राज्य के मुख्य सचिव आरके तिवारी द्वारा जारी एक आदेश में, सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम 'कोविड-19 और मलेरिया, एन्सेफलाइटिस, डेंगू और काला-अजार जैसी संचारी (फैलने वाले) रोगों के प्रसार को रोकने के लिए है।'
वाहन चलाने संबंधी नियम की बात करें तो ताजा लॉकडाउन में भी यह पहले के लॉकडाउन से अलग नहीं होंगे। वायरस के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ने के लिए बाहर निकलने पर बड़े स्तर पर प्रतिबंध रहेगा।
राज्य सरकार के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आवश्यक सेवाओं, कोरोना वारियर्स, सैनेटाइजेशन और डोर-स्टेप डिलीवरी स्टाफ में काम करने वालों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। माल वाहक वाहनों को भी प्रतिबंधित नहीं किया जाएगा।
आदेश में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग खुले रहेंगे और साथ ही इन राजमार्गों पर पेट्रोल पंप भी चालू रहेंगे। राज्य की सीमाएं, खास तौर पर नोएडा और दिल्ली के बीच निगरानी बढ़ जाने की संभावना है। कोविड-19 प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले और आवश्यक सेवाओं में शामिल नहीं रहने वाले वाहनों पर कानून लागू करने वाली एजेंसियां कार्रवाई करेंगी।
कोविड-19 के अन्य नियम, जैसे यात्रा करते समय मास्क पहनना या गाड़ी के अंदर कई लोगों की संख्या पहले जैसे ही रहेगी। हालांकि, जो वाहन आवश्यक सेवाओं का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें रोक दिया जाएगा और कोविड-19 की पाबंदियों को तोड़ने के लिए दंडित किया जाएगा। सीमा पार करने के लिए यूपी के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए ई-पास की जरूरत होगी।
राज्य में, खासकर पश्चिमी जिलों, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में वाहनों द्वारा लॉकडाउन के नियमों का बहुत ज्यादा उल्लंघन किया गया है। अकेले बुधवार को कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 690 वाहनों के मालिकों को दंडित किया गया।
23 मार्च को लॉकडाउन के पहला चरण को लागू करने के बाद से यूपी के गौतम बौद्ध नगर में 8,300 को हिरासत में लिया गया, एक लाख से अधिक वाहनों के चालान काटे गए और 2,000 से अधिक वाहनों को जब्त किया गया।
गुरुवार तक, उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में 1,248 नए कोविड-19 के पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए। इस समय 10,373 सक्रिय मामले हैं, 21,127 लोग डिस्चार्ज हो चुके हैं और 862 मरीजों की संक्रमण की वजह से मौत हो गई है।