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नहीं दिखनेवाला एयरबैग कार के लिए कितना जरूरी होता है, जानें कैसे बचाता है आपकी जान

Mon, 16 Mar 2020 10:46 AM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Airbag (एयरबैग) हर कार में होता है, लेकिन यह सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देता। ऐसे में किसी के मन में यह सवाल उठ सकता है कि यह कार में कहां होता है। इसकी उपयोगिता क्या है। और सबसे बढ़कर कि यह कार सवार की जान बचाने में कैसे मदद करता है। यहां जानिए इन सभी सवालों के जवाब।
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Airbag in car - फोटो : social media
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विस्तार
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अब हर कार में एयरबैग स्टैंडर्ड फीचर के रूप में मिलता है। कार में ड्राइवर एयरबैग तो अनिवार्य है। सड़कों पर चलने वाली ज्यादातर कारों में एयरबैग की सुविधा दी जाती है जो किसी दुर्घटना की स्थिति में ड्राइवर की जान बचाने में मददगार साबित होती है। 
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कारों में आजकल जो एयरबैग आते हैं उन्हें SRS एयरबैग कहा जाता है। जबकि पहले यह सिर्फ एयरबैग होता था। SRS का मतलब (Supplemental Restraint System) होता है। यह इस बात को बताता है कि जैसे ही आप अपनी कार स्टार्ट करते हैं, कार की मीटर में लगे SRS इंडिकेटर कुछ सेकेंड के लिए जल जाते हैं। अगर SRS इंडिकेटर कुछ सेकेंड्स के बाद बंद नहीं होते या फिर जलते रह जाते हैं तो समझ जाइए कि एयरबैग में कोई ना कोई दिक्कत है। 

एयरबैग ऐसे करता है काम
यह जानना भी बहुत दिलचस्प है कि आखिर कार में मौजूद यह महत्वपूर्ण सुरक्षा काम कैसे करता है। दरसल गाड़ी के बंपर पर एक इंपैक्ट सेंसर लगा होता है जैसे ही गाड़ी किसी चीज से टकराती है तो इंपैक्ट सेंसर की मदद से एक हल्का सा करंट एयरबैग के सिस्टम में जाता है। जिससे यह एयरबैग के फुला देता है। एयरबैग के अंदर एक गैस (sodium azide) भरी होती है। एयरबैग के भीतर यह किसी अन्य रूप में भरी होती है।  जैसे ही इंपैक्ट सेंसर एयरबैग को करंट भेजता है, वह एयरबैग के भीतर भरी चीज को गैस के रूप में बदल देता है। एयरबैग कॉटन से बना होता है और इस पर सिलिकॉन की कोटिंग की जाती है। यह जानना बहुत दिलचस्प है कि एक सेकंड से भी कम समय (लगभग 1/20 सेकंड यानी एक सेकंड के बीसवें हिस्से) में लगभग 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बंद एयरबैग फूल जाता है। 

समय पर एयरबैग को बदलवाना चाहिए
हर सामान की एक एक्सपायरी डेट होती है। इसलिए एयरबैग की भी एक तय समय के बाद एक्सपायरी डेट होती है। कुछ समय बाद एयरबैग को भी बदलने की जरूरत होती है। हालांकि एयरबैग के काम करने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है वे काफी मजबूत होते हैं, लेकिन इसका काम करना काफी हद तक एयरबैग इग्नाइटर पर भी निर्भर होता है। 

एयरबैग से मौत भी संभव
कई बार ऐसी खबरें सामने आईं हैं कि एयरबैग से कार चालक की मौत हो गई है। कुछ समय पहले ऐसी एक घटना हुई थी। हरियाणा में पलवल के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग पर बघौला गांव के पास आगे चल रहे एक कैंटर ने अचानक ब्रेक लगा दी, जिससे पीछे आ रही गाड़ी, कैंटर से टकरा गई। दुर्घटना में कार चालक को गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के दौरान गाड़ी में लगा एयर बैग इतनी तेजी से खुला कि उसके तेज प्रेशर से ड्राइवर का लीवर फट गया जिससे उसकी मौत हो गई। 
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सीट बेल्ट से है ये संबंध
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कार की सीट बेल्ट का भी एयरबैग से संबंध होता है। एयरबैग को बनाते वक्त इस बात का भी ख्याल रखा जाता है कि गाड़ी में बैठे आदमी ने सीट बेल्ट लगा रखी हो। इसलिए सिर्फ एयरबैग के भरोसे कार नहीं चलाना चाहिए। गाड़ी में बैठते ही सीट बेल्ट जरूर लगानी चाहिए। किसी दुर्घटना या फिर किसी और वजह से आपकी कार का एयरबैग खुल जाता है तो किसी अधिकृत डीलरशिप या वर्कशॉप में ही उसे ठीक करवाएं, ताकि किसी भी तरह की चूक से बचा जा सके। बच्चों को कभी भी एयरबैग के सामने ना बैठाएं। 
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