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Automobile Sector: भारत को चीन की मुसीबत से फिर मिल सकता है फायदा, विदेशी ऑटो कंपनियों की नजर 'देसी' विकल्प पर

Sat, 03 May 2025 07:18 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज के दौर में जब चीन से आयातित सामानों पर बढ़ते टैक्स (टैरिफ) वैश्विक ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन को झटका दे रहे हैं, तब भारत एक मजबूत और किफायती विकल्प बनकर उभर रहा है।
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Automobile Industry - फोटो : PTI
आज के दौर में जब चीन से आयातित सामानों पर बढ़ते टैक्स (टैरिफ) वैश्विक ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन को झटका दे रहे हैं, तब भारत एक मजबूत और किफायती विकल्प बनकर उभर रहा है। दुनियाभर की बड़ी ऑटो कंपनियां अब ऐसे देशों की तलाश में हैं जहां मैन्युफैक्चरिंग सस्ती हो और राजनीतिक माहौल स्थिर। ऐसे में भारत को एक सुनहरा मौका मिल सकता है। 

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चीन पर अमेरिका का टैक्स, भारत के लिए मौका
एएआई ने नोमुरा की एक हालिया रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते ट्रेड टेंशन की वजह से अब बड़ी ऑटो कंपनियां अपने सप्लाई नेटवर्क पर दोबारा सोचने को मजबूर हो रही हैं। खासकर चीन से आने वाले ऑटो पार्ट्स पर अमेरिका में टैक्स बढ़ने से वाहन महंगे होंगे और लोगों की डिमांड थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि अब कंपनियां चीन के अलावा नए विकल्प तलाशेंगी, और भारत इसमें सबसे आगे हो सकता है। 

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Car Plant - फोटो : Freepik
भारत बन सकता है नया मैन्युफैक्चरिंग हब
साल 2023 में अमेरिका ने चीन से लगभग 11 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स मंगवाए, वहीं भारत से सिर्फ 2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। यह फर्क दिखाता है कि भारत के पास कितना बड़ा मौका है। अगर भारत इस मौके का सही इस्तेमाल करता है, तो चीन की जगह खुद को एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित कर सकता है।

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Automobile Industry - फोटो : PTI
अमेरिका में भारत पर अब भी 25% टैक्स
हालांकि अमेरिका भारत से आने वाले ऑटो पार्ट्स पर अब भी 25 प्रतिशत टैक्स लगाता है। जैसे कि वायर हार्नेस, सीट पार्ट्स, टायर्स, फ्यूल पंप, बंपर जैसी चीजों पर। लेकिन अच्छी बात यह है कि यह टैक्स स्थिर है और अचानक से इसमें बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे माहौल में जहां चीन को लेकर अमेरिका की नीतियां अस्थिर और तनावपूर्ण हैं, भारत की ये स्थिरता ऑटो कंपनियों को भरोसा दे सकती है।

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Car Plant - फोटो : Freepik
धीमी अमेरिकी अर्थव्यवस्था बना सकती है रुकावट
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर अमेरिका की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी रही, तो भारत जैसे देशों में गाड़ियों की मांग पर असर पड़ सकता है। यानी अगर लोगों की जेब ढीली रही तो गाड़ियों की बिक्री भी धीमी हो सकती है, और इसका असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी आएगा।

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Automobile Industry - फोटो : Adobe Stock
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की उम्मीद
चीन के उलट भारत अभी अमेरिका के साथ एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत कर रहा है। अमेरिका ने जिन देशों के साथ बातचीत की संभावना है, उनके लिए 90 दिन का "टैरिफ ब्रेक" दिया है, जिसे भारत अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रहा है। यह डील अगर 2025 तक फाइनल हो जाती है, तो भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

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Automobile Industry - फोटो : Adobe Stock
ट्रंप की रणनीति और भारत की सूझबूझ
यह 90 दिन की छूट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। जिससे वह चीन पर दबाव बनाए रखते हुए बाकी देशों से बातचीत का रास्ता खुला रखें। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार घाटा ज्यादा बड़ा नहीं है, इसलिए दोनों देश एक मजबूत डील तक पहुंच सकते हैं। जो आगे चलकर गहरे आर्थिक रिश्तों का रास्ता खोलेगी। 

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