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1965 युद्ध: अब्दुल हमीद ने एक 'जीप' से उड़ा दिए थे पाकिस्तान के 7 टैंक, अमेरिका भी हो गया था भौचक्का

Sat, 15 Aug 2020 10:24 AM IST
श्रीधर मिश्रा ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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अब्दुल हमीद - फोटो : Amar Ujala
देश भर में आज 74वां स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day 2020) मनाया जा रहा है। अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुए देश को 73 साल पूरे हो गए। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे हीरो के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने केवल अपनी एक जीप से पाकिस्तान के 7 खतरनाक टैंकों के परखच्चे उड़ा दिए थे। जी हां, सही पढ़ा आपने। एक नहीं सात टैंक, वो भी एक जीप से। यह कारनामा करने वाला कोई और नहीं बल्कि, परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद मसऊदी (अब्दुल हमीद) थे। अब्दुल हमीद (Abdul Hamid) के शौर्य और साहस ने पाकिस्तान की सेना में खलबली मचा दी थी। ये उनके पराक्रम का नतीजा था, जिसने भारतीय सेना के अंदर जान फूंक दी थी और 1965 की जंग में भारत ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी।

 
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पैटन टैंक को ध्वस्त करने के बाद जश्न मनाते भारतीय सैनिक - फोटो : u/Bernard_Woolley

ऑपरेशन जिब्राल्टर 


साल 1965 की बात है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' की शुरुआत की थी। पाकिस्तान का मकसद साफ था कि भारत को दो मोर्चों पर घेरना है। इस ऑपरेशन के तहत जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों की घुसपैठ करानी शुरू कर दी और भारत को दूसरे मोर्चों पर घेरना शुरू कर दिया। इस दौरान भारत को खुफिया जानकारी मिली कि पाकिस्तान कश्मीर पर कब्जा करना चाहता है और इसके लिए उसने अपने 30 हजार जवानों को गुरिल्ला वार का ट्रेनिंग दी है। 
 
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अब्दुल हमीद की जीप और पाकिस्तान की पैटन टैंक - फोटो : Social Media

पैटन टैंकों से पाकिस्तान का हमला शुरू


पाकिस्तान ने 8 सितंबर 1965 को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था। पाकिस्तानी सेना ने खेमकरण सेक्टर के उसल उताड़ गांव पर हमला कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने भारत के खिलाफ अमेरिकन पैटन टैंकों को उतारा था। उस दौरान इन टैंकों को अपराजेय माना जाता था। इसके जवाब में भारतीय जवानों के पास केवल थ्री नॉट थ्री रायफल और एलएमजी के साथ गन माउनटेड जीप थी।

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अब्दुल हमीद की जीप और पाकिस्तान की पैटन टैंक - फोटो : Social Media

वीर अब्दुल हमीद का शौर्य


जानकारियों के मुताबिक 8 सितंबर 1965 की सुबह अब्दुल हमीद की जीप चीमा गांव के बाहर गन्ने के खेतों से गुजर रही थी। जीप में अब्दुल हमीद ड्राइवर के बगल में बैठे थे। इस दौरान उन्हें दूर से आती टैंकों की आवाज सुनाई दी। कुछ देर बाद उन्हें टैंक भी दिखाई देने लगे। वीर अब्दुल हमीद ने तुरंत अपनी पोजिशन ली और अपनी रिकॉयलेस गन को टैंकों की तरफ सेट कर दिया। अब बस इंतजार था गन की रेंज में टैंकों के आने का। कुछ देर बाद जैसे ही रेंज में पाकिस्तानी टैंक आईं वैसे ही वीर अब्दुल हमीद की गन माउनटेड आरसीएल जीप ने आग उगलना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पाकिस्तान के सात टैंकों के परखच्चे उड़ गए। वीर अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान की आर्टिलरी को धवस्त कर दिया था।
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वीर अब्दुल हमीद की प्रतीमा - फोटो : Social Media

एक शहादत से हार गया पाकिस्तान


गन्ने के खेत में पोजिशन लेने का अब्दुल हमीद को शुरुआती फायदा तो हुआ, लेकिन यह केवल कुछ समय के लिए था। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से अब्दुल हमीद की गाड़ी पर जबरदस्त हमला शुरू हुआ। इस हमले में उनकी जीप पर सवार ड्राइवर की शहादत हो गई। लेकिन हमीद ने हिम्मत नहीं हारी। वे लगातार लड़ते रहे और अपनी पोजीशन बदलते रहे। अब्दुल हमीद हमले से काफी घायल हो चुके थे और लगातार लड़ने के कारण थकने भी लगे थे। लेकिन उन्होंने लड़ाई जारी रखी। इस बीच पाकिस्तानी टैंकों ने उनकी तरफ निशाना साधा और एक हमले में वीर अब्दुल हमीद की जीप के भी परखच्चे उड़ गए।
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अब्दुल हमीद की RCL Jeep के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Social Media

पाकिस्तान पस्त, अमेरिका हैरान


वीर अब्दुल हमीद की गन माउनटेड जीप द्वारा पैटन टैंकों को धवस्त करने की खबर ने दुनियाभर को हिला कर रख दिया था। यह घटना किसी अजूबे से कम नहीं थी। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तान के पैटन टैंकों की दोबारा समीक्षा की थी। 
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परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद मसऊदी - फोटो : Social Media

परमवीर च्रक से शहादत को सलाम


अब्दुल हमीद 4 ग्रेनेडियर के सिपाही थे। 1965 की जंग में वीर अब्दुल हमीद ने अपने प्राणों की आहुती दे दी। उनके इस अदम्य साहस और वीरता के लिए उन्हें 16 सितंबर 1965 को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र दिया गया।  
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