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त्योहारों में गाड़ियों की बंपर मांग से गुलजार हुआ बाजार, लेकिन फिर भी क्यों मायूस हो रहे ग्राहक?

Fri, 13 Nov 2020 03:54 PM IST
श्रीधर मिश्रा ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
ऑटो सेक्टर के लिए यह साल किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। कोरोना वायरस महामारी के कारण इस साल करीब दो महीने सभी कंपनियों के प्रोडक्शन बंद रहे। हालांकि, अब ऑटो सेक्टर ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है और इसका एक बड़ा कारण भारत में त्योहारी सीजन है। दरअसल लॉकडाउन के बाद जब इस साल सभी शोरूम खुलने लगे, तो कंपनियों और डीलरों के जहन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या लोग वाहनों की खरीदारी करेंगे। लेकिन कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना काल में वाहन कंपनियों को ग्राहकों का बंपर साथ मिला। लेकिन इसी भारी मांग के कारण ग्राहकों को एक नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल इस त्योहार वाहनों की इतनी जबरदस्त खरीदारी हो रही है कि वाहनों पर 8 से 9 महीने तक का वेटिंग पीरियड बढ़ गई है। इससे ग्राहक अपनी पसंद की गाड़ी को इस त्योहार घर नहीं ला पा रहे हैं।

 
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शोरूम से खाली हाथ वापस लौट रहे ग्राहक

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Auto Industry - फोटो : PTI
जबरदस्त मांग के चलते कई कंपनियों के वाहनों पर वेटिंग पीरियड बढ़ गई है। खास कर कार कंपनियों के लिए वाहनों की डिलीवरी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में जो ग्राहक इस त्योहार अपने घर नई कार लाना चाहते थे, उनके निराश होना पड़ रहा है। 
 
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क्यों नहीं हो पा रही डिलीवरी?

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Bike Manufacturing Plant - फोटो : Social Media
दरअसल कोरोना काल के कारण किसी भी कंपनी को पूरी क्षमता पर काम करने की इजाजत नहीं मिली है। आसान भाषा में समझें तो कोरोना से पहले जहां एक बार में 15 वर्कर काम करते थे, तो वहीं अब सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को देखते हुए यह संख्या आधी हो गई है। ऐसे में वाहनों को बनाने की रफ्तार कम हो गई है। इससे वाहनों की डिलीवरी पर बुरा असर पड़ा है।
 

बंपर मांग बनी संजीवनी, लेकिन बढ़ी परेशानी

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Bike Manufacturing Plant - फोटो : PTI
कोरोना काल में लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट और भीड़ से बचने के लिए नए वाहनों की खरीदारी कर रहे हैं। यही कारण है कि इस त्योहारी वाहनों की ज्यादा खरीदारी हो रही है, लेकिन प्रोडक्शन में देरी के कारण डिलीवरी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।

 
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नहीं मिला तैयारी का मौका

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फाइल फोटो - फोटो : PTI
हर साल त्योहारों के पास आते ही कंपनियां प्रोडक्शन की रफ्तार बढ़ा देती हैं, लेकिन इस बार कोरोना के कारण कंपनियों को तैयारी का मौका नहीं मिला।
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