Vakri Shani: वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह के गोचर के दौरान एक निश्चित समय होता है। शनि जुलाई में वक्री अवस्था में मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं और यह 23 अक्तूबर तक इसी अवस्था में रहेंगे। शनि देव को तीनों लोकों का या कर्म-दाता माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शनि को व्यक्ति की कुंडली में दुख, बीमारी, दर्द, खनिज, तेल, लोहा, विज्ञान आदि के ग्रह के रूप में देखा जाता है। शनि देव 12 राशियों में से दो राशियों का स्वामी ग्रह है, जिन्हें वैदिक ज्योतिष में मान्यता प्राप्त है, अर्थात् कुंभ और मकर। 27 नक्षत्रों में इसे पुष्य, अनुराधा और उत्तर भाद्रपद नक्षत्रों का स्वामी भी माना जाता है। मेष राशि में शनि उच्च का तुला राशि में होने पर नीच का हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि कमजोर हो तो उसे जीवन भर भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है। जीवन में दुर्घटनाएं शामिल हैं। इससे माता-पिता से दूरियां भी बढ़ती हैं। वहीं यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अनुकूल परिणाम देने की स्थिति में हो तो ऐसे व्यक्ति को सफलता मिलती है। ये लोग स्वभाव से ईमानदार, दृढ़ निश्चयी और ईमानदार होते हैं। आइए जानते हैं कौन सी वो राशियां हैं जिसको शनि देव की वक्री अवस्था लाभकारी परिणाम देगी।