,92,566 यूनिट्स था। यह जानकारी SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।
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Car Plant
- फोटो : Freepik
पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट ने तोड़ा रिकॉर्ड
इस दौरान पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट ने सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया। अप्रैल-जून 2025 में 2,04,330 यूनिट्स कारें विदेश भेजी गईं, जो कि पिछले साल की तुलना में 13% ज्यादा हैं। Maruti Suzuki ने इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा 96,181 कारें एक्सपोर्ट कीं। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 37% अधिक है, जब कंपनी ने 69,962 यूनिट्स भेजी थीं।
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Hyundai Creta
- फोटो : Hyundai
Hyundai का भी शानदार प्रदर्शन
Hyundai Motor India ने भी तगड़ा प्रदर्शन किया। कंपनी ने इस तिमाही में 48,140 यूनिट्स का एक्सपोर्ट किया, जो पिछले साल के 42,600 यूनिट्स के मुकाबले 13% ज्यादा है। इससे Hyundai भारत की दूसरी सबसे बड़ी कार एक्सपोर्टर बनकर उभरी है।
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बाइक एक्सपोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
टू-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल्स की बढ़ी मांग
टू-व्हीलर सेगमेंट में 23% की ग्रोथ दर्ज हुई और कुल 11,36,942 यूनिट्स एक्सपोर्ट हुईं, जबकि पिछले साल यह संख्या 9,23,148 यूनिट्स थी। कमर्शियल व्हीकल्स का एक्सपोर्ट भी 23% बढ़कर 19,427 यूनिट्स पर पहुंच गया।
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थ्री व्हीलर
- फोटो : amar ujala
थ्री-व्हीलर्स में सबसे तेज ग्रोथ
थ्री-व्हीलर सेगमेंट ने सभी को पीछे छोड़ते हुए 34% की भारी ग्रोथ दर्ज की। अप्रैल-जून तिमाही में इस श्रेणी के 95,796 यूनिट्स एक्सपोर्ट हुए, जो कि पिछले साल के मुकाबले बड़ी छलांग है।
पड़ोसी देशों से बेहतर रही डिमांड
- फोटो : Bharat Mobility
इंटरनेशनल मार्केट्स से मिला मजबूत सपोर्ट
SIAM का कहना है कि इस ग्रोथ का मुख्य कारण मिडल ईस्ट और लैटिन अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिर मांग रही। साथ ही, श्रीलंका और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में रिकवरी, जापान से बढ़ती डिमांड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) ने भी एक्सपोर्ट को बूस्ट दिया है।