भारत में ईवी उद्योग ने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों पर जीएसटी कम करने की मांग फिर से उठाई है, ताकि उन्हें और ज्यादा किफायती बनाया जा सके। ताकि देश भर में ईवी को अपनाने को बढ़ावा मिले। दरअसल, बैटरी ईवा का सबसे महंगा कंपोनेंट होता है। जिसकी कीमती कार के मूल्य का करीब एक तिहाई होती है।
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Electric car EV charging battery at charger station
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भारत में ईवी उद्योग ने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों पर जीएसटी कम करने की मांग फिर से उठाई है, ताकि उन्हें और ज्यादा किफायती बनाया जा सके। और साथ ही देश भर में इसे अपनाने को बढ़ावा मिले। उद्योग यह भी चाहता है कि ईवी चार्जिंग सर्विस की दरें कम की जाएं ताकि ईवी को खरीदारों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाया जा सके। ईवी बैटरियों पर इस समय जीएसटी दर 18 प्रतिशत है। उद्योग चाहता है कि नजदीकी भविष्य में जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया जाए। भारत में ईवी चार्जिंग के लिए भी इसी तरह की दरें लागू हैं।
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Electric Car
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ईवी बैटरियों पर जीएसटी दर कम करने और चार्जिंग दरों को कम करने का प्रस्ताव काइनेटिक ग्रीन की संस्थापक-सीईओ और फिक्की इलेक्ट्रिक व्हीकल कमेटी की अध्यक्ष सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी ने मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान पेश किया। उन्होंने सभी क्षेत्रों में ईवी की बिक्री बढ़ाने में मदद करने के लिए पीएम ई-ड्राइव फंड को बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। मोटवानी ने यह भी कहा कि ईवी बैटरियों और चार्जिंग सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने की औपचारिक सिफारिश को विचार के लिए जीएसटी परिषद के सामने रखा जाएगा।
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Electric Vehicles Charging Station
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ईवी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जीएसटी दरों को कम करने की जरूरत के बारे में बताते हुए, मोटवानी ने कहा कि टैक्स को युक्तिसंगत बनाने से ईवी को ज्यादा खरीदारों के साथ मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "फिलहाल चार्जिंग सेवाओं पर जीएसटी अभी भी 18 प्रतिशत है, जिसे हम 5 प्रतिशत तक कम करने का अनुरोध करेंगे। ताकि उपभोक्ताओं के लिए चार्जिंग ज्यादा किफायती हो जाए। जबकि ईवी पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, बैटरी पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। इसलिए अनुरोध है कि इसे घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए ताकि जब उपभोक्ता रिप्लेसमेंट बैटरी खरीदें, तो यह ज्यादा किफायती हो।"
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Electric Car
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मोटवानी ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत दिए जाने वाले प्रोत्साहनों की समीक्षा करने की जरूरत पर भी जोर दिया। इस साल अक्तूबर में, केंद्र ने भारत में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने और ईवी मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में मदद करने के लिए 10,900 करोड़ रुपये के आउटले (परिव्यय) के साथ ईवी-इंसेंटिव योजना शुरू की।
मोटवानी ने कहा, "हमारा मानना है कि चूंकि मांग बढ़ रही है, इसलिए शायद प्रोत्साहन राशि की समीक्षा की जानी चाहिए। ताकि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत बजट को समग्र रूप से बढ़ाया जा सके। और यह सुनिश्चित किया जा सके कि अगले दो वर्षों में बेचे जाने वाले वाहनों की कुल संख्या प्रोत्साहन के लिए पात्र हो।"
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Electric Car
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महिंद्रा के एमडी-सीईओ और फिक्की के अध्यक्ष अनीश शाह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच अभी भी अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। उन्होंने कहा कि इश समय इलेक्ट्रिक कारों की पहुंच 1.5 प्रतिशत है, जो इस बात का संकेत है कि देश में ईवी बेस का विस्तार करने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदारों के लिए अधिक आकर्षक प्रस्ताव बनाने के लिए सरकार के साथ कदम मिलाना देश के ईवी निर्माताओं पर निर्भर है।
उन्होंने कहा, "जबकि ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) हमेशा सब्सिडी मांगना पसंद करते हैं, हम यही कहेंगे कि सरकार ने वह सब कुछ किया है जो उसे करना था... अब यह उद्योग पर निर्भर है कि वह इसे आगे बढ़ाए और इलेक्ट्रिक में बदलाव को सक्षम करे।"
MG Windsor Electric Car
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी हो रही है, जबकि अन्य बाजारों में हाल के महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में गिरावट आई है। इस साल की पहली छमाही में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 2023 की इसी अवधि की तुलना में 19 प्रतिशत तक बढ़ गई। अब इसका लक्ष्य एक कैलेंडर वर्ष में 10 लाख बिक्री का आंकड़ा पार करना है।
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र का लक्ष्य इस दशक के आखिर तक कुल वाहन बिक्री का लगभग 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों से हासिल करना है।