वाकया उस समय का है जब बीते 27 फरवरी को एसबीआई के वित्तीय समावेशन आउटरीच कार्यक्रम में शिरकत करने के सिलसिले में वित्त मंत्री गुवाहाटी गई थीं। सीतारमण ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि असम में चाय बागान कामगारों के कुछ 2.5 लाख बैंक खाते चलन में नहीं थे। यह कार्यक्रम वित्तीय सेवा विभाग के साथ राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (एसएलबीसी) द्वारा आयोजित किया गया था।
बैंक अफसरों के संगठन ने की निंदा
सोशल मीडिया पर यह क्लिप वायरल होने के बाद ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (एआईबीओसी) ने एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार को वित्त मंत्री द्वारा कथित रूप से फटकार लगाए जाने की ओलाचना की। संगठन ने कहा, इसकी कड़ी निंदा की जाती है। एआईबीओसी बैंक अधिकारियों का सबसे बड़ा संगठन है और इसकी सदस्य संख्या करीब तीन लाख 20 हजार की है।
एआईबीओसी ने कहा, सबसे दुखद बात यह है कि किसी ने पूरी घटना को रिकॉर्ड किया और सुनिश्चित किया कि वह सोशल मीडिया पर वायरल हो। जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। हम मांग करते हैं कि किसी असामाजिक तत्व द्वारा कार्यक्रम के दौरान रिकॉर्डिंग किए जाने और सोशल मीडिया का दुरुपयोग किये जाने के मामले की जांच होनी चाहिए।
विवाद बढ़ा तो वापस लिया बयान
13 मार्च को सामने आए एआईबीओसी के बयान की असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 14 मार्च को रात के 9:44 बजे ट्वीट कर की निंदा की। इसके चंद घंटे बाद 15 मार्च को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ट्वीट किया जिसमें एआईबीओसी द्वारा एक ईमेल करके अपना बयान वापस लेने की जानकारी दी गई थी।