'कैदी को हथकड़ी लगाने से है छूट का प्रावधान'
कोर्ट ने कहा था कि मजिस्ट्रेट मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हथकड़ी लगाने की अनुमति दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, स्पष्ट रूप से किसी कैदी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के मामले में उसे हथकड़ी लगाने से छूट देने का प्रावधान है। कोर्ट ने कहा था कि कुछ अपवादों को छोड़ कर पुलिस महानिरीक्षक, जेल महानिरीक्षक और कैदी के साथ मौजूद कांस्टेबल को इस नियम का पालन करना चाहिए।
'कैदी को भागने से रोकने के हैं कई तरीके'
वहीं, प्रेम शंकर शुक्ला बनाम दिल्ली प्रशासन मामले में साल 1980 में सुप्रीम कोर्ट ने कैदी को हथकड़ी लगाने को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसे कई और तरीके हैं जिन्हें अपनाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि व्यक्ति भाग न पाए और उसे अपनी गिरफ्त में रखा जा सकता है। अदालत ने कहा था कि हथकड़ी लगाना प्रथम दृष्या, अमानवीय, अनावश्यक, कठोर और मनमाना तरीका है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनुच्छेद 14 (कानून से पहले समानता) और 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन भी बताया है।