चाणक्य नीति (पुस्तक कवर)
आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में एक श्लोक लिखा है जिसमें चरित्रहीन स्त्री, कपटी मित्र, जवाब देने वाला नौकर और सांप के निवास वाले घर से सदैव दूर रहने के लिए कहा गया है। यह श्लोक इस प्रकार है-
दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायक:।
स-सर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव न संशय:।।
ऊपर लिखे श्लोक का अर्थ है- दुष्ट स्वभाव वाली, कड़वा बोलने वाली, बुरे चरित्र वाली स्त्री, नीच और कपटी मित्र, पलटकर जवाब देने वाला नौकर और सांप वाला घर इन चारों के साथ रहने पर मृत्यु के समान कष्ट प्राप्त होता है।