सड़क पर होने वाली अधिकतर दुर्घटनाओं में गलती ड्राइवरों की देखी गई है। अगर आप सही तरीके से ड्राइविंग नहीं करते हैं तो आप खुद के साथ दूसरों को भी मुश्किल में डाल देते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप ड्राइविंग की बारीकियों को पहले सीखें इसके बाद ही गाड़ी को सड़क पर उतारें। अगर आप ऐसा करेंगे तो खुद के साथ और बहुत से लोग अपने घर सही सलामत पहुंच पाएंगे। सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए आज के समय में कई कार निर्माता कंपनियां अपने ड्राइविंग प्रशिक्षण स्कूल भी चला रही हैं। ये ड्राइविंग स्कूल उस पद्धति पर काम कर रही हैं जिससे ड्राइविंग सीखना बेहद आसान हो गया है। अगर आप एक परफेक्ट ड्राइवर बनना चाहते हैं तो ये टिप्स आपके बहुत काम आएगी।
विज्ञापन
2 of 7
सिमुलेटर
सिमुलेटर से करें शुरू
इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि कंपनी सड़क पर ड्राइविंग सिखाने से पहले प्रशिक्षुओं को एडवांस ड्राइविंग ट्रेनिंग सिमुलेटर से रूबरू करवाती हैं इसके तहत प्रशिक्षु सड़क पर गाड़ी के संतुलन, दूसरी गाड़ी से दूरी, मोड़ों पर गति सीमा, ओवरटेकिंग के दौरान आत्मविश्वास, ब्रेक लगाना आदि जरूरी चीजों को सिमुलेटर पर ही सीख लेते हैं। इसके बाद जब वो सड़क पर जाते हैं तब उन्हें यह पता होता है कि ड्राइविंग की बेसिक जरूरतें क्या हैं। और यही खासियत होती है एक अच्छे ड्राइविंग स्कूल की।
विज्ञापन
3 of 7
सिमुलेटर
सिमुलेटर के बारे में
सिमुलेटर वीडियो गेम की तरह होता है इसमें एक केबिन, स्टीयरिंग एवं थ्रीडी स्क्रीन पर दिखने वाली सड़कें होती हैं पूरी दुनिया में प्रशिक्षण के लिए एडवांस सिमुलेटर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए एक सुरक्षित केबिन में बैठकर प्रशिक्षु ड्राइविंग की कठिन परिस्थितियों को समझते हुए ड्राइविंग की स्किल हासिल करता है। भारत में यह तकनीकि भी लगभग नई है जिसमें एक केबिन में लगभग सभी कंट्रोल जैसे कि स्टीयरिंग, गियर, क्लच, ब्रेक आदि कई स्क्रीन के साथ दिए गए हैं। इसमें वास्तविक ड्राइविंग परिस्थिति प्रशिक्षु के सामने आती रहती है। ऐसी परिस्थितियों की संरचना के लिए सिमुलेटर में कंप्यूटर साफटवेयर का प्रयोग किया जाता है। इसमें प्रशिक्षु के पास ड्राइविंग वातावरण जैसे कि शहरी सड़क या हाईवे आदि चुनने का विकल्प होता है। इस प्रशिक्षण के जरिए प्रशिक्षु को सड़क पर प्रशिक्षण प्रारंभ करने से पहले सभी बुनियादी चीजों का ज्ञान हो जाता है। आजकल यह पद्वति ड्राइविंग सीखने वालों में काफी लोकप्रिय हो रही है।
4 of 7
क्लासरूम ट्रेनिंग
बारीकी जानकारी
ड्राइविंग कार्यक्रम के तहत कार कंपनियों द्वारा संचालित ड्राइविंग स्कूलों द्वारा ड्राइविंग स्किल, खतरे का बोध,यातायात सुरक्षा, आपातकालीन हैंडलिंग परिस्थिति, ईंधन बचाने के तरीके, वाहन का बुनियादी रखरखाव,प्राथमिक चिकित्सा सुविधा प्रबंधन और ड्राइविंग के दौरान निर्णय लेने की कला का प्रशिक्षण दिया जाता है।
विज्ञापन
5 of 7
वीडियो प्रशिक्षण
वीडियो ट्रेनिंग
इसके जरिए ड्राइविंग स्कूल प्रशिक्षुओं को वीडियो फुटेज दिखाकर ड्राइविंग नियमों सुरक्षित ड्राइविंग का अभ्यास और क्या करें और क्या न करें आदि की ट्रेनिंग देते हैं।
कैसी कारें की जाती हैं ट्रेनिंग के लिए प्रयोग ड्राइविंग स्कूल एसी कारों का प्रयोग करते हैं जिसमें प्रशिक्षु और प्रशिक्षक दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर दोहरे क्लच लगाए गए होते हैं। प्रशिक्षु अपनी इच्छा व आवश्यकतानुसार सेडान या फिर हैचबैक कार को प्रशिक्षण के लिए सेलेक्ट कर सकता है।
विज्ञापन
6 of 7
कोन्स के बीच ड्राइविंग
कठिन रास्ते
प्रशिक्षण को दौरान प्रशिक्षु को हरसंभव कठिन रास्तों पर ले जाया जाता है जिससे चालक की ड्राइविंग योग्यता निखरकर सामने आए। इसमें योजनाबद्व तरीके से संकरी जगह, कठिन मोड़, रिवर्स पार्किंग, भारी यातायात व हाईवे आदि को शामिल किया जाता है।
प्रशिक्षण सार्टीफिकेट
प्रशिक्षु ने अच्छी तरह से ड्राइविंग सीख ली है यह सुनिश्चित करने के लिए ड्राइविंग स्कूल प्रशिक्षु की प्रगति के आधार पर एक रिपोर्ट बनाते हैं। यह रिपोर्ट कार्ड हर प्रशिक्षण ड्राइविंग के बाद भरा जाता है। इस पद्वति से ड्राइविंग सीखने के बाद ड्राइवर को एक परिपक्व ड्राइविंग की योग्यता मिल जाती है।