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Delhi EV Policy 2.0: उद्योग जगत ने ईवी नीति को सराहा, गिग वर्कर्स ने भी किया स्वागत, लेकिन रखी ये बड़ी मांग

Tue, 30 Jun 2026 04:16 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 को उद्योग जगत ने स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय राजधानी सफलतापूर्वक इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित शहर में बदलती है, तो यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकती है और वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी।

 

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Delhi EV Policy 2.0 - फोटो : Amar Ujala

प्रदूषण की मार झेल रही देश की राजधानी दिल्ली को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए दिल्ली कैबिनेट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 (EV Policy 2.0) को मंजूरी दे दी है। दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति 1 जुलाई से लागू होने जा रही है। इस नीति का मुख्य मकसद 31 मार्च 2030 तक दिल्ली को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना है। इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार अगले चार वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करेगी।

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के दिग्गजों ने इस नीति का दिल खोलकर स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि दिल्ली इस बदलाव में सफल रहती है, तो यह बाकी पूरे देश के लिए एक मिसाल बन जाएगी। हालांकि, डिलीवरी और गिग वर्कर्स ने इस बदलाव के बीच अपनी आजीविका को लेकर चिंता भी जताई है। 

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Delhi EV Policy 2.0 - फोटो : Adobe Stock

दिल्ली की नई ईवी नीति 2.0 में आम जनता के लिए क्या खास घोषणाएं हैं?

सरकार ने वाहनों की अलग-अलग कैटेगरी के लिए कई बड़े इंसेंटिव और कड़े टाइमलाइन तय किए हैं:

  • टैक्स और फीस से पूरी छूट: दिल्ली में रजिस्टर होने वाली 30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक की सभी इलेक्ट्रिक कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से पूरी छूट दी जाएगी।

  • पेट्रोल-सीएनजी वाहनों पर फेज-वाइज रोक: 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा ही रजिस्टर किए जाएंगे। इसके बाद, 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और सीएनजी दो-पहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही रजिस्ट्रेशन होगा।

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर घटती सब्सिडी: ईवी दो-पहिया वाहन खरीदने वालों को पहले साल 30,000 रुपये, दूसरे साल 20,000 रुपये और तीसरे साल 10,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।

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Tata Punch EV - फोटो : Tata Motors

इस ऐतिहासिक नीति पर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के दिग्गजों का क्या कहना है?

उद्योग जगत ने इस नीति को देश के ईवी इकोसिस्टम के लिए एक मील का पत्थर बताया है:

Tata Motors Passenger Vehicles ने क्या कहा?

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने नीति का स्वागत करते हुए कहा कि दिल्ली ने एक बार फिर महत्वाकांक्षी विद्युतीकरण लक्ष्य बनाए रखकर नेतृत्व दिखाया है।

कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार:

  • अधिक उपयोग वाले वाहन वर्गों के लिए स्पष्ट इलेक्ट्रिफिकेशन टाइमलाइन तय की गई है।
  • नीति के प्रोत्साहन केवल प्योर इलेक्ट्रिक वाहन तक सीमित रखे गए हैं।

उन्होंने कहा कि इससे यह सिद्धांत मजबूत होता है कि सरकारी सहायता उन तकनीकों को मिले जो शून्य उत्सर्जन के साथ अधिकतम पर्यावरणीय लाभ देती हैं।

कंपनी का यह भी कहना है कि यह नीति उद्योग को दीर्घकालिक दिशा प्रदान करती है, भारत के ईवी इकोसिस्टम में विश्वास बढ़ाती है और अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

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Ultraviolette X-47 - फोटो : Ultraviolette

Ultraviolette Automotive ने क्या प्रतिक्रिया दी?

अल्ट्रावायलेट ऑटोमोटिव के सीईओ और डिजाइन हेड नारायण सुब्रमण्यम ने कहा कि नीति में उपभोक्ताओं को मिलने वाला समर्थन वाहन की कीमत पर आधारित नहीं है।

उनके अनुसार, इससे:

  • बेहतर रेंज
  • आधुनिक तकनीक
  • उच्च प्रदर्शन
  • बेहतर डिजाइन

चुनने वाले ग्राहकों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि नीति में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे ऊर्जा को भी उत्पाद का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

उनके शब्दों में,

"स्वच्छ तकनीक ही भविष्य का रास्ता है और अल्ट्रावायलेट इस बदलाव को रोमांचक बना रही है।"

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Delhi EV Policy 2.0 - फोटो : Adobe Stock

ICRA ने नीति को लेकर क्या कहा?

ICRA Ltd (इकरा लिमिटेड) के वाइस प्रेसिडेंट और सेक्टर हेड रोहन कंवर गुप्ता का मानना है कि:

  • ऑटो-रिक्शा और दोपहिया वाहनों के नए ICE (इंटरनल कंब्शन इंजन) पंजीकरण पर प्रस्तावित प्रतिबंध दिल्ली में ईवी अपनाने की रफ्तार को काफी बढ़ा सकता है।
  • इससे ICE वाहनों की मांग में संरचनात्मक गिरावट आने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि इस नीति के कारण वाहन निर्माताओं (ओईएम) को तेजी से अपने पोर्टफोलियो को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर स्थानांतरित करना होगा।

जो कंपनियां अभी भी मुख्य रूप से ICE वाहनों पर निर्भर हैं, उन्हें बिक्री में गिरावट और उत्पादन क्षमता के कम उपयोग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

क्या EV इकोसिस्टम तैयार है?

रोहन कंवर गुप्ता ने कहा कि विशेष रूप से दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए ईवी निर्माण क्षमता में पर्याप्त विस्तार हो चुका है।

हालांकि, नीति का सफल क्रियान्वयन इन बातों पर भी निर्भर करेगा:

  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
  • फाइनेंसिंग की उपलब्धता
  • सर्विस नेटवर्क की तैयारी

हाइब्रिड वाहनों को लेकर क्या कहा गया?

ICRA ने नीति में हाइब्रिड वाहनों को शामिल न किए जाने पर भी टिप्पणी की।

उनके अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि सरकार का पूरा जोर जीरो एमिशन मोबिलिटी पर है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि:

  • इससे ईवी आधारित तकनीकों में निवेश को स्पष्ट दिशा मिलेगी।
  • लेकिन उपभोक्ताओं के लिए एक संक्रमणकालीन विकल्प समाप्त हो जाएगा। जिससे अल्पकाल में ईवी अपनाने की गति प्रभावित हो सकती है।
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Delhi EV Policy 2.0 - फोटो : Adobe Stock

Gig Workers Association ने क्या मांग रखी?

Gig Workers Association (GigWA) ने नीति का स्वागत करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

लेकिन संगठन ने जोर दिया कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव श्रमिक-केंद्रित होना चाहिए।

संगठन का कहना है कि:

  • डिलीवरी कर्मी
  • गिग वर्कर्स
  • ऑटो चालक
  • दोपहिया वाहनों पर निर्भर अन्य असंगठित श्रमिक

को इस बदलाव का आर्थिक बोझ अकेले नहीं उठाना चाहिए।

गिग वर्कर्स सरकार से क्या चाहते हैं?

GigWA के आयोजन सचिव नितेश कुमार दास ने कहा कि सरकार को सुचारु बदलाव सुनिश्चित करने के लिए निम्न कदम उठाने चाहिए:

  • ब्याज मुक्त ऋण
  • पर्याप्त सब्सिडी
  • किफायती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
  • बैटरी-स्वैपिंग सुविधाएं
  • श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपाय

संगठन ने यह भी मांग की कि:

  • मौजूदा वाहन मालिकों को अपने वाहन उपयोग करने की अनुमति बनी रहे।
  • नीति के कारण किसी भी श्रमिक की आय या रोजगार प्रभावित न हो।
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Delhi EV Policy 2.0 - फोटो : Adobe Stock

प्लेटफॉर्म कंपनियों से क्या अपेक्षा की गई?

गिग वर्कर्स एसोसिएशन ने कहा कि जो प्लेटफॉर्म कंपनियां बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स पर निर्भर हैं, उन्हें भी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

संगठन के अनुसार, श्रमिकों को ईवी अपनाने में सहयोग देने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं बल्कि इन कंपनियों की भी होनी चाहिए।

नितेश कुमार दास ने कहा,

"स्वच्छ भविष्य का निर्माण श्रमिकों की आजीविका की कीमत पर नहीं किया जा सकता।"

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नई ईवी नीति 2.0 में परिवहन क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि यह नीति पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर चरणबद्ध बदलाव का रोडमैप प्रस्तुत करती है। साथ ही, विभिन्न वाहन श्रेणियों में ईवी अपनाने को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन और उपाय भी शामिल किए गए हैं।
 

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Oben Rorr Evo - फोटो : Oben Electric

Oben Electric की प्रतिक्रिया

Oben Electric (ओबेन इलेक्ट्रिक) की संस्थापक और सीईओ, सुश्री मधुमिता अग्रवाल ने कहा, "दिल्ली की ईवी नीति 2.0 एक प्रगतिशील नीति है जो बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की गति बढ़ाने के लिए जरूरी मुख्य बातों पर ध्यान देती है। टू-व्हीलर सेगमेंट में बदलाव के लिए एक साफ रोडमैप, ग्राहकों के लिए लगातार इंसेंटिव, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और लंबे समय के लिए इकोसिस्टम में निवेश को मिलाकर, यह पॉलिसी ग्राहकों और इंडस्ट्री, दोनों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से बढ़ने के लिए जरूरी स्पष्टता और भरोसा देती है।" 

उन्होंने ईवी नीति में दोपहिया वाहनों के महत्व को खास तौर पर रेखांकित किया:
  • इस पॉलिसी का टू-व्हीलर्स पर ध्यान देना खास तौर पर अहम है। मोटरसाइकिलें पर्सनल मोबिलिटी का मुख्य आधार हैं और बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिफिकेशन को तेजी से बढ़ाने का सबसे बड़ा मौका देती हैं। 
  • जैसे-जैसे दिल्ली जैसे शहर क्लीन मोबिलिटी के अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों को अपनाने का दायरा बढ़ाना पर्यावरण पर सार्थक असर डालने और बहुत ज्यादा राइडर्स तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहुंचाने के लिए जरूरी होगा। 
  • इससे मैन्युफैक्चरर्स पर ऐसी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें बनाने की बड़ी जिम्मेदारी भी आती है जो परफॉर्मेंस, भरोसे, सुरक्षा और ओनरशिप के अनुभव के मामले में असल में पारंपरिक मोटरसाइकिलों की जगह ले सकें।
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Delhi EV Policy 2.0 - फोटो : Freepik

ASSOCHAM ने किया स्वागत

व्यापार संघ एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, “एसोचैम दिल्ली सरकार की ईवी नीति 2026 का स्वागत करता है, जो राजधानी में लंबे समय से बनी हुई वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने और सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है।

ईवी पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) को मजबूत करने, जिसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहन शामिल हैं, के लिए प्रस्तावित 15,000 करोड़ रुपये का निवेश स्वच्छ परिवहन की दिशा में बदलाव को तेज करने के लिए आवश्यक प्रतिबद्धता के स्तर को दर्शाता है।

यह नीति न केवल वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को उल्लेखनीय रूप से कम करने की क्षमता रखती है, बल्कि नए आर्थिक अवसरों का भी सृजन कर सकती है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए उनकी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वच्छ परिवहन पहलों को अपनाने हेतु एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है।”
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