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कार से जुड़ी इन 6 बातों की आधी-अधूरी जानकारी से रहें सावधान, 10 में से 8 लोग देते हैं गलत जवाब

Wed, 02 Dec 2020 11:31 AM IST
श्रीधर मिश्रा ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Rolls Royce Cullinan Pop-Out Rear Seats - फोटो : For Refernce Only
आज हम आपको कार से जुड़े उन 6 फीचर्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें लोगों ने सुना तो होता है, लेकिन उन्हें इनके बारे में ठीक से पता नहीं होता है। जबकि, खास बात यह है कि इनमें से कई फीचर्स तो ऐसे हैं, जिनके बगैर कोई भी गाड़ी बेकार है। ऐसे में इन फीचर्स की आधी-अधूरी जानकारी रहना मतलब यह है कि आपको अपनी कार की क्षमता के बारे में ठीक से नहीं पता है। आज हम आपको कार के इन 6 फीचर्स के बारे में आसान भाषा में समझाएंगे, जिसके बाद आप कभी भी इनकी खासियतों के बारे में नहीं भूलेंगे। तो डालते हैं एक नजर...
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कैप्टन सीट

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SUV third row Seats - फोटो : For Refernce Only
कैप्टन सीट को अगर आसान भाषा में समझें, तो पुराने जमाने में बरामदे में रखी कुर्सी आपको याद है, जिसपर घर के बुजुर्ग आराम से बैठ कर अखबार पढ़ा करते थे। वैसे ही कार की कैप्टन सीट होती है, जिस पर केवल एक आदमी बैठ सकता है। कैप्टन सीट में हाथ रखने के लिए आर्म रेस्ट, सिर रखने के लिए हेड रेस्ट, पीठ को आराम देने के लिए ऊंचा बैकरेस्ट और जांघ को सपोर्ट देने के लिए अलग से एक्ट्रा कम्फर्ट होता है, जो घोड़े पर लगी काठी जैसा दिखता है। गाड़ी की कैप्टन सीट फोल्डेबल होती है, जो आधी या पूरी फोल्ड हो सकती है। कैप्टन सीट ज्यादातर एसयूवी गाड़ियों में होती है।
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टॉर्क

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सांकेतिक - फोटो : Unsplash
टॉक को हम रोटेशनल फोर्स या ट्विस्टिंग फोर्स भी कहते हैं। आसान भाषा में समझें, तो अगर आपको एक बोल्ट को रिन्च से खोलना है, तो बोल्ट को घुमाने के लिए रिन्च पर जो ताकत लगती है उसे हम टॉर्क कहते हैं। सीधा सा मतलब समझिए, जिस गाड़ी में टॉर्क ज्यादा होगा उसका पिकअप भी ज्यादा होगा। उदाहरण के लिए रॉयल एनफील्ड की बाइक को एक्सीलेटर देते समय जो झटका आपको लगता है, उसे हम टॉर्क कहते हैं।

एबीएस

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Mercedes-Benz EQC Electric Car - फोटो : Mercedes
यह एक नई तकनीक है, जो सेंसर्स पर काम करती है। ये सेंसर्स गाड़ी के पहियों में लगे होते हैं। जब आप अचानक से ब्रेक लगाते हैं, तो एबीएस एक्टिवेट हो जाता है। इसके बाद यह जरूरत के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा करके ब्रेक लगाता है, जिससे पहिया जाम न हो। इससे गाड़ी फिसलती नहीं है और हादसा नहीं होता है। 
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ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन

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CVT transmission - फोटो : सांकेतिक
ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सबसे पुराना और भरोसेमंद ट्रांसमिशन है, जो महंगी गाड़ियों में मिलता है। इसे पारंपरिक रूप से टॉर्क कनवर्टर या ट्रेडिशनल टॉर्क भी कहते हैं। यह हाईड्रॉलिक की मदद से अपने आप काम करता है। यानी, जैसे-जैसे गाड़ी की रफ्तार बढ़ती है वैसे-वैसे यह गियर को बदलते रहता है। ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन कई प्रकार के होते हैं। इनमें AMT, CVT, DCT, DSG और अब iMT भी शामिल हैं।
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पावर

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BMW 2020 3 Series GT Shadow Edition - फोटो : BMW
एक जगह से दूसरी जगह तक कोई भी कार कितनी तेजी से पहुंच सकती है इसे आप पावर कह सकते हैं। अब यहां टॉर्क और पावर में अंतर समझना जरूरी है। इसे उदाहरण के रूप में समझते हैं। 
  • टॉर्क- मान लीजिए प्वाइंट A से प्वाइंट B तक की दूरी 2 किलोमीटर है। इस दूरी को कोई भी कार धीमी रफ्तार में टॉर्क की मदद से तय कर सकती है। यानी बिना टॉर्क के गाड़ी चल ही नहीं सकती है।
  • फोर्स-  प्वाइंट A से प्वाइंट B तक की दूरी कितनी जल्दी तय करना है यह कार की पावर पर निर्भर करता है। आसान भाषा में समझें तो जिस कार का पावर ज्यादा होगा वह 2 किलोमीटर की दूरी को तेजी से तय करेगी। 

 
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आरपीएम

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Low RPM
आरपीएम को रोटेशन पर मिनट कहते हैं। आसान भाषा में समझें तो इंजन के अंदर एक पार्ट होता है, जिसे हम क्रैंक शाफ्ट कहते हैं। यह क्रैंक शाफ्ट एक मिनट में जितनी बार घुमता है और उसकी वजह से जो पिस्टन ऊपर नीचे जाता है उसको आरपीएम कहते हैं।
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