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ट्रंप के काफिले की इन कारों से थर्राते हैं आतंकी, लेकिन भारत में हो चुकी हैं फेल!

Tue, 25 Feb 2020 09:12 AM IST
श्रीधर मिश्रा ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Donald Trump Car Convoy - फोटो : Social Media
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप (Melania Trump), बेटी इवांका ट्रंप (Ivanka Trump) और दामाद जेरेड कुशनर (Jared Kushner) के साथ दो दिवसीय दौरे पर भारत आए हैं। इस दौरे में ट्रंप के साथ उनका हवाई जहाज और कार भी सुर्खियों में है। उनके काफिले में ज्यादातर कारें Chevrolet दिखीं। आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति मर्सडीज या BMW की बजाय Chevrolet क्यों पसंद करते हैं। आइए जानते हैं...
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PM Narendra Modi and US President Donald Trump - फोटो : Social Media

General Motors का ब्रांड है शेवरले

General Motors अमेरिका की सबसे बड़ी कार कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति की कार Cadillac One 'BEAST' को खुद जनरल मोटर्स बनाती है। General Motors के बड़े ब्रांड्स में CHEVROLET, BUICK, GMC, CADILLAC, HOLDEN, BAOJUN, WULING शामिल हैं। 
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Donald Trump Chevrolet Car - फोटो : Social Media

जवाबी हमले के लिए होती हैं Chevrolet की कारें

अमेरिकी राष्ट्रपति के काफिले में Chevrolet की कारों का इस्तेमाल जवाबी हमले के लिए होता है। अहमदाबाद में भी ट्रंप के काफिले में Chevrolet की कारें दिखाई दीं। सुरक्षा एजेंसियां इन कारों को Hawkeye नाम से बुलाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में Chevrolet की कस्टमाइज SUVs एक अहम हिस्सा हैं। यह गाड़ियां हमले के लिए बनाई जाती हैं। यानी अगर काफिले पर किसी भी तरह का हमला होता है, तो ये कारें अपने दुशमनों को चुटकियों में मौत के घाट उतार देंगी। 

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Chevrolet Cars in Donald Trump's Convoy - फोटो : Social Media

Chevrolet की कस्टमाइज SUV से होती है नजर

शेवरले का उपनाम शेवी भी है। शेवरले मोटर कार कंपनी को लुईस शेवरले और जनरल मोटर्स के फाउंडर विलियम सी डुरंट ने नवंबर 1911 में बनाया था। जिसका 1918 में जनरल मोटर्स ने अधिग्रहण कर लिया था। लुईस रेसिंग कार ड्राइवर थे और डुरंट एक निवेशक। 2005 में  शेवरले को यूरोप में फिर से रीलॉन्च किया गया। आज शेवरले दुनियाभर में कार, एसयूवी के अलावा कॉमर्शियल ट्रक बनाती है। शेवरले असल में फ्रेंच में रहने वाले एक समुदाय का नाम है, जो भेड़ों को पालते थे।
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Donald Trump Car Convoy - फोटो : Social Media

साल 2003 में पहली बार हुई Chevrolet की एंट्री

वहीं भारतीय बाजार में Chevrolet जनरल मोटर्स की साल 2003 में एंट्री हुई थी। जहां हिंदुस्तान मोटर्स के साथ उन्होंने कारें बनाना शुरू किया। उन्होंने ओपेल एस्ट्रा, ओपेल कोर्सा और ओपेल वेक्ट्रा जैसी शानदार सेडान कारें बनाईं। कंपनी ने हलोल और तालेगांव में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई। कंपनी जल्द ही देश की नामीगिरामी कंपनी बन गई। कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी कई हैचबैक, सिडान और एसयूवी को लॉन्च किया। भारतीय बाजार में कंपनी ने Chevrolet Beat, Spark, Sail हैचबैक, Sail सिडान, Tavera, Cruze और Trailblazer जैसी कारों को उतारा था। हालांकि, भारतीय बाजार में Chevrolet का जलवा नहीं चला।
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Chevrolet Captiva

भारत में क्यों Chevrolet को नही मिली कामयाबी?

कंपनी ने मात्र 14 साल बाद ही 2017 में भारत को अलविदा कहने का एलान कर दिया। अमेरिका में तहलका मचाने वाली Chevrolet को भारतीय बाजार में कामयाबी नहीं मिली। इसके पीछे माना जाता है कि Chevrolet भारतीय बाजार को ठीक से समझ नहीं पाई, वहीं कंपनी का मैनेजमेंट भी इसके लिए जिम्मेदार रहा। माना जाता है भारत में रहने के दौरान कंपनी ने नौ सीईओ बदले। जबकि मारुति ने 35 सालों में मात्र पांच सीईओ ही बदले। वहीं दूसरी वजह ये मानी जाती है कि इसकी कारें अमेरिकी माहौल को ज्यादा बेहतर सपोर्ट करती थीं। वहीं, भारतीय सड़क एवं पर्यावरण के मुताबिक यह कार ग्राहकों को कुछ ज्यादा खास पसंद नहीं आई। जनरल मोटर्स ने जनवरी 2018 में फैसला लिया कि वो Chevrolet ब्रांड के ऑपरेशन्स को भारत में बंद करेगी।
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