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आखिर क्यों नहीं खरीद रहे लोग नई कारें, आप भी जान लीजिए ये हैं 5 बड़ी वजह

Tue, 14 May 2019 08:44 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Car Safety

अप्रैल में कारों की बिक्री घटने से पूरी ऑटो इंडस्ट्री सदमे में है। पिछले तीन महीनों से कारों और एसयूवी की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अप्रैल 2019 में 160,279 यात्री वाहनों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल अप्रैल 2018 में 200,183 वाहनों की बिक्री हुई थी। वहीं अब इस स्लोडाउन के बाद इसकी वजह को पहचाना जा रहा है। हम बता रहे हैं वे 5 कारण जिनकी वजह से घटी है बिक्री...

 

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बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें

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Crude Oil

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। इस साल में ही अब तक 34 प्रतिशत कर कीमतें बढ़ चुकी हैं। इन दिनों कच्चे तेल की कीमतें 72 डॉलर के आसपास टिकी हुई हैं, जबकि इस साल जनवरी 2019 में ये कीमतें 59 डॉलर थीं। हालांकि आम चुनावों के चलते पिछले कुछ हफ्तों से तेल की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन ग्राहकों को डर है कि चुनाव खत्म होतते ही तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी और उन्हें अपने फैसले के लिए पछताना पड़ सकता है।     

 

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चुनावों की वजह से राजनीतिक अनिश्चितता

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Parliament

वाहनों की बिक्री घटने के पीछे इसे भी मुख्य वजह माना जा रहा है। लेकिन राजनीतिक अनिश्चितता के चलते भी ग्राहक घबरा रहे हैं। उन्हें डर है कि नई सरकार नीतियों में बदलाव कर सकती है। वहीं ब्याज दरों के लेकर अनिश्चितता है, साथ ही उन्हें डर है कि चुनाव पश्चात क्या जीएसटी की दरों में बदलाव हो सकता है। वहीं कृषि नीतियों और मानसून की भविष्यवाणी अनिश्चितता भी ग्राहकों को फैसला लेने से रोक रही है।

 

नए सेफ्टी ऩॉर्म्स

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Mahindra Scorpio Global NCAP crash test

अप्रैल 2019 से भारतीय वाहनों के लिए नए सेफ्टी नियम लागू हो चुके हैं, जिनमें चरणों में लागू किया जा रहा है। देश में बिकने वाली सभी नई कारें एबीएस और एयरबैग्स के साथ बिकेंगी। जुलाई 2019 से कारों में सीट बेल्ट वार्निंग, स्पीड वार्निंग और रिवर्स पार्किंग सेंसर्स लगाना जरूरी होगा। वहीं अक्टूबर, 2019 से सभी नई कारों को भारत एनसीएपी क्रेश टेस्ट के मानकों के मुताबिक बनाना होगा। जिसके चलते कई कार कंपनियां अपने मॉडल्स को नए स्टैंडर्ड के मुताबिक ढालने की तैयारी कर रही हैं। साथ ही, अप्रैल 2020 से सभी इंजन बीएस-6 स्टैंडर्ड वाले होंगे। जिसके चलते कई खरीदारों ने नई कार लेने का फैसला टाल दिया है। ग्राहकों को नए मॉडल के लांच होने का इंतजार है।

 

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महंगा होता इंश्योरेंस

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Bike insurance

ऑटोमोबाइल इंश्योंरेस नियमों में पिछले साल ही बदलाव किए गए थे। सितंबर 2018 में अदालत के आदेश के बाद सभी बीमा कंपनियों को नई कारों पर थर्ड पार्टी कवर देना जरूरी हो गया है। वहीं नए दो पहियों वाहनों पर भी पांच साल के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस देना होगा। भले ही कॉम्प्रैहेंसिव इंश्योरेस एक साल, 3 या पांच साल के लिए ले सकते हैं, लेकिन थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है। जिससे कारों की ऑन-रोड कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे ग्राहक भी नई कार लेने में हिचक रहे हैं।

 

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डीजल वाहनों की मांग में कमी

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पेट्रोल-डीजल

हाल ही में महिन्द्रा और ह्यूंदै ने खुलासा किया था कि उनकी पेट्रोल गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। महिन्द्रा की सब-कॉम्पैक्ट एक्सयूवी300 के पेट्रोल वेरियंट को ग्राहक खूब खरीद रहे हैं, जबकि ह्यूंदै क्रेटा की 40 प्रतिशत बिक्री पेट्रोल वेरियंट की है। वहीं नए बीएस-6 मानक आने के बाद डीजल कारों की कीमतों में पेट्रोल कारों के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। जिसके चलते डीजल से लोगों को रुझान खत्म हो रहा है।

वहीं पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये का अंतर ही रह गया है, जिससे लोग डीजल कारें पसंद नहीं कर रहे हैं। 2012 के मुकाबले डीजल कारों का मार्केट शेयर 50 प्रतिशत से गिर कर 22 प्रतिशत ही रह गया है। वहीं टियर-2 और टियर-3 शहरों में परिवहन सुविधा बढ़ रही है और शेयर्ड मोबिलिटी सस्ती और सुचारु हो गई है, जिससे मांग में कमी आई है।

 

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