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गाड़ियों के कलपुर्जे बनाना छोड़ना चाहती हैं ऑटोमोबाइल कंपनियां, जाना चाहती हैं इस बिजनेस में

Tue, 25 Aug 2020 04:28 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Tata WhAP Combat Wheeled Kestrel - फोटो : Tata Motors (For Reference Only)
मौजूदा समय में सुस्त कारोबार के मद्देनजर, कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी लगातार घट रही कमाई को थामने के लिए कथित तौर पर भारत के रक्षा क्षेत्र में संभावनाएं तलाश रही हैं। और ऐसे समय में जब भारत सरकार देश के रक्षा क्षेत्र के लिए स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने की वकालत कर रही है, यह इस तरह की कंपनियों के लिए सबसे मुफीद समय साबित हो सकता है। 
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Mahindra Armored Light Specialist vehicle - फोटो : Mahindra (For Reference Only)
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक Force Motors (फोर्स मोटर्स), Bharat Forge (भारत फोर्ज), Automotive Axles (ऑटोमोटिव एक्सल) और Ashok Leyland (अशोक लीलैंड) जैसी कंपनियां भारत के रक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक और सीईओ विपिन सोंधी ने कहा है कि, "कई स्वदेशी विकास होंगे, जो सैन्य-तंत्र उद्योग को बढ़ावा देंगे।" उन्होंने कहा, "अब, प्रतिबंधित वस्तुओं पर स्पष्टता के साथ, उद्योग अपने पेश किए जाने वाले उत्पादों को मजबूत करने पर काम करेगा।" 
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Force Motors Light Strike Vehicles - फोटो : Team-BHP (For Reference Only)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महीने की शुरुआत में 9 अगस्त को घोषणा की थी कि 101 वस्तुओं के आयात पर रोक लगाई जाएगी। इनमें से 69 वस्तुओं पर दिसंबर 2020 तक रोक है जबकि बाकी पर दिसंबर 2025 तक रोक लगी है। इसका मतलब है कि स्थानीय कंपनियों के पास अब इस समय आगे बढ़ाने और इस अवसर का फायदा उठाने का भरपूर मौका है। सोंधी ने कहा, "यह आपूर्तिकर्ताओं को विकास और वृद्धि में वाहन निर्माताओं के साथ भाग लेने का अवसर भी प्रदान करेगा।" 

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Mahindra Armored Light Specialist vehicle - फोटो : Mahindra (For Reference Only)
हालांकि कई भारतीय कंपनियों की देश के रक्षा क्षेत्र में उपस्थिति रही है, लेकिन अब उस हिस्सेदारी में कई गुना बढ़ोतरी होने की संभावना है। सरकार की 'आत्मानिर्भर भारत' योजनाओं के हिस्से के रूप में, भारत की रक्षा जरूरतों के लिए स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को विजन का एक मुख्य हिस्सा बनाना होगा। 
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Tata WhAP - फोटो : Indian Army/DRDO (For Reference Only)
भारत दुनिया में रक्षा उपकरणों के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। जबकि रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है, हाल के दिनों में भारत को निर्यात करने वाले देशों में अमेरिका और इस्रायल भी शामिल हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रक्षा सेवाओं ने अप्रैल 2015 और अगस्त 2020 के बीच लगभग 3.5 ट्रिलियन रुपये (35 खरब रुपये) मूल्य की वस्तुओं का अनुबंध किया था, जिन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 4 ट्रिलियन रुपये (40 खरब रुपये) मूल्य के आदेश अब घरेलू उद्योग को अगले कुछ वर्षों को दौरान दिए जाएंगे। जिसका मतलब यह भी है कि भारतीय ऑटो और ऑटो उपकरण क्षेत्र के पास बड़ा हासिल करने का समय आ गया है। 
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