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EV: 2026 में नई ऊंचाई छू सकती है भारत की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री, पहली बार पार होगा 3 लाख यूनिट का आंकड़ा!

Mon, 29 Jun 2026 08:19 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत का इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल बाजार वर्ष 2026 में एक नया रिकॉर्ड बना सकता है। एक मीडिया रिपोर्ट, जिसमें मार्केट रिसर्च फर्म फ्रॉस्ट एंड सुलीवन का हवाला दिया गया है, के अनुसार इस साल पहली बार देश में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की वार्षिक बिक्री 3 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर सकती है।
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Electric Car Sales - फोटो : Amar Ujala

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश का इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (EPV) मार्केट साल 2026 में पहली बार 3 लाख सालाना बिक्री के ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट में मार्केट रिसर्च फर्म 'फ्रॉस्ट एंड सुलीवन' के हवाले से यह दावा किया गया है।

जहां साल 2025 में यह आंकड़ा 2 लाख यूनिट्स से थोड़ा ही कम रहा था, वहीं इस साल नए मॉडलों की एंट्री, बेहतर होते चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति ग्राहकों के बढ़ते भरोसे के दम पर बिक्री 3 लाख के पार निकलने की उम्मीद है। साल के पहले छह महीनों (छमाही) में ही लगभग 1.5 लाख इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री रजिस्टर हो चुकी हैं। जबकि पिछले चार महीनों से हर महीने औसतन 27,000 इलेक्ट्रिक पैसेंजर गाड़ियों का पंजीकरण हो रहा है। आने वाला त्योहारों का सीजन और नए वाहनों की लॉन्चिंग साल 2026 के दूसरे हिस्से में इस रफ्तार को और तेज कर देगी। 

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Tata Curvv.ev - फोटो : Tata Motors

नए मॉडलों की भरमार से ग्राहकों को क्या फायदा हो रहा है?

बाजार में इलेक्ट्रिक कारों के नए-नए विकल्प आना इस पूरी बढ़ोतरी की सबसे मुख्य वजह बनकर उभरा है:

  • दोगुने हुए कार मॉडल्स: रेटिंग एजेंसी 'क्रिसिल' (Crisil) के मुताबिक, भारत में पिछले दो वित्तीय वर्षों में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल मॉडलों की संख्या दोगुनी होकर लगभग 20 तक पहुंच गई है। अगले वित्तीय वर्ष तक इसके 35 से भी ऊपर निकल जाने की उम्मीद है।

  • 15 लाख से कम बजट में विकल्प: राहत की बात यह है कि आने वाले नए मॉडलों का एक बड़ा हिस्सा 15 लाख रुपये से कम के बजट वाले सेगमेंट में लॉन्च होने की उम्मीद है। इससे आम और मध्यमवर्गीय खरीदारों के लिए भी इलेक्ट्रिक कार खरीदना आसान हो जाएगा।

  • हर जरूरत के लिए उपलब्ध कार: विकल्पों का यह बड़ा दायरा ग्राहकों को उनके बजट और जरूरत के हिसाब से सही गाड़ी चुनने में मदद कर रहा है। जिससे पूरे देश में ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है। 

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Hyundai Ioniq 5 - फोटो : Hyundai

नई टेक्नोलॉजी 'रेंज की चिंता' को कैसे दूर कर रही है?

बैटरी टेक्नोलॉजी में हो रहे लगातार सुधारों ने ग्राहकों के मन से उस सबसे बड़े डर को निकाल दिया है। जिसे 'रेंज एंजाइटी' (एक बार चार्ज करने पर कम दूरी तय होने का डर) कहा जाता है:

  • सिंगल चार्ज में लंबी दूरी: आज के समय में प्रीमियम इलेक्ट्रिक गाड़ियां एक बार फुल चार्ज होने पर 500 से 700 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज दे रही हैं।

  • मिड-रेंज कारों का दमदार प्रदर्शन: वहीं मध्यम बजट वाले मॉडल भी सिंगल चार्ज में 300 से 450 किलोमीटर तक आसानी से चल जाते हैं। इसके चलते ये कारें शहर के रोजाना की आवाजाही के साथ-साथ लंबे रास्तों के सफर के लिए भी बेहद शानदार और व्यावहारिक साबित हो रही हैं। जिससे ग्राहकों का विश्वास बढ़ा है। 

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Kia Carens Clavis EV - फोटो : Kia

कार मालिकों के लिए ईवी का खर्च अब कितना आकर्षक हो गया है?

लंबी बैटरी वारंटी और कंपनियों के नए व अनोखे बिजनेस मॉडल ने इलेक्ट्रिक कार खरीदने के सौदे को ग्राहकों के लिए और भी फायदेमंद बना दिया है:

  • 8 से 10 साल की लंबी वारंटी: ज्यादातर कार निर्माता कंपनियां अब बैटरी पर 8 से 10 साल तक की लंबी वारंटी दे रही हैं। इससे ग्राहकों के मन से बैटरी के खराब होने या उसके रिप्लेसमेंट (बदलने) के भारी-भरकम खर्च की चिंता पूरी तरह खत्म हो गई है।

  • BaaS मॉडल से घटी कीमत: इसके साथ ही बाजार में आए 'बैटरी-एज-ए-सर्विस' (BaaS) मॉडल ने गाड़ियों की शुरुआती कीमत को काफी कम कर दिया है। जिससे ईवी का मालिकाना हक पाना अब ज्यादा किफायती हो गया है। क्रिसिल ने इन बदलावों को इस सेक्टर की बढ़ोतरी का एक अहम पहलू माना है।

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BYD Atto 3 - फोटो : BYD

ईंधन की बढ़ती कीमतों ने इलेक्ट्रिक कारों की मांग को कैसे बढ़ाया?

परंपरागत पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने भी आर्थिक रूप से इलेक्ट्रिक कारों के पक्ष को बहुत मजबूत कर दिया है:

  • बढ़ गया गाड़ियों को चलाने का खर्च: क्रिसिल के अनुसार, पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन के दाम बढ़े। जिससे मई महीने में इंटरनल कंबशन इंजन (ICE - पेट्रोल/डीजल) वाहनों को चलाने का खर्च 7-8 प्रतिशत तक बढ़ गया। इसने इलेक्ट्रिक वाहनों को मालिकाना हक की कुल लागत के मामले में और अधिक फायदेमंद बना दिया।

  • ग्लोबल क्रूड ऑयल की अस्थिरता: फ्रॉस्ट एंड सुलीवन का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव बना हुआ है, वह भारत के इस इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के सफर को और ज्यादा रफ्तार दे सकता है। 


    क्या है आगे का रास्ता 

    गाड़ियों के बढ़ते विकल्प, बैटरी की एडवांस तकनीक, बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ओनरशिप के नए मॉडल्स और महंगे होते पारंपरिक ईंधन- इन सभी ने मिलकर देश में ईवी के लिए एक बेहतरीन माहौल तैयार कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहली छमाही में ही 1.5 लाख का आंकड़ा छू लेने और आने वाले नए लॉन्च के दम पर साल 2026 भारतीय इलेक्ट्रिक कार बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। जो इसे एक उभरते हुए सेगमेंट से निकालकर मुख्यधारा की ऑटोमोटिव श्रेणी में खड़ा कर देगा।
     

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