भारत में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) (सीएनजी) गाड़ियों की बिक्री में तेजी देखने को मिल रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय वर्ष (FY2024-25) के आखिर तक देश में सीएनजी गाड़ियों की बिक्री 11 लाख के आंकड़े को पार कर सकती है। यह बढ़ोतरी सरकार द्वारा क्लीनर फ्यूल को बढ़ावा देने और देशभर में सीएनजी फिलिंग स्टेशन के विस्तार के कारण हो रही है।
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क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के आखिर तक भारत में सीएनजी गाड़ियों की कुल संख्या 75 लाख तक पहुंच सकती है, जो कि FY2016 में 26 लाख थी। इसका मतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या तीन गुना हो गई है। इसके अलावा, सीएनजी गाड़ियों की संख्या में 12 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज की गई है।
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CNG फिलिंग स्टेशनों की संख्या में बढ़ोतरी
इस अध्ययन में बताया गया है कि सीएनजी वाहनों की बिक्री बढ़ने का मुख्य कारण देशभर में सीएनजी फिलिंग स्टेशन का विस्तार है। वित्तीय वर्ष 2025 के आखिर तक देश में सीएनजी फिलिंग स्टेशनों की संख्या 7,400 से अधिक हो सकती है, जो कि FY2016 में मात्र 1,081 थी। पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या में सालाना 24 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है।
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CNG वाहनों के लिए बेहतर सुविधाएं
CNG फिलिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ने से फ्यूल भरवाने के लिए लगने वाली लंबी कतारों में कमी आई है, जिससे ग्राहकों के लिए यह अनुभव और बेहतर हो गया है। इसके अलावा, बाजार में अब 30 से अधिक सीएनजी पैसेंजर गाड़ियों के मॉडल उपलब्ध हैं, जबकि पहले सिर्फ गिने-चुने विकल्प ही मौजूद थे। इस वजह से भी सीएनजी गाड़ियों की लोकप्रियता बढ़ रही है।
कमर्शियल गाड़ियों में भी बढ़ी मांग
कमर्शियल गाड़ियों में भी सीएनजी का इस्तेमाल बढ़ा है क्योंकि इससे ईंधन की लागत में बचत होती है। मौजूदा समय में कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में सीएनजी की हिस्सेदारी 10-11 प्रतिशत के करीब है। वहीं, टू-व्हीलर सेगमेंट में भी अब सीएनजी के नए मॉडल आ रहे हैं। हालांकि, थ्री-व्हीलर सेगमेंट में सीएनजी की हिस्सेदारी 28-29 प्रतिशत है, लेकिन इसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।
CNG गाड़ियों की बिक्री में संभावित चुनौतियां
भले ही सीएनजी वाहनों की बिक्री में तेजी आ रही हो, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएनजी की लागत बढ़ने से इसकी कीमतों में 4-6 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी जैसे नए विकल्पों के चलते सीएनजी गाड़ियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।