भारत सरकार और World Bank (विश्व बैंक) इलेक्ट्रिक वाहन खरीद के लिए लोन देने वाले बैंकों को मुआवजा देने के लिए एक रिस्क-शेयरिंग मैकेनिज्म (जोखिम-साझाकरण तंत्र) शुरू करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, क्योंकि देश परिवहन क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करना चाहता है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
भारत के G20 शेरपा अमिताभ कांत ने नई दिल्ली में उद्योग से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जोखिम साधन बैंकों को लोन डिफॉल्ट के खिलाफ बचाव और ईवी के फाइनेंसिंग की लागत में कटौती करने में मदद करेगा। कांत इस साल जून तक सरकारी थिंकटैंक NITI Aayog (नीति आयोग) के सीईओ थे, जो अर्थव्यवस्था में राज्य के नीतिगत फैसलों की अगुवाई करते थे।
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बैटरी से चलने वाले वाहनों को अपनाने में सुस्ती के कारण दक्षिण एशियाई राष्ट्र में स्वच्छ परिवहन को अपनाने की रफ्तार अमेरिका और चीन की तुलना में धीमी है। इन वाहनों की ज्यादा कीमत और अपर्याप्त चार्जिंग स्टेशन एक बड़ी बाधा है। ब्लूमबर्गएनईएफ का कहना है कि 2040 तक, भारत में 53 प्रतिशत नई ऑटोमोबाइल बिक्री इलेक्ट्रिक होगी, जो चीन के 77 प्रतिशत के बाद दूसरे नंबर पर होगी।
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कांत ने कहा भारत में बैंक ऐसे समय में ईवी खरीद के लिए लोन देने से हिचक रहे हैं जब इन वाहनों का बीमा करने की लागत ज्यादा है और रीसेल बाजार फिलहाल छोटा बना हुआ है। कांत को हाल ही में दिसंबर में 20 देशों के समूह के अध्यक्ष बनने पर भारत का मुख्य वार्ताकार नियुक्त किया गया था।
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रिपोर्ट के मुताबिक परियोजना पर काम कर रहे नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, विश्व बैंक एक भारतीय बैंक के साथ एक अरब डॉलर का कोष स्थापित करेगा जो सभी वित्तीय संस्थानों को उपलब्ध कराया जाएगा। लोन डिफॉल्ट के मामले में यह फंड ऋणदाताओं को फर्स्ट-लॉस (पहले नुकसान) की गारंटी प्रदान करेगा। यह जानकारी देने वाले अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया क्योंकि यह चर्चा अभी भी निजी स्तर पर चल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक विश्व बैंक के भारत के एक प्रवक्ता ने कॉल और एक ईमेल का जवाब नहीं दिया जिसमें टिप्पणी मांगी गई थी।
भारत अपने परिवहन क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने पर जोर दे रहा है, जो देश के कुल उत्सर्जन का 13.5 प्रतिशत है, क्योंकि यह 2070 तक नेट कार्बन जीरो (शुद्ध कार्बन शून्य) बनने के अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहता है। सरकार को उम्मीद है कि भारतीय ईवी उद्योग में निवेश तीन गुना से ज्यादा हो जाएगा, जो साल 2021 के 6 अरब डॉलर से साल 2030 तक 20 अरब डॉलर होगा।
सरकार इलेक्ट्रिक स्कूटर और रिक्शा को अपनाने में तेजी लाने के लिए बैटरी-स्वैपिंग प्रोग्राम पर भी काम कर रही है, जो चार पहिया सेगमेंट की तुलना में तेजी से बढ़ रहे हैं।