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EV: मुंबई में 85 प्रतिशत ऑटो और टैक्सी ड्राइवर क्यों नहीं अपना पा रहे इलेक्ट्रिक वाहन? सर्वे ने बताई वजह

Wed, 10 Sep 2025 02:30 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुंबई में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को लेकर जागरूकता तो है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे अपनाने से पीछे हट रहे हैं।
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नई ईवी पॉलिसी के तहत होंगे कई बदलाव - फोटो : AI
मुंबई में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को लेकर जागरूकता तो है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे अपनाने से पीछे हट रहे हैं। वजह है चार्जिंग स्टेशन की कमी, पार्किंग की दिक्कतें और शुरुआती पूंजी का भारी खर्च। यह खुलासा पर्यावरण संगठन 'वातावरण' के सर्वे में हुआ है।

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Auto Rickshaw - फोटो : Adobe Stock
सर्वे के नतीजे
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह सर्वे 1,200 ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के बीच किया गया। इस रिपोर्ट को मंगलवार को चर्चगेट स्थित इंडियन मर्चेंट्स चैंबर में जारी किया गया। इस मौके पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक, परिवहन आयुक्त विवेक भीमनवर और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अविनाश धकने भी पैनल डिस्कशन में शामिल हुए।

सर्वे के मुताबिक, 62 प्रतिशत ड्राइवरों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पार्किंग स्पेस की कमी की वजह से ईवी अपनाने में झिझक है। वहीं, 60 प्रतिशत ड्राइवरों के लिए इलेक्ट्रिक ऑटो की शुरुआती कीमत सबसे बड़ी रुकावट है। एक ईवी ऑटो की कीमत करीब 2.5 से 3 लाख रुपये है, जबकि सीएनजी ऑटो 1.5 से 2 लाख रुपये में मिल जाता है। 

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Electric Rickshaw - फोटो : Lohia
ड्राइवरों की चिंताए
सिर्फ शुरुआती पूंजी ही नहीं, बल्कि और भी कई दिक्कतें ड्राइवरों के सामने आईं:
  • 28% ड्राइवरों को बैटरी जल्दी खत्म होने की चिंता है।
  • 24% को बैटरी बदलने की भारी लागत की दिक्कत है।
  • 20% को ज्यादा मेंटेनेंस खर्च की परेशानी है।
  • 15% ड्राइवर ईवी की लेकर सुरक्षा को लेकर सशंकित हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा सारथी ऑटो रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के डीएम गोसावी ने कहा, "चार्जिंग स्टेशन हों भी तो पार्किंग की समस्या बहुत बड़ी है।"

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Kinetic Green Electric Three-Wheeler - फोटो : Amar Sharma
समाधान की तलाश
पैनल डिस्कशन में कई सुझाव आए, जैसे-
  • बीएमसी की पार्किंग जगहों और मॉल्स के बाहर चार्जिंग स्टेशन लगाना।
  • ईवी के लिए स्वैपेबल बैटरी सिस्टम लाना, ताकि ड्राइवर बैटरी खत्म होने पर आसानी से बैटरी बदल सकें।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अविनाश धकने ने कहा, "चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने में समय लगेगा, इसलिए अभी के लिए स्वैपेबल बैटरी सबसे बेहतर विकल्प है।"

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Kinetic Green Electric Three-Wheeler - फोटो : Amar Sharma
क्या है आगे की राह
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि 15 साल पुराने वाहनों को सीधे कबाड़ में भेजने की बजाय उन्हें ग्रीन रेट्रोफिटिंग की सुविधा दी जाए। इससे ट्रांजिशन की लागत घटकर 1-2 लाख रुपये रह जाएगी। और ड्राइवरों को नए वाहन खरीदने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। 

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