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चीन अपने इन नकलची हथियारों के दम पर देता है भारत को गीदड़भभकी! जानिए इनकी असलियत

Mon, 22 Jun 2020 04:15 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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China QN-506 - फोटो : For Refernce Only
चीन ने भारत के पूर्वी लद्दाख के कई हिस्सों में कब्जा जमा रखा है। पैंगोंस त्सो, डेपसोंग, गलवां वैली, हॉट स्प्रिंग, कोयुल और फुक्शे में चीन आगे आकर बैठ गया है। वहीं डराने धमकाने का उसका पुराना प्रोपेगेंडा चालू है। तिब्बत के पठार में हाई एल्टीट्यूड एरिया में चीनी हथियारों के वीडियोज भी डालता रहता है। लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि इनमें से ज्यादातर सैन्य वाहन, हवाईजहाज और हेलीकॉप्टर्स तक नकल करके बनाए हैं। आइए जानते हैं  चीन के कुछ नकलची सैन्य वाहनों के बारे में...
 
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China Type-15 Tank - फोटो : For Refernce Only

टाइप-15 Vs British L7

चीनी सेना लंबे समय से पहाड़ों पर जंग करने के लिए हल्के टैंकों पर काम रही थी। चीनी सेना ने कुछ साल पहले ही हल्की बॉडी वाले जंगी टैंक टाइप-15 को अपनी सेना में शामिल किया है। इसे हाल ही में दक्षिण-पश्चिम तिब्बत के पठारों में भी युद्धाभ्यास के दौरान देखा गया था। लेकिन यह टैंक असल में ब्रिटिश एल7 गन जैसा दिखता है, जिसका लाइसेंस चीन को 1980 के दशक में दिया गया था। टी-15 में 1000 एचपी का डीजल इंजन लगा है। माना जा रहा है कि भारत से तनातनी को देखते हुए चीन ने यह टैंक बनाया है और आम 50 टन वाले टैंकों के मुकाबले इसका वजन मात्र 30 टन है।
 
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China QN-506 - फोटो : For Refernce Only

QN-506 Vs BMPT-72 टर्मिनेटर टैंक

रूस अपने इस टैंक पर बेहद नाज करता है। 1970 के T-72 जैसी हैवी आर्म्ड चैसिस पर बने इस टैंक में 32 एमएम की तोप लगी है, चार लेजर गाइडेड अटाका-टी एंटी टैंक मिसाइल्स और मशीन गन लगी है। इसकी 32 एमएम की तोप दुश्मन के जहाज को लगभग चार किमी पहले ही मार गिराने में सक्षम है। वहीं चीन ने किसी तरह से जुगाड़ करके रूस के इस टैंक की कापी हासिल कर ली और QN-506 तैयार कर लिया। जिसे हाल में चीनी डिफेंस ट्रेड शो में पेश किया गया था। हालांकि चीन का ये टैंक एम1 अब्राम्स या टी-80 की तरह मुख्य जंगी टैंक नहीं है, इसे कॉम्बैट सपोर्ट व्हीकल्स की तरह बनाया है।
 

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Harbin Z-20 Chinese Helicopter - फोटो : for Reference Only

अमेरिकी ब्लैकहॉक VS हार्बिन Z-20

अमेरिका की तमाम पेटेंट लेटेस्ट मिलिट्री टेक्नोलॉजी के क्लोन तैयार करने के बाद चीन ने अमेरिकी के प्रसिद्ध सीकोरस्काई यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का क्लोन तैयार किया है। चीनी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का नाम हार्बिन Z-20 है और चीनी सेना को सौंप दिया गया है। Z-20 कम-ऑक्सीजन वाले इलाके में भी उड़ान भर सकता है और इसमें एक्टिव वाइब्रेशन कंट्रोल, फ्लाई-बाई-वायर, लो नॉयज रोटर डिजाइन जैसे फीचर भी दिए गए हैं। इसमें एडवांस फ्लाई-बाई-वायर टेक्नोलॉजी भी है, कुछ ही देशों के पास है। चीनी सेना के पास यह अकेला मल्टी रोल कैपेबिलिटी वाला चॉपर है। बताते हैं कि कि पाकिस्तान ने ही चीन को इस हेलीकॉप्टर का एक्सेस दिया था। 2011 में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने जब अल-कायदा लीडर ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए रेड की थी, तब उनका एक सीकोरस्काई यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर क्रेश हो गया था।
 
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Chengdu J-10 - फोटो : For Refernce Only

Chengdu J-10 Vs  U.S. F-16

1980 के दशक में अमेरिका ने इजराइल के साथ मिल कर एक जंगी लड़ाकूविमान बनाने का कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन वित्तीय वजहों से बाद में अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए। बाद में इजराइल ने ‘लावी’ फाइटरजेट की जानकारी को चीन को बेच दिया। इस तरह चीन के हाथों अमेरिकी F-16 जानकारियां हाथ लग गईं और चीन ने J-10 फाइटरजेट त्यैर कर लिया, जिसे 2017 में चीनी सेना को सौंपा गया।
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Shenyang J-15 - फोटो : For Refernce Only

Shenyang J-15 Vs Sukhoi SU-33

चीन की एक खूबी है कि अगर वह कुछ ठान लेता है तो उसे येन केन प्रकारेण करके ही मानता है। रूस ने चीन को SU-33 कके डिजाइन सीक्रेट्स देने से मना कर दिया, तो चीन ने यूक्रेन से एसयू33 का प्रोटोटाइप खरीदा और रिवर्स इंजीनियरिंग की मदद से कैरियर बेस्ड J-15 तैयार कर लिया। चीन अपने इस फाइटरजेट को सबसे बेहतरीन होने का दावा करता है।
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Chengdu J-20 - फोटो : For Refernce Only

अमेरिकी F-22 Vs Chengdu J-20

अमेरिका की एफ-16 लड़ाकू जहाज बना वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने F-22A रैप्टर फाइटर बनाया था, जिसकी गिनती दुनिया के अत्याधुनिक लड़ाकू जहाजों में होती है। जुलाई 2014 के आखिर में चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन चेंगदू जे-20 लड़ाकू विमान का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस जहाज की डिजाइनिंग एफ-22 रैप्टर और अमेरिकी नेवी में इस्तेमाल होने वाले एफ-35 स्टाइक फाइटर प्लेन से मिलती-जुलती है। इसके बारे में कहानी है कि 27 मार्च 1999 में यूगोस्लाविया में नाटो कार्रवाई के दौरान एक अमेरिकी F-22 गिर गया था, रिवर्स इंजीनियरिंग में महारत हासिल कर चुके चीन के पास इसका मलबा पहुंच गया। जे-20 ने जनवरी 2011 में पहली उड़ान भरी थी।

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China Star Shadow - फोटो : For Refernce Only

X-47B ड्रोन Vs चीनी स्टार शेडो

चीन की कंपनी स्टार यूएवी सिस्टम ने स्टार शेडो के नाम से एक ड्रोन डेवलप किया है, जो अमेरिका के मौजूदा X-47B का क्लोन है। चीन ने पहले इस ड्रोन के फोटो और डिजाइन हासिल किया और बाद में ईरान में एक दुर्घटनाग्रस्त ड्रोन को हिसाल करके इसकी टेक्नोलॉजी भी बना ली। वहीं अमेरिका में मौजूद एक चीनी जासूस ने इस ड्रोन की स्टील्थ टेक्नोलॉजी और दस्तावजों को चीन को बेच दिया। माना जाता है इस ड्रोन का बाकी पेचीदगियां चीन ने साइबर अटैक के जरिये हासिल की।

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J-11B - फोटो : For Refernce Only

सुखोई एसयू-27 Vs J-11B

हालांकि अमेरिकी ट्रेडवॉर के चलते चीन और रूस एक दूसरे के नजदीक आ रहे हैं। बावजूद इसके रूस अपने कई हथियारों की टेक्नोलॉजी का हस्तांतरण चीन को नहीं करता है। हाल ही में भारत और चीन ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा है, लेकिन रूस ने भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि चीन के साथ ऐसा नहीं किया है। सोवियत संघ के विघटन के बाद नकदी संकट से जूझ रहे रूस ने रूसी वायुसेना के गौरव के नाम से मशहूर दो दर्जन से ज्यादा सुखोई-27 लड़ाकू जहाज चीन को बेचे थे। चीन ने रूस से मोलभाव करके 200 और जहाज बनाने का लाइसेंस हासिल कर लिया। लेकिन 100 जहाज बनाने के बाद 2004 में समझौते को तोड़ दिया। जिसके बाद चीन ने शेनयांग J-11B के नाम से अपना लड़ाकू जहाज बनाया, जो दिखने में एस-27 जैसा था। वहीं चीन ने SU-33 तर्ज पर शेनयांग J-15 फ्लाइंग शार्क भी बना लिया है।
 
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China Type 726A Hovercraft - फोटो : For Refernce Only

अमेरिकी लैंडिंग क्राफ्ट एयर कुशन

अमेरिकी नौसेना परिवहन के लिए लैंडिंग क्राफ्ट एयर कुशन पर बहुत निर्भर करती है। इसे अमेरिकी नेवी का होवरक्राफ्ट भी कहा जाता है। वहीं चीन ने इस होवरक्राफ्ट की नकल करके Type 726A के नाम से अपना होवरक्राफ्ट तैयार किया है। इस होवरक्राफ्ट से गोलियों से लेकर टैंक तक ट्रांसपोर्ट किये जा सकते हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक यह होवरक्राफ्ट 60 टन तक का वजन ढो सकते हैं। चीन ने इस होवरक्राफ्ट का प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया है। इसे चीन के शंघाई स्थित एक शिपयार्ड में बनाया जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि यह जमीन और पानी दोनों जगह चल सकता है।
 
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