अस्तित्व में आने से पहले गाड़ियों को कई कठिन टेस्टिंग परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। आइए आपको कुछ ऐसी ही टेस्टिंग प्रक्रियाओं के एबीसीडी से रूबरू करवाते हैं जिन्हें कंपनियां फॉलो करती हैं। साथ ही बहुत से ऑटो इंथ्यूजियास्ट खुद से गाड़ियों की टेस्टिंग करते हैं। एक गाड़ी अच्छी तब कही जाती है जब वह सभी परीक्षण में सफल होती है।
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0 से 100 किमीप्रघं
0 से 100
जब कोई गाड़ी लांच होती है तो कंपनी इस आंकड़े को मीडिया के सामने जरूर रखती है। इसका मतलब है कि गाड़ी अपनी खड़ी स्थिति से 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति पकड़ने में जितना समय लगता है उसे 0 से 100 के तहत गिना जाता है। इस परीक्षण को हमेशा एक खुली सड़क या फिर रेस ट्रैक के स्ट्रेट पर किया जाता है। इस टेस्टिंग में ड्राइवर गाड़ी को तेज शिफटिंग के साथ पूरे एक्सीलरेटर को पूरा एक्सप्लोर करके तब रखता है जब तक 0 से 100 किमीप्रघं की गति तक स्पीडो मीटर की सूई नहीं पहुंच जाती। बहुत से लोग यह टेस्टिंग वी बॉक्स पर करते हैं।
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100 से 0 किमीप्रघं
100 से 0
100 से 0 का मतलब ये है कि गाड़ी कितनी कम दूरी में पूरी तरह से खड़ी हो जाती है। इसके लिए चालक को जब गाड़ी 100 किमीप्रघं की गति पर होती है उस समय पूरा ब्रेक लगाना होता है इसके बाद जितनी दूरी लेकर गाड़ी खड़ी हो जाती है उसे नापकर यह बताया जाता है कि चालक ने कितना से कम समय लेकर गाड़ी को रोक दिया। कार निर्माता कंपनियां अपनी हर गाड़ी को तैयार करके इन सारे टेस्टों को पूरा करती हैं।
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400 मीटर रन
400 मीटर रन
जिस तरह से रेस में कोई रेसर 100 मीटर की स्प्रिंट करता है ठीक उसी तरह से गाड़ियों के लिए यह टेस्ट जरूरी होता है।
स्लैलम
स्लैलम एक ऐसा चैलेंज है जिसके तहत एक लाइन में थोड़े-थोड़े गैप के साथ कोन्स को खड़ा किया जाता है इसके बाद उसके बीच मे से जिग-जैग करके गाड़ी निकाली जाती है और जहां से यह शुरू होता है वहीं पर खत्म भी किया जाता है। इसमें समय की गणना की जाती है और जब आप टास्क कंपलीट करते हैं तो देखा जाता है इसमें आपने कितना समय लिया।