देश में डीजल गाड़ियों की मांग में करीब 50 फीसदी की कमी आई है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अक्तूबर, 2020 तक कुल गाइयों की बिक्री में डीजल इंजन कारों की हिस्सेदारी घटकर 17 फीसदी रह गई। वहीं, पिछले साल इसी अवधि के दौरान डीजल गाड़ियों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी थी। यानी, डीजल गाड़ियों की मांग में करीब 50 फीसदी की कमी आई है।
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2020 Hyundai Creta
- फोटो : Hyundai
हैचबैक और सेडान सेगमेंट को झटका
सबसे बड़ी गिरावट हैचबैक और सेडान सेगमेंट की कारों में देखने को मिली है। इन दोनों श्रेणियों के गाड़ियों में डीजल इंजन की बिक्री 14 फीसदी से घटकर दो फीसदी रह गई है। इतना ही नहीं, एसयूवी, कम्पैक्ट एसयूवी और एमपीवी में भी डीजल इंजन गाड़ियों की हिस्सेदारी 71 फीसदी से घटकर 43 फीसदी रह गई।
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Kia Sonet
- फोटो : Kia Motrors (File Photo)
5 SUV में से 3 पेट्रोल इंजन वाली
सियाम के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में पेट्रोल एसयूवी की हिस्सेदारी बढ़ी है। मिड-साइज सेगमेंट के एसयूवी खरीदार भी डीजल की बजाय पेट्रोल वेरिएंट खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में बिकने वाली हर पांच एसयूवी में से तीन पेट्रोल इंजन वाली थी।
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Hyundai Venue
डीजल की बढ़ती कीमत का असर
ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल गाड़ियों की मांग घटने की सबसे बड़ी वजह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में कम होता अंतर। दोनों ईधन की कीमतों में अंतर लगातार कम हो रहा है, जो ग्राहकों को हतोत्साहित कर रहा है। इससे यह हुआ है कि पेट्रोल और डीजल वाहन की चलाने की लागत लगभग बराबर तक पहुंच गई है। इससे ग्राहक डीजल गाड़ी के लिए अतिरिक्त रकम चुकाने को तैयार नहीं हैं।
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Tata Nexon
- फोटो : Tata Motors
रजिस्ट्रेशन 10 साल करने से झटका
डीजल गाड़ियों की मांग कम होने की दूसरी वजह पेट्रोल की नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 15 साल के लिए किया जाता है। वही, डीजल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 10 साल के लिए किया जाता है। यह कदम एनजीटी के फैसले के बाद उठाया गया है। डीजल की गाड़ियों से बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए यह सख्ती की गई थी। इसका भी असर डीजल इंजन गाड़ियों पर पड़ा है जिससे मांग में कमी आई है।
Kia Seltos Anniversary Edition
- फोटो : Kia Motors
महंगी गाड़ियों में ही डीजल इंजन की मांग
वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि बीएस-6 मानकों के चलते डीजल इंजन की निर्माण लागत में बढ़ोतरी हो गई है। यही वजह थी कि रेनो, मारुति, निसान, स्कोडा और फॉक्सवैगन ने डीजल इंजन के निर्माण से ही तौबा कर ली। हालांकि मारुति ने डीजल इंजन को फिर से बनाने का एलान किया है जबकि बाकी वाहन कंपनियां केवल महंगी कारों में ही डीजल इंजन दे रही हैं।